Parkinson Disease
संदर्भ:
मोहाली स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST) के शोधकर्ताओं ने एक नैनो-टेक्नोलॉजी आधारित बायोसेंसर विकसित किया है, जो पार्किंसन रोग (Parkinson’s Disease) का पता उसके लक्षण दिखाई देने से पहले ही लगा सकता है।
पार्किंसन रोग क्या है?
- पार्किंसन रोग (Parkinson’s Disease – PD) एकप्रगतिशील (progressive) न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार है, जो मुख्य रूप से गति और शरीर के नियंत्रण (movement & motor control) को प्रभावित करता है।
- यह रोग मस्तिष्क मेंडोपामिन बनाने वाली कोशिकाओं के नष्ट होने से होता है।
- इसका संबंधα-synuclein प्रोटीन के असामान्य रूप से मुड़ने और इकट्ठा होने (misfolding & aggregation) से है। यह प्रोटीन मस्तिष्क में विषैले गुच्छे (toxic clumps) बना देता है, जिससे न्यूरॉन्स को नुकसान पहुंचता है।
- इसके प्रमुख लक्षण हैं –कंपकंपी (tremors), मांसपेशियों में कठोरता (rigidity), गति में धीमापन (slowness of movement), और संतुलन ।
यह कैसे काम करता है?
वैज्ञानिकों ने गोल्ड नैनोक्लस्टर्स (Gold Nanoclusters – AuNCs) विकसित किए हैं। ये अत्यंत छोटे, चमकदार कण होते हैं जिनका आकार कुछ नैनोमीटर ही होता है।
- इन नैनोक्लस्टर्स कोप्राकृतिक अमीनो एसिड से कोट किया गया है, ताकि वे विशेष प्रोटीन को पहचान सकें।
- प्रोलाइन (Proline)-कोटेड क्लस्टर्ससामान्य (monomeric) α-synuclein प्रोटीन से जुड़ते हैं, जो हानिरहित है।
- हिस्टिडिन (Histidine)-कोटेड क्लस्टर्सविषैले (toxic) और एकत्रित (amyloid) रूप वाले α-synuclein प्रोटीन से जुड़ते हैं, जो पार्किंसन रोग का कारण बनते हैं।