Operation Trishi-I
संदर्भ:
हाल ही में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में आतंकवाद के खिलाफ ‘ऑपरेशन त्रिशी-I’ (Operation Trashi-I) संचालित किया गया।
ऑपरेशन त्रिशी-I के बारे में:
- परिचय: यह ऑपरेशन भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स (16 कॉर्प्स), जम्मू-कश्मीर पुलिस (JKP) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया था। इसका मुख्य केंद्र किश्तवाड़ का चत्रू (Chatroo) और डिच्छर (Dichhar) वन क्षेत्र रहा है।
- उद्देश्य: किश्तवाड़ के ऊंचे इलाकों और घने जंगलों में छिपे विदेशी आतंकवादियों, विशेष रूप से जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के नेटवर्क को समाप्त करना।
- सुरक्षा बलों का समन्वय: इस ऑपरेशन की सफलता का मुख्य आधार सिनर्जी (Synergy) थी। इसमें निम्नलिखित एजेंसियों ने भाग लिया:
- भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स (16 कॉर्प्स) और पैरा (SF) इकाइयाँ।
- जम्मू-कश्मीर पुलिस (JKP) की विशेष अभियान इकाई (SOG)।
- केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF)।
- नवाचार: सुरक्षा बलों ने इस ऑपरेशन में ‘पारंपरिक युद्ध’ और ‘आधुनिक तकनीक’ का मेल प्रदर्शित किया:
- रियल-टाइम सर्विलांस: घने कोहरे और खराब मौसम के बावजूद आतंकवादियों को ट्रैक करने के लिए हाई-एंड ड्रोन्स (MALE UAVs) का उपयोग किया गया।
- सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT): आतंकवादियों के बीच होने वाले एन्क्रिप्टेड संचार को इंटरसेप्ट करने के लिए आधुनिक संचार उपकरणों का प्रयोग किया गया।
- घेराबंदी नीति: बलों ने ‘हथौड़ा और निहाई’ (Hammer and Anvil) रणनीति अपनाई, जहां एक दल आतंकियों को खदेड़ता था और दूसरा दल पहले से तय निकास द्वारों पर उनकी प्रतीक्षा करता था।
- प्रमुख उपलब्धियां:
- शीर्ष नेतृत्व का खात्मा: ऑपरेशन के दौरान जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े कई विदेशी आतंकवादियों और स्थानीय कमांडरों को निष्प्रभावी किया गया।
- हथियारों की बरामदगी: भारी मात्रा में अमेरिकी मूल की M4 कार्बाइन, नाइट विजन डिवाइस और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बरामद किए गए।
- सुरक्षा ढांचा: इस ऑपरेशन ने किश्तवाड़-अनंतनाग अक्ष (Axis) को सुरक्षित किया, जिसका उपयोग आतंकी घुसपैठ के लिए करते थे।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चलाए गए अन्य ऑपरेशन:
- ऑपरेशन ऑल-आउट (Operation All Out): वर्ष 2017 में शुरू किया गया यह अभियान कश्मीर घाटी से आतंकवाद के पूर्ण सफाए हेतु एक बहु-एजेंसी प्रयास है। इसके तहत भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस एक साझा ‘हिट-लिस्ट’ के आधार पर लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के कमांडरों को लक्षित किय।
- ऑपरेशन सर्प विनाश (Operation Sarp Vinash): यह ऐतिहासिक ऑपरेशन 2003 में पीर पंजाल के दक्षिण में स्थित ‘हिल काका’ के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में चलाया गया था। सुरक्षा बलों ने यहाँ आतंकियों द्वारा निर्मित कई वर्षों पुराने कंक्रीट बंकरों और ठिकानों को ध्वस्त कर दिया था। यह स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े आतंकवाद विरोधी अभियानों में से एक माना जाता है, जिसमें लगभग 100 आतंकवादी मारे गए थे।
- ऑपरेशन त्रिनेत्र (Operation Trinetra): हाल के वर्षों में राजौरी और पुंछ के घने जंगलों में छिपे विदेशी आतंकवादियों का पता लगाने के लिए यह ‘तकनीक-आधारित’ अभियान चलाया गया। ऑपरेशन त्रिनेत्र की प्रमुख विशेषता मानव खुफिया (HUMINT) और तकनीकी खुफिया (TECHINT) का सटीक समन्वय है। इसमें उन्नत ड्रोन्स, स्निफर डॉग्स और आधुनिक निगरानी उपकरणों का उपयोग किया गया।

