PM GatiShakti के 5 वर्ष पूरे, अब तक 23,000 से अधिक डेटा लेयर्स को एकीकृत किया गया
संदर्भ:
13 अक्टूबर 2026 को पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PM GatiShakti National Master Plan) ने अपनी शुरुआत के 5 वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर लिए। इस ऐतिहासिक अवसर पर सरकार ने एक साझा भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) प्लेटफॉर्म पर 23,000 से अधिक डेटा लेयर्स को एकीकृत करने की महत्वपूर्ण उपलब्धि साझा की।
पीएम गतिशक्ति क्या है?
- परिचय: PM GatiShakti एक जीआईएस-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे भारत की पारंपरिक विभागीय, खंडित अवसंरचना नियोजन प्रणाली को एक एकीकृत मॉडल में बदलने के लिए लॉन्च किया गया था।
- इसे भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग और भू-सूचना संस्थान (BISAG-N) द्वारा विकसित किया गया है।
- शुरुआत (Launch): इस राष्ट्रीय मास्टर प्लान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 13 अक्टूबर 2021 को की गई थी।
- सात इंजन (Seven Infrastructure Engines): यह योजना मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे के सात स्तंभों पर केंद्रित है—सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, जलमार्ग, मास ट्रांसपोर्ट, और लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर।
- मुख्य उद्देश्य:
- लास्ट-माइल कनेक्टिविटी (Last-Mile Connectivity): आर्थिक क्षेत्रों, औद्योगिक समूहों और दूरदराज के क्षेत्रों के बीच निर्बाध मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना।
- लागत और समय की कमी: परियोजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली देरी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करना।
- लॉजिस्टिक्स लागत में कमी (Logistics Cost Reduction India): भारत में लॉजिस्टिक्स लागत को वर्तमान के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के ~13-14% से घटाकर वैश्विक मानकों (~8%) के स्तर पर लाना ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़े।
- PM GatiShakti 5 Years Achievements: बुनियादी ढांचा योजना (PM GatiShakti Infrastructure Planning) को नया रूप देने वाले इस डिजिटल प्लेटफॉर्म ने देश के लॉजिस्टिक्स परिदृश्य को बदल दिया है। 5 वर्षों की प्रगति रिपोर्ट (PM GatiShakti Progress Report) के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- डेटा लेयर्स का एकीकरण: राष्ट्रीय मास्टर प्लान इंडिया (National Master Plan India) के जीआईएस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध विभिन्न स्थानिक डेटा से देश भर के जंगलों, वन्यजीव अभ्यारण्यों, मौजूदा सड़कों, रेलवे लाइनों, जल निकायों, गैस पाइपलाइनों, और भूमि रिकॉर्ड के सटीक भू-स्थानिक मानचित्र (Geospatial Maps) शामिल किया गया हैं।
- संपूर्ण-सरकारी दृष्टिकोण (Whole-of-Government Approach): यह डिजिटल नियोजन ढांचा केंद्र सरकार के 58 मंत्रालयों/विभागों और सभी 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को एक साझा मंच पर लाता है।
- इसके तहत विभागीय अलगाव (Silos) को समाप्त कर विभिन्न विभागों के बीच वास्तविक समय में समन्वय स्थापित किया गया है।
- विशाल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का मूल्यांकन (Government Infrastructure Projects): नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) ने पिछले 5 वर्षों में पीएम गतिशक्ति सिद्धांतों के आधार पर ₹20.23 लाख करोड़ से अधिक मूल्य की 421 बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन और संरेखण किया है।
- अगस्त 2026 तक की फैक्टशीट के अनुसार, 256 परियोजनाओं को अंतिम मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें से 198 परियोजनाएं तीव्र गति से कार्यान्वयन के अधीन हैं।
- यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP): डिजिटल लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देने वाले इस प्लेटफॉर्म ने 142 एपीआई (API) के माध्यम से 12 केंद्रीय मंत्रालयों की 46 सरकारी लॉजिस्टिक्स प्रणालियों को आपस में जोड़ दिया है, जिससे माल की आवाजाही को ट्रैक करना बेहद आसान हो गया है।
- नए रणनीतिक संस्थान: पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक की अवसंरचना परियोजनाओं का मूल्यांकन करने के लिए एकीकृत परिवहन और रसद प्राधिकरण (ITLA) के गठन को मंजूरी दी है, जो अगले 10 वर्षों के लिए राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान तैयार करेगा।
- क्षमता निर्माण के लिए स्थापित गति शक्ति विश्वविद्यालय (GSV) ने जुलाई 2026 तक इसके पाठ्यक्रमों के माध्यम से 2.4 लाख से अधिक सरकारी अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है।
भारत के बुनियादी ढांचा विकास में पीएम गतिशक्ति के लाभ:
- समानुपातिक और वैज्ञानिक नियोजन: जीआईएस मैपिंग और उपग्रह इमेजरी के कारण परियोजना का खाका जमीन पर उतारने से पहले ही उसकी व्यवहार्यता जान ली जाती है। उदाहरण के लिए, पुणे-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे (699 किमी) के संरेखण को इस प्लेटफॉर्म की मदद से इस तरह बदला गया कि वन भूमि के ओवरलैप में 19% की कमी आई, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ईंधन की भी बचत होगी।
- नियामकीय मंजूरियों में तेजी: बहु-मंत्रालयी डेटा शेयरिंग के कारण पर्यावरण मंजूरी, भूमि अधिग्रहण, और वन विभाग की अनापत्ति (NOC) मिलने में लगने वाला समय महीनों से घटकर कुछ दिनों का रह गया है।
- आर्थिक गलियारों का इष्टतमीकरण (Optimisation of Economic Corridors): यह प्लेटफॉर्म भारतमाला, सागरमाला, अंतर्देशीय जलमार्ग, और उड़ान (UDAN) जैसी विभिन्न केंद्रीय योजनाओं को एक धागे में पिरोता है, जिससे देश के औद्योगिक विनिर्माण बेल्ट को बंदरगाहों और हवाई अड्डों से सीधी कनेक्टिविटी मिलती है।
- डेटा-संचालित पारदर्शिता: अक्टूबर 2025 से निजी क्षेत्र को भी कुछ गैर-संवेदनशील डेटासेट तक विनियमित पहुंच दी गई है, जिससे कॉर्पोरेट जगत को बुनियादी ढांचे में निवेश के सटीक निर्णय लेने में मदद मिल रही है। यह ‘विकसित भारत @2047’ के व्यापक लक्ष्य को प्राप्त करने का एक डिजिटल इंजन है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: PM GatiShakti National Master Plan क्या है?
उत्तर: यह भारत का एक भू-स्थानिक (GIS) आधारित डिजिटल नियोजन ढांचा है, जो देश के बुनियादी ढांचा विकास को एकीकृत और मंत्रालयों के बीच वास्तविक समय में समन्वित करता है।
प्रश्न 2: PM GatiShakti के पांच वर्ष कब पूरे हुए?
उत्तर: इस राष्ट्रीय अवसंरचना मास्टर प्लान ने 13 अक्टूबर 2026 को देश में सफलतापूर्वक अपने पांच वर्ष पूरे कर लिए हैं।
प्रश्न 3: PM GatiShakti में 23,000 से अधिक Data Layers का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ एक ही जीआईएस प्लेटफॉर्म पर वन भूमि, सड़कों, रेलवे, जल निकायों आदि से जुड़ी 23,493 से अधिक भू-स्थानिक डिजिटल सूचना परतों का समेकन है।
प्रश्न 4: PM GatiShakti योजना की शुरुआत कब हुई थी?
उत्तर: इस महत्वाकांक्षी एकीकृत अवसंरचना योजना (Government Infrastructure Projects) की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 13 अक्टूबर 2021 को की गई थी।
प्रश्न 5: PM GatiShakti का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी (Multimodal Connectivity India) को बढ़ावा देना, विभागों के बीच अलगाव को खत्म करना और देश की रसद/लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना है।
प्रश्न 6: यह योजना भारत के Infrastructure Development में कैसे मदद करती है?
उत्तर: यह उपग्रह इमेजरी और एकीकृत डेटा के माध्यम से मार्ग संरेखण को बेहतर बनाती है, वन्यजीव/वन क्षेत्रों को होने वाले नुकसान को रोकती है और नियामकीय मंजूरियों में लगने वाले समय को कम करती है।
