Ozone hole shrinkage
संदर्भ:
2025 का अंटार्कटिक ओज़ोन छिद्र 1 दिसंबर 2025 को बंद हो गया। यह लगातार दूसरा साल है जब इस छिद्र का आकार छोटा छोटा रहा। इस संकुचन के बाद अब ओज़ोन परत की रिकवरी की उम्मीदें बढ़ीं हैं ।
ओज़ोन छिद्र संकुचन:
ओज़ोन परत पृथ्वी को सूर्य से आने वाली तीव्र अल्ट्रावॉयलेट-B किरणों से बचाती है। वैज्ञानिकों ने 1980 के दशक में पहली बार देखा कि अंटार्कटिका के ऊपर ओज़ोन की मात्रा तेजी से गिर रही है और एक बड़ा ओज़ोन छिद्र बन रहा है। इसका मुख्य कारण मानव-निर्मित रसायन CFCs, HCFCs, Halons जैसे ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थ (ODS) थे। इन पदार्थों पर वैश्विक प्रतिबंध के बाद से ओज़ोन परत अब लगातार ठीक हो रही है और छिद्र धीमे-धीमे संकुचित हो रहा है।
ओज़ोन छिद्र क्यों घट रहा है?
- ओज़ोन परत के सुधार का श्रेय 1987 के मॉन्ट्रियाल प्रोटोकॉल को दिया जाता हैं। यह समझौता पर्यावरण विज्ञान के इतिहास में सबसे सफल वैश्विक प्रयास माना जाता है। इसके कारण दुनिया ने CFCs का उत्पादन 99% से अधिक घटा दिया (WMO रिपोर्ट 2022), वायुमंडल में CFC-11 और CFC-12 की मात्रा 1990 के दशक के बाद से लगातार गिर रही है और क्लोरीन और ब्रोमीन जैसे रसायनों की सांद्रता अब हर दशक में कम हो रही है।
- वैश्विक एजेंसियों के मापन स्पष्ट संकेत देते हैं कि ओज़ोन छिद्र संकुचित हो रहा है। सबसे पहले 2016 में NASA ने “healing trend” की पुष्टि की। 2019, 2022 और 2024 जैसे वर्षों में छिद्र आकार में छोटा रहा है।
साल-दर-साल आकार क्यों बदलता है?
-
स्ट्रेटोस्फियर का तापमान: ठंडे तापमान से Polar Stratospheric Clouds बढ़ती हैं, जो ओज़ोन को तेजी से नष्ट करती हैं।
गर्म वर्ष में छिद्र छोटा होता है।
-
Polar Vortex की ताकत: मजबूत वॉर्टेक्स रसायनों को भीतर कैद रखता है और अधिक क्षरण करता है।
-
ज्वालामुखी विस्फोट: 2022 के Hunga Tonga विस्फोट ने स्ट्रेटोस्फियर में जलवाष्प और कण बढ़ा दिए, जिससे अस्थायी नुकसान बढ़ा।
-
जलवायु परिवर्तन: वैज्ञानिक बताते हैं कि वैश्विक तापमान बढ़ने से स्ट्रेटोस्फियर ठंडी हो रही है, जो ओज़ोन पुनर्प्राप्ति के लिए चुनौती बन सकती है।
यह पूरा सुधार कब तक होगा?
- WMO और UNEP द्वारा जारी Scientific Assessment of Ozone Depletion (2022–23) के अनुसार: अंटार्कटिका में पूर्ण सुधार: 2066 तक, आर्कटिक में सुधार: 2045 तक तथा शेष पृथ्वी में 2040 तक।
यह सुधार क्यों महत्वपूर्ण है?
- त्वचा कैंसर के खतरे कम होंगे।
- मोतीबिंदु और प्रतिरक्षा क्षति का जोखिम घटेगा।
- फसलें और समुद्री प्लवक UV-B से सुरक्षित रहेंगे।
- पृथ्वी का ऊर्जा संतुलन और जलवायु तंत्र स्थिर होगा।

