Obscene Content
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संदर्भ:
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने कथित रूप से अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने के आरोप में कम से कम 25 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की वेबसाइटों और ऐप्स को ब्लॉक करने का निर्देश दिया है। यह कदम देश में डिजिटल सामग्री की निगरानी और नियंत्रण के तहत उठाया गया है, जिससे ऑनलाइन माध्यमों पर फैल रही अनैतिक सामग्री पर लगाम लगाई जा सके।
अश्लीलता में वृद्धि के कारण:
- डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का तीव्र विस्तार: ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया और वीडियो शेयरिंग वेबसाइट्स के तेजी से बढ़ने के कारण आपत्तिजनक सामग्री तक पहुंच और उसका प्रसार बेहद आसान हो गया है।
- ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर पूर्व–जांच का अभाव: पारंपरिक फिल्मों के विपरीत, ओटीटी पर प्रसारित सामग्री किसी पूर्व प्रमाणन या सेंसरशिप से नहीं गुजरती, जिससे रचनाकार पारंपरिक नियंत्रणों को दरकिनार कर सकते हैं।
- सामग्री विनियमन तंत्र की कमजोरी: स्व-नियामक ढांचे अक्सर प्रभावी क्रियान्वयन में असफल रहते हैं, परिणामस्वरूप अश्लील सामग्री का अनियंत्रित प्रकाशन होता है।
- गोपनीयता और एन्क्रिप्शन तकनीकों का दुरुपयोग: कई उपयोगकर्ता एन्क्रिप्टेड एप्स और गुमनाम ब्राउज़िंग टूल्स का उपयोग करके आपत्तिजनक सामग्री साझा करते हैं या देखते हैं, जिससे वे कानूनी निगरानी से बच जाते हैं।
भारत में बढ़ती अश्लीलता के प्रभाव:
- सामाजिक नैतिकता पर प्रभाव: डिजिटल मीडिया में अश्लील सामग्री की बढ़ती उपलब्धता सार्वजनिक नैतिकता को प्रभावित करती है, विशेष रूप से बच्चों और युवाओं जैसे संवेदनशील वर्गों पर इसका गहरा असर पड़ता है।
- साइबर अपराध और शोषण में वृद्धि: ऑनलाइन अश्लीलता में वृद्धि के कारण साइबरबुलिंग, यौन उत्पीड़न और मानव तस्करी जैसे अपराधों को बढ़ावा मिलता है। इससे महिलाओं और बच्चों का शोषण आसान हो जाता है।
- विनियामक तंत्र के लिए चुनौती: सूचना प्रौद्योगिकी नियमों (IT Rules) के बावजूद, तकनीकी उपायों जैसे VPN और मिरर साइट्स के माध्यम से नियमों से बच निकलना आसान हो गया है, जिससे इन कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन एक बड़ी चुनौती बन गया है।
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम सार्वजनिक शालीनता: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक शालीनता के बीच संतुलन बनाना आज भी एक विवादास्पद और जटिल विषय बना हुआ है।
भारत में अश्लीलता से संबंधित कानूनी ढांचा:
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000:
- धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण को दंडनीय अपराध घोषित करता है।
- धारा 67A: विशेष रूप से यौन रूप से स्पष्ट सामग्री (sexually explicit content) के प्रकाशन या प्रसारण के लिए दंड का प्रावधान करता है।
- भारतीय न्याय संहिता 2023
- धारा 294(पूर्व में आईपीसी, 1860 की धारा 292): अश्लील सामग्री की बिक्री या वितरण, जिसमें डिजिटल सामग्री भी शामिल है, को प्रतिबंधित करता है।
- महिलाओं के अश्लील प्रतिनिधित्व (निषेध) अधिनियम, 1986
- धारा 4: ऐसे किसी भी विज्ञापन या प्रकाशन पर रोक लगाता है जो महिलाओं को अशोभनीय ढंग से प्रस्तुत करता है।
- सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 (IT Rules, 2021)
- ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को एकआचार संहिता (Code of Ethics) का पालन करना अनिवार्य बनाया गया है।
- एकतीन–स्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली (Three-tier grievance redressal mechanism) स्थापित की गई है।
- एकस्व–नियामक संस्था — डिजिटल प्रकाशक सामग्री शिकायत परिषद (Digital Publisher Content Grievances Council – DPCGC) का गठन किया गया है, जिसका नेतृत्व सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करते हैं।