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संसदीय राजभाषा समिति (Parliamentary Official Language Committee) | UPSC

Parliamentary Official Language Committee

Parliamentary Official Language Committee

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में संसदीय राजभाषा समिति ने अपना 13वां प्रतिवेदन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को प्रस्तुत किया। इसमें हिंदी को अन्य भारतीय भाषाओं के ‘सहयोगी’ के रूप में पेश करने और ‘सामासिक संस्कृति’ के तहत क्षेत्रीय शब्दों को हिंदी में शामिल करने की बात कही गई है।

संसदीय राजभाषा समिति क्या है?

  • परिचय: संसदीय राजभाषा समिति एक ‘उच्चाधिकार प्राप्त विधायी निकाय’ है। इसका मुख्य कार्य केंद्र सरकार के कार्यालयों में हिंदी के आधिकारिक उपयोग की प्रगति की समीक्षा करना और उसे बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति को सिफारिशें देना है।
  • गठन का आधार: इस समिति का गठन राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4 के प्रावधानों के तहत किया गया है।
  • स्थापना: समिति की पहली बैठक 1957 में (अनुच्छेद 344 के तहत) हुई थी, लेकिन वर्तमान स्वरूप में यह 1976 से निरंतर कार्य कर रही है।
  • संवैधानिक संदर्भ: संविधान का अनुच्छेद 344(4) एक ऐसी समिति के गठन का प्रावधान करता है जो संघ के आधिकारिक उद्देश्यों के लिए हिंदी के प्रयोग की समीक्षा करेगी।
  • संरचना: यह समिति संसद के दोनों सदनों के प्रतिनिधित्व वाला एक संयुक्त निकाय है:  
  • कुल सदस्य: 30 सदस्य (लोकसभा: 20 सदस्य और राज्यसभा: 10 सदस्य)
  • अध्यक्ष: केंद्रीय गृह मंत्री।  
  • चयन प्रक्रिया: सदस्यों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation) के आधार पर ‘एकल संक्रमणीय मत’ द्वारा किया जाता है।
    • उप-समितियां: कार्यों के सुचारू संचालन के लिए समिति को तीन उप-समितियों में विभाजित किया गया है जो विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों और विभागों का निरीक्षण करती हैं।
  • कार्य: संसदीय राजभाषा समिति का मुख्य कार्य संघ की राजभाषा नीति के कार्यान्वयन की निगरानी करना है:
    • समीक्षा (Review): संघ के आधिकारिक कार्यों में हिंदी के ‘प्रगामी प्रयोग’ की प्रगति की समीक्षा करना।
  • निरीक्षण: केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और बैंकों का दौरा कर वहां राजभाषा नियमों के पालन की जांच करना।
  • प्रतिवेदन: समय-समय पर अपनी सिफारिशों के साथ राष्ट्रपति को रिपोर्ट प्रस्तुत करना।

राजभाषा संबंधी अन्य समिति:

  • केन्द्रीय हिंदी समिति (Central Hindi Committee): यह भारत में राजभाषा के संबंध में नीति-निर्धारण करने वाली सर्वोच्च समिति है। इसके अध्यक्ष स्वयं प्रधानमंत्री होते हैं। इसमें कुछ केंद्रीय मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री, सांसद और हिंदी के प्रतिष्ठित विद्वान शामिल होते हैं।
  • हिंदी सलाहकार समितियाँ (Hindi Advisory Committees): प्रत्येक मंत्रालय और विभाग के स्तर पर इनका गठन किया जाता है। संबंधित मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं। यह समिति अपने विशिष्ट मंत्रालय के कामकाज में राजभाषा के प्रयोग की समीक्षा करती है।
  • नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियाँ (NARAKAS – Town Official Language Implementation Committees): यह जमीनी स्तर (Field Level) पर कार्य करने वाली सबसे सक्रिय समिति है। इनका गठन उन शहरों में जहाँ केंद्र सरकार के 10 या उससे अधिक कार्यालय स्थित हैं, वहाँ ‘नराकास’ का गठन किया जाता है।

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