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CITES की पैंगोलिन आधारित रिपोर्ट (Pangolin-based CITES report) | Ankit Avasthi Sir

Pangolin-based CITES report

Pangolin-based CITES report

संदर्भ:

विश्व पैंगोलिन दिवस 2026 को जाती CITES (कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन एंडेंजर्ड स्पीशीज़ ऑफ़ वाइल्ड फौना एंड फ्लोरा) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में वैश्विक स्तर पर 5 लाख से अधिक पैंगोलिन जब्त किए गए हैं। पैंगोलिन दुनिया का सबसे अधिक तस्करी किया जाने वाला स्तनधारी बन गया है।

CITES की पैंगोलिन आधारित रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

  • जब्ती का आँकड़ा: 49 देशों में कुल 2,222 घटनाओं में लगभग 553,042 पैंगोलिन और उनके अंग जब्त किए गए।
  • तस्करी के मार्ग: कम से कम 74 देश अवैध व्यापार में शामिल थे, जिनके बीच 178 अद्वितीय व्यापार मार्ग पाए गए।
  • प्रमुख स्रोत और गंतव्य: तस्करी का सबसे बड़ा मार्ग नाइजीरिया से वियतनाम के बीच देखा गया। अफ्रीका (विशेषकर नाइजीरिया, कैमरून, कांगो) प्रमुख ‘स्रोत’ और चीन व वियतनाम प्रमुख ‘गंतव्य’ देश बने हुए हैं।
  • जब्त सामग्री: जब्त की गई वस्तुओं में 99% हिस्सेदारी पैंगोलिन के अंगों, विशेषकर उनके शल्क (Scales) की थी।
  • गिरफ्तारी और सजा: 2017 से अब तक 709 गिरफ्तारियां हुईं, जिनमें से 541 अकेले ज़िम्बाब्वे में हुईं। 

पैंगोलिन के बारे में:

  • परिचय: पैंगोलिन शल्कों (Scales) वाला एकमात्र स्तनधारी है, जिसके शरीर पर केराटिन से बने सुरक्षात्मक कवच होते हैं।
  • प्रजातियाँ: दुनिया भर में पैंगोलिन की 8 प्रजातियां पाई जाती हैं:
    • एशियाई (4): इंडियन पैंगोलिन, चाइनीज़ पैंगोलिन, सुंडा पैंगोलिन, फिलीपीन पैंगोलिन।
    • अफ्रीकी (4): व्हाइट-बेलिड, ब्लैक-बेलिड, जाइंट और टेमिंक पैंगोलिन।
  • पारिस्थितिक महत्व: ये ‘प्राकृतिक इंजीनियर’ कहलाते हैं क्योंकि ये मिट्टी की खुदाई कर उसमें हवा पहुँचाते हैं और सालाना करोड़ों चींटियों/दीमकों को खाकर कीट नियंत्रण करते हैं।
  • कानूनी सुरक्षा: भारत में इन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत सर्वोच्च सुरक्षा प्राप्त है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, CITES के परिशिष्ट-I (Appendix-I) में शामिल होने के कारण इनका वाणिज्यिक व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित है।
  • तस्करी के कारण: पारंपरिक चीनी दवाओं (TCM) में शल्कों का उपयोग और मांस की मांग तस्करी का मुख्य कारण है।
  • भारत की स्थिति: TRAFFIC की रिपोर्ट के अनुसार, 2018-2022 के बीच भारत में 1,203 पैंगोलिन अवैध व्यापार का शिकार हुए। हालांकि, भारत ने 2021 की CITES रिपोर्टिंग में अपनी प्रजातियों को ‘डेटा की कमी’ (Data Deficient) श्रेणी में रखा है।
  • भारत में इंडियन पैंगोलिन (संकटग्रस्त – Endangered) और चाइनीज़ पैंगोलिन (गंभीर रूप से संकटग्रस्त – Critically Endangered) पाए जाते हैं।

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