Northeast India first emergency landing facility in Assam
संदर्भ:
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ जिले में मोरन बाईपास (NH-37/NH-127) पर पूर्वोत्तर भारत की पहली आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (Emergency Landing Facility – ELF) का उद्घाटन किया।
आपातकालीन लैंडिंग सुविधा या ELF (Emergency Landing Facility) क्या हैं?
- ELF राष्ट्रीय राजमार्गों का वह विशिष्ट हिस्सा होता है जिसे इस तरह से डिजाइन और निर्मित किया जाता है कि आपातकाल या युद्ध की स्थिति में वहां सैन्य लड़ाकू और परिवहन विमान सुरक्षित रूप से उतर सकें और उड़ान भर सकें।
- इन सड़कों को सामान्य सड़कों की तुलना में कहीं अधिक मजबूत कंक्रीट (PQC – Pavement Quality Concrete) से बनाया जाता है ताकि वे विमानों के भारी वजन और लैंडिंग के दौरान लगने वाले घर्षण (Friction) को झेल सकें।
मोरन बाईपास ELF की मुख्य विशेषताएं:
- स्थान: राष्ट्रीय राजमार्ग 37 (अब NH-127) पर मोरन बाईपास, डिब्रूगढ़ (असम)।
- लंबाई: यह हवाई पट्टी लगभग 4.2 किलोमीटर लंबी है, जिसे विशेष रूप से लड़ाकू और भारी मालवाहक विमानों के परिचालन के लिए सुदृढ़ किया गया है।
- निर्माण और लागत: इसे लगभग ₹100 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है।
- निर्माणकर्ता: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) द्वारा वायुसेना के समन्वय से बना है।
- अत्याधुनिक तकनीक: रनवे को पेवमेंट क्वालिटी कंक्रीट (PQC) से बनाया गया है, जो भारी विमानों के उतरने के दबाव और तापमान को सहन करने में सक्षम है।
- विमान क्षमता: यह सुविधा 40 टन तक के लड़ाकू विमानों (जैसे राफेल और सुखोई-30 MKI) और 74 टन तक के भारी परिवहन विमानों (जैसे C-130J सुपर हरक्यूलिस) को संभालने में सक्षम है।
महत्व:
- सामरिक सुरक्षा: असम का ऊपरी हिस्सा चीन (LAC) और म्यांमार की सीमाओं के करीब होने के कारण अत्यधिक संवेदनशील है। मोरन ELF, चबुआ और तेजपुर जैसे प्रमुख वायु सेना अड्डों के लिए एक ‘बैकअप’ के रूप में कार्य करेगा।
- आपदा प्रबंधन: पूर्वोत्तर क्षेत्र बाढ़ और भूकंप के प्रति संवेदनशील है। यह पट्टी सड़क संपर्क कटने की स्थिति में दूरदराज के क्षेत्रों तक राहत सामग्री, बचाव दल और चिकित्सा सहायता तेजी से पहुँचाने के लिए एक ‘लाइफलाइन’ साबित होगी।
- ड्यूल-यूज़ इन्फ्रास्ट्रक्चर: यह परियोजना ‘प्रगति का हाईवे’ और ‘रनवे’ दोनों के रूप में कार्य करती है। सामान्य समय में यह वाणिज्यिक यातायात के लिए खुला रहेगा।
- सीमावर्ती क्षेत्रों का एकीकरण: सरकार की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत, मोरन ELF का उद्घाटन भारत का ‘पूर्वी प्रवेश द्वार’ को और अधिक सशक्त बनाने पर केंद्रित है।
- विशेष: भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा ग्रिड के तहत पूरे देश में 28 ELF स्थलों की पहचान की है। इसमें पहली ELF NH-925A (बाड़मेर, राजस्थान – 2021) में बनाई गई। यह ‘पीएम गति शक्ति’ योजना के तहत नागरिक और सैन्य समन्वय का एक सशक्त उदाहरण है।

