NITI Aayog presents Clean Energy Transition Blueprint for Andhra Pradesh
संदर्भ:
हाल ही में नीति आयोग (NITI Aayog) ने अपने ‘एसेट’ (ASSET – Accelerating Sustainable State Energy Transition) प्लेटफॉर्म के तहत आंध्र प्रदेश के लिए एक महत्वाकांक्षी ‘स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण ब्लूप्रिंट’ (Energy Transition Blueprint) प्रस्तुत किया है। इस योजना का लक्ष्य 2035 तक आंध्र प्रदेश को भारत के शीर्ष तीन नवीकरणीय ऊर्जा हब में से एक बनाना है।
आंध्र प्रदेश के लिए ‘स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण ब्लूप्रिंट’:
- मसौदा: नीति आयोग के सीईओ बी.वी.आर. सुब्रमण्यम द्वारा प्रस्तुत इस मसौदे में ₹7.5 लाख करोड़ के भारी निवेश और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास का रोडमैप तैयार किया गया है।
- क्षमता लक्ष्य (Capacity Targets):
- घरेलू मांग के लिए: 2035 तक 35 GW सौर ऊर्जा, 12 GW पवन ऊर्जा और 55-60 GWh ऊर्जा भंडारण (Storage) क्षमता विकसित करना।
- राष्ट्रीय निर्यात के लिए: अतिरिक्त 30 GW सौर, 25-30 GW पवन और 10-12 GW ‘पंप स्टोरेज’ परियोजनाओं की स्थापना।
- निवेश संरचना: कुल ₹7.5 लाख करोड़ के निवेश का अनुमान है, जिसमें से लगभग 90% निवेश निजी क्षेत्र से आने की उम्मीद है। यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) का एक बड़ा मॉडल होगा।
- किफायती बिजली (Affordability): नीति आयोग का अनुमान है कि 2035 तक बिजली खरीद लागत घटकर ₹3.90 से ₹4 प्रति यूनिट के बीच आ जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं और उद्योगों को सस्ती बिजली मिलेगी।
- बुनियादी ढांचा आधुनिकीकरण: * ट्रांसमिशन सेक्टर के लिए ₹65,000-₹70,000 करोड़ का आवंटन, जिसमें ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और HVDC (High Voltage Direct Current) लाइनें शामिल हैं।
- वितरण नेटवर्क (Distribution) को मजबूत करने के लिए ₹40,000 करोड़ का प्रावधान।
- रोजगार सृजन: इस विशाल परियोजना से राज्य में 5 से 6 लाख नए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है।
- निगरानी व्यवस्था: इस योजना की प्रगति की निगरानी के लिए एक समर्पित ‘एनर्जी वॉर रूम’ (Energy War Room) स्थापित किया जाएगा, जो मार्च 2026 से पूर्णतः सक्रिय हो जाएगा।
रणनीतिक महत्व:
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ब्लू इकोनॉमी: आंध्र प्रदेश की विशाल तटरेखा और उच्च पवन गति इसे पवन और सौर ऊर्जा के एकीकरण के लिए आदर्श बनाती है। यह ब्लूप्रिंट ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) और अमोनिया उत्पादन के लिए भी एक आधार तैयार करता है, जो भविष्य के ईंधन हैं।
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कृषि में सुधार: योजना के तहत कृषि क्षेत्र के लिए ‘डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर प्रोजेक्ट्स’ पर जोर दिया गया है। इससे किसानों को समय पर मुफ्त/सस्ती बिजली मिलेगी।
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आर्थिक लाभ: बिजली खरीद लागत गिरकर ₹3.90–₹4 प्रति यूनिट होने की संभावना है, जिससे उद्योगों को दिन में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी, जिससे सरकारी सब्सिडी का बोझ कम होगा।
ASSET प्लेटफॉर्म क्या हैं?
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- परिचय: ASSET (Accelerating Sustainable State Energy Transition) नीति आयोग द्वारा विकसित एक रणनीतिक मंच है जो भारत के विभिन्न राज्यों को उनके विशिष्ट संसाधनों के आधार पर स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के लिए एक अनुकूलित रोडमैप तैयार करने में सहायता करता है।
- उद्देश्य: राज्यों को उनकी ऊर्जा मांग को जीवाश्म ईंधन से हटाकर नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) की ओर मोड़ने के लिए तकनीकी और नीतिगत सहायता प्रदान करना।
- कार्यप्रणाली: यह राज्यों की भौगोलिक स्थिति, औद्योगिक आधार और बिजली की खपत के पैटर्न का विश्लेषण करता है ताकि ‘एक आकार सभी के लिए उपयुक्त’के बजाय राज्य-विशिष्ट समाधान दिए जा सकें।
- मुख्य घटक:
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- डेटा-आधारित योजना: AI और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करके भविष्य की ऊर्जा मांग का सटीक अनुमान लगाना।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी: परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देना।
- क्षमता निर्माण: राज्य ऊर्जा विभागों और डिस्कॉम (DISCOMs) के अधिकारियों को आधुनिक ऊर्जा प्रणालियों के लिए प्रशिक्षित करना।
- ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर: नवीकरणीय ऊर्जा को उत्पादन केंद्र से औद्योगिक केंद्रों तक ले जाने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार।
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सहकारी संघवाद: भारत का ऊर्जा क्षेत्र समवर्ती सूची (Concurrent List) के अंतर्गत आता है। ASSET प्लेटफॉर्म केंद्र और राज्यों के बीच एक सेतु का काम करता है।
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ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता: यह प्लेटफॉर्म राज्यों को ऊर्जा भंडारण (Storage), पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स (PSP) और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे भविष्य के क्षेत्रों में निवेश के लिए प्रेरित करता है।

