Parliament Passes Five Key Maritime Bills to Boost Blue Economy
संदर्भ:
भारत की संसद ने हाल ही में सम्पन्न मानसून सत्र में पाँच महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए हैं, जो औपनिवेशिक कालीन समुद्री कानूनों में व्यापक बदलाव लाते हैं और देश की ब्लू इकॉनमी को नई गति प्रदान करेंगे।
नए विधेयक (2025):
सरकार ने समुद्री क्षेत्र को आधुनिक बनाने और कानूनी ढांचे को सरल करने के लिए कई नए विधेयक पेश किए हैं। इनमें पाँच प्रमुख विधेयक शामिल हैं:
- बिल्स ऑफ लेडिंग, 2025:
- कानूनी दस्तावेजों को सरल बनाने पर केंद्रित।
- विवादों को कम करेगा और Ease of Doing Business को बेहतर बनाएगा।
- कैरेज ऑफ गुड्स बाय सी बिल, 2025:
- 1925 के पुराने कानून को बदल दिया।
- Hague-Visby Rules को अपनाया गया।
- अंतरराष्ट्रीय संबंध मजबूत होंगे और मुकदमों में कमी आएगी।
- कोस्टल शिपिंग बिल, 2025:
- भारत की Coastal Shipping हिस्सेदारी (modal share) को 6% तक पुनर्जीवित करने का लक्ष्य।
- सालाना लगभग ₹10,000 करोड़ की लॉजिस्टिक्स लागत बचत।
- सड़क जाम और प्रदूषण में कमी।
- मर्चेंट शिपिंग बिल, 2025:
- 1958 के पुराने कानून को पूरी तरह बदल दिया।
- जहाज़ी दुर्घटनाओं से मलबा हटाने (wreck removal) और बचाव कार्यों को तेज़ और प्रभावी बनाने की व्यवस्था।
- इंडियन पोर्ट्स बिल, 2025:
- 1908 के प्राचीन कानून को प्रतिस्थापित किया।
- Maritime State Development Council का गठन, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर योजना बनाई जा सके।
- राज्यों के Maritime Boards को छोटे बंदरगाहों के प्रबंधन की अधिक शक्ति।
- विवादों के निपटारे के लिए राज्य-स्तरीय तंत्र का निर्माण।
भारत का समुद्री क्षेत्र (India’s Maritime Sector)
- समुद्री महत्व:
- भारत की 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा है।
- 12 प्रमुख (major) बंदरगाह और 200 से अधिक छोटे (minor) बंदरगाह इसे विश्व की व्यस्ततम शिपिंग रूट्स पर एक महत्वपूर्ण ट्रेडिंग हब बनाते हैं।
- क्षेत्र का अवलोकन (Overview):
- भारत का समुद्री क्षेत्र 95% व्यापार (volume में) और 70% व्यापार (value में) संभालता है।
- 2014-15 से माल ढुलाई क्षमता (cargo handling capacity) में 87% की वृद्धि हुई।
- FY24 में 819.22 मिलियन टन कार्गो का प्रबंधन किया गया।
- नीतियाँ जैसे 100% FDI और टैक्स इंसेंटिव्स ने इस क्षेत्र को और मजबूत किया।
सरकार ने समुद्री क्षेत्र को मज़बूत करने और ब्लू इकॉनमी को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं:
- सागरमाला प्रोग्राम – बंदरगाह, तटीय विकास और कनेक्टिविटी पर फोकस।
- Maritime India Vision 2030 – भारत को टॉप 10 शिपबिल्डिंग देशों में शामिल करने का लक्ष्य, 150+ पहलें।
- इनलैंड वाटरवेज़ डेवलपमेंट – 26 नई राष्ट्रीय जलमार्ग, जिससे सड़क-रेल पर दबाव कम होगा।
- ग्रीन टग ट्रांजिशन प्रोग्राम – 2040 तक फ्यूल आधारित टग की जगह पर्यावरण-अनुकूल टग।
- सागरमंथन डायलॉग – भारत को वैश्विक समुद्री चर्चाओं का केंद्र बनाने की पहल।
- Maritime Development Fund – ₹25,000 करोड़ का फंड, बंदरगाह और शिपिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए।
- Shipbuilding Financial Assistance Policy 2.0 – भारतीय शिपयार्ड को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने के लिए मदद