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पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के छारी-ढंड को रामसर स्थल घोषित किया गया (Patna Bird Sanctuary and Chhari-Dhand in Gujarat declared Ramsar sites) | UPSC

Patna Bird Sanctuary and Chhari-Dhand in Gujarat declared Ramsar sites

Patna Bird Sanctuary and Chhari-Dhand in Gujarat declared Ramsar sites

संदर्भ:

हाल ही में उत्तर प्रदेश के पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के छारी-ढंड को रामसर स्थल के रूप में मान्यता दी गई है। इसके साथ ही भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 98 हो गई है। 

पटना पक्षी अभयारण्य (Patna Bird Sanctuary, Uttar Pradesh) 

  • अवस्थिति: उत्तर प्रदेश का एटा (Etah) जिला।
  • स्थापना: इसे 1991 में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत पक्षी अभयारण्य घोषित किया गया था।
  • क्षेत्रफल: यह केवल 1.09 वर्ग किलोमीटर (लगभग 108 हेक्टेयर) में फैला हुआ है। यह उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा वन्यजीव/पक्षी अभयारण्य है।
  • आर्द्रभूमि का प्रकार: यह गंगा के मैदानी इलाकों की एक विशिष्ट वर्षा आधारित (Rainfed) ताजे पानी की उथली आर्द्रभूमि है। गर्मियों में इसका अधिकांश हिस्सा सूख जाता है। 
  • जैव विविधता: यहाँ पक्षियों की लगभग 200 से अधिक प्रजातियां दर्ज की गई हैं। सर्दियों के दौरान यहाँ 60,000 से अधिक प्रवासी पक्षी आते हैं। मुख्य प्रजातियों में नॉर्दर्न पिनटेल सबसे अधिक संख्या में पाए जाते हैं।
  • अन्य महत्वपूर्ण पक्षी: रोसी पेलिकन, लेसर फ्लेमिंगो, यूरेशियन स्पूनबिल, कॉटन टील और बार-हेडेड गूज़।
  • वनस्पति: यहाँ खजूर के पेड़ और विभिन्न जलीय पौधे जैसे हाइड्रिला और वलिसनेरिया प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। 

छारी-ढंड आर्द्रभूमि (Chhari-Dhand Wetland, Gujarat) 

  • अवस्थिति: गुजरात के कच्छ जिले के नखत्राणा (Nakhatrana) तालुका में स्थित है।
  • पारिस्थितिकी: यह कच्छ के प्रसिद्ध बन्नी घास के मैदानों के किनारे पर स्थित है।
  • नाम का अर्थ: सिंधी भाषा में ‘छारी’ का अर्थ खारा और ‘ढंड’ का अर्थ उथली झील होता है। यह एक मौसमी आर्द्रभूमि है जो मानसून के दौरान भरती है। 
  • जैव विविधता: यह सेंट्रल एशियन फ्लाईवे पर स्थित पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव स्थल है। यहाँ लुप्तप्राय और संकटग्रस्त प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें काराकल (Caracal), मरुस्थलीय लोमड़ी (Desert Fox) और भारतीय भेड़िया शामिल हैं।
  • अन्य: यह क्षेत्र राजहंस (Flamingos), क्रेन और विभिन्न प्रकार के शिकार करने वाले पक्षियों (Raptors) के लिए प्रसिद्ध है। 

विशेष तथ्य: 

  • कुल रामसर स्थल: भारत में अब 98 रामसर स्थल हैं।
  • सर्वाधिक स्थल वाला राज्य: तमिलनाडु (20 स्थल) के साथ प्रथम स्थान पर है, जबकि उत्तर प्रदेश (11 स्थल) के साथ दूसरे स्थान पर है।
  • क्षेत्रफल के आधार पर: भारत का सबसे बड़ा रामसर स्थल सुंदरवन (पश्चिम बंगाल) है और सबसे छोटा रेणुका आर्द्रभूमि (हिमाचल प्रदेश) है।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: भारत ने 1 फरवरी 1982 को रामसर कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए थे। भारत के पहले रामसर स्थल चिल्का झील (ओडिशा) और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान) थे। 

रामसर कन्वेंशन और आर्द्रभूमि का महत्व

    • रामसर कन्वेंशन (Ramsar Convention): यह 1971 में ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षरित एक अंतर-सरकारी संधि है। इसका उद्देश्य आर्द्रभूमियों का संरक्षण और उनके संसाधनों का ‘विवेकपूर्ण उपयोग’ (Wise Use) सुनिश्चित करना है। 
  • आर्द्रभूमि के लाभ: 
    • जल शोधन: ये प्राकृतिक रूप से पानी को साफ करते हैं (Nature’s Kidneys)।
    • बाढ़ नियंत्रण: अतिरिक्त वर्षा जल को सोखकर बाढ़ के खतरे को कम करते हैं।
    • जलवायु नियमन: ये भारी मात्रा में कार्बन का भंडारण (Carbon Sequestration) करते हैं।
    • आजीविका: मछली पकड़ने, कृषि और पर्यटन के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। 

सरकारी पहल

  • अमृत धरोहर (Amrit Dharohar): रामसर स्थलों के संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए शुरू की गई योजना।
  • आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017: आर्द्रभूमियों के प्रबंधन के लिए वैधानिक ढांचा प्रदान करता है।
  • मोंट्रेक्स रिकॉर्ड (Montreux Record): उन रामसर स्थलों की सूची जिनमें पारिस्थितिक परिवर्तन का खतरा है। वर्तमान में भारत के दो स्थल — केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान और लोकटक झील — इसमें शामिल हैं।

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