Pragati Platform

संदर्भ:
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्य सचिवों के 5वें राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान राज्यों से केंद्र के PRAGATI प्लेटफॉर्म को राज्य स्तर पर दोहराने (replicate) का आग्रह किया है, जो शासन में पारदर्शिता लाने और परियोजनाओं की देरी को कम करने के लिए आवश्यक है।
PRAGATI प्लेटफॉर्म के बारे मे:
PRAGATI एक सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित बहु-मोडल मंच है। जिसका अर्थ है ‘सक्रिय शासन और समय पर कार्यान्वयन’। इसे 25 मार्च, 2015 को लॉन्च किया गया था। PRAGATI प्लेटफॉर्म “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” के सिद्धांत पर आधारित है।
- उद्देश्य: आम नागरिकों की शिकायतों का निवारण, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की निगरानी और लंबित परियोजनाओं की समीक्षा करना।
- प्रणाली: यह एक त्रि-स्तरीय (Three-tier) प्रणाली है जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), केंद्र सरकार के सचिव और राज्यों के मुख्य सचिव शामिल होते हैं।
- विशेषताएं: यह मंच आधुनिक तकनीकों का एक अनूठा संगम है:
- डिजिटल डेटा प्रबंधन: विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के डेटा का एकीकरण।
- वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग: प्रधानमंत्री और अधिकारियों के बीच सीधा संवाद।
- भू-स्थानिक तकनीक (Geo-Spatial): परियोजनाओं की वास्तविक भौतिक प्रगति की निगरानी।
- ड्रोन इमेजिंग: बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लाइव ट्रैकिंग के लिए ड्रोन फीड का उपयोग।
- एकीकरण: यह प्रणाली केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS), पीएम गतिशक्ति, पर्यावरण मंज़ूरी एवं अनुपालन पोर्टल (PARIVESH) और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप पोर्टल के साथ एकीकृत है।
उपलब्धियां:
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के एक हालिया अध्ययन (‘From Gridlock to Growth’) में प्रगति की सराहना की गई है:
- परियोजनाओं को गति: 2024-25 तक, इस मंच ने $205 बिलियन (लगभग 17 लाख करोड़ रुपये) मूल्य की 340 से अधिक प्रमुख परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाई है।
- जवाबदेही: यह नौकरशाही की जड़ता और ‘लालफीताशाही’ (Red Tapeism) को खत्म करने में प्रभावी रहा है।
- आर्थिक प्रभाव: बुनियादी ढांचे पर खर्च किए गए प्रत्येक 1 रुपये से GDP में 2.5 से 3.5 रुपये का लाभ होता है, जिसे प्रगति सुनिश्चित करता है।
- सामाजिक क्षेत्र: स्वच्छ भारत और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं की प्रभावी निगरानी से करोड़ों लोगों को लाभ मिला है।
प्रधानमंत्री का नया निर्देश:
- राज्य स्तरीय प्रगति: राज्यों को अपने स्वयं के डैशबोर्ड और मासिक परियोजना समीक्षा प्रणाली विकसित करनी चाहिए, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव करें।
- डेटा रणनीति इकाइयां (DSUs): साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए विभागों में डेटा वेयरहाउस और एनालिटिक्स क्षमता विकसित करना।
- विनियमन उन्मूलन सेल (Deregulation Cells): पुराने और अनावश्यक कानूनों की पहचान कर उन्हें समाप्त करना ताकि व्यापार और जीवन सुगमता (Ease of Living) को बढ़ावा मिले।
- वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का सीमित उपयोग: जिला कलेक्टरों को फील्ड वर्क के लिए अधिक समय देने हेतु साप्ताहिक “VC” समय को अधिकतम 2 घंटे तक सीमित करने का सुझाव दिया।
