Precise and strong action against terrorism led by J&K police
Precise and strong action against terrorism led by J&K police –
संदर्भ:
जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद का सफाया सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है — यह बात उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शेर-ए-कश्मीर पुलिस अकादमी, उधमपुर में आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुरक्षा बलों की वीरता और जनता के सहयोग से जम्मू-कश्मीर में शांति और स्थिरता कायम की जा रही है। उन्होंने पारंपरिक बीट पुलिसिंग को आधुनिक तकनीक, खुफिया जानकारी, सामुदायिक भागीदारी और एजेंसी समन्वय के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
जम्मू–कश्मीर में आतंकवाद विरोधी प्रयासों में स्थानीय पुलिस की केंद्रीय भूमिका
उपराज्यपाल का जोर: जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने आतंकवाद से लड़ने में जम्मू-कश्मीर पुलिस (JAKP) की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया है।
स्थानीय पुलिस की रीढ़ की भूमिका: यह तथ्य स्थापित है कि आतंकवाद विरोधी अभियानों की रीढ़ स्थानीय पुलिस होती है; केंद्रीय बल केवल सहायक भूमिका निभा सकते हैं।
JAKP की विशिष्ट ताकतें:
- क्षेत्र की भूगोल, जनसांख्यिकी और सामुदायिक नेटवर्क की गहरी समझ।
- इससे मानव-खुफिया (HUMINT) संग्रह बेहतर होता है।
स्थानीय खुफिया तंत्र की कमी का उदाहरण: 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले में हमलावर अब तक पकड़े नहीं गए हैं — यह स्थानीय खुफिया में कमी को दर्शाता है।
सुधार की आवश्यकता: ऐसे हमलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए JAKP में लगातार कार्यात्मक सुधार ज़रूरी है।
स्थानीय प्रतिनिधियों की अहम भूमिका:
- सरपंचों और विधायकों के पास स्थानीय लोगों का विश्वास और कई बार आतंकी गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी होती है।
- इन्हें सुरक्षा ढांचे में शामिल करना दीर्घकालिक शांति और स्थिरता के लिए आवश्यक है।
जम्मू–कश्मीर में आतंकवाद विरोधी प्रयासों में स्थानीय पुलिस और जनप्रतिनिधियों की अहम भूमिका
स्थानीय ज़मीनी जानकारी की ताकत:
- जम्मू-कश्मीर पुलिस (JAKP) को इलाके की भूगोल, बोली और सामाजिक संरचना की गहरी समझ होती है।
सामुदायिक जुड़ाव और विश्वास: स्थानीय पुलिस और जनता के बीच बना विश्वास आतंकियों के खिलाफ समय पर मानव खुफिया (HUMINT) जुटाने में सहायक होता है।
प्रशिक्षित और अनुभवी बल: JAKP को दशकों का अनुभव है — खुफिया एकत्रीकरण, तलाशी अभियान और कट्टरता रोकने में।
जम्मू–कश्मीर में समावेशी सुरक्षा के लिए जनप्रतिनिधियों को सशक्त बनाना आवश्यक
सुरक्षा तंत्र से बाहर रखने का दुष्परिणाम: निर्वाचित प्रतिनिधियों को सुरक्षा ढांचे से अलग रखना न केवल सुशासन को कमजोर करता है, बल्कि आतंकवाद-रोधी प्रयासों को भी प्रभावित करता है।
JAKP को चुनी हुई सरकार के अधीन लाना जरूरी: इससे पुलिसिंग में जवाबदेही बढ़ेगी और नीतियां जनता की ज़मीनी ज़रूरतों को प्रतिबिंबित करेंगी।
पुलिस और जनता के बीच पुल की भूमिका: विधायक, सरपंच जैसे नेता पुलिस व नागरिकों के बीच विश्वास का पुल बनते हैं, जो प्रभावी कानून व्यवस्था के लिए जरूरी है।
सिर्फ चुनाव नहीं, वास्तविक भागीदारी चाहिए: विधानसभा और लोकसभा चुनाव केवल लोकतांत्रिक अधिकारों की स्वीकृति हैं, लेकिन वास्तविक भागीदारी तब होगी जब इन जनप्रतिनिधियों को सुरक्षा नीति में भी शामिल किया जाएगा।
ऊपर–से–नीचे मॉडल से आगे बढ़ने की जरूरत: जब तक नीति-निर्माण में स्थानीय नेतृत्व की भूमिका नहीं बढ़ेगी, तब तक समुदाय-आधारित सुरक्षा दृष्टिकोण अधूरा रहेगा।
स्थानीय लोकतंत्र को सशक्त करना ही समाधान: स्थानीय भागीदारी को मज़बूत करना जम्मू-कश्मीर में बेहतर शासन और सुरक्षा स्थिति सुधारने की कुंजी है।
भारत सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम:
- अनुच्छेद 370 हटाना:2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर पूरे भारत के साथ एकीकरण और समान कानून लागू किए गए।
- सुरक्षा व्यवस्था मजबूत:आतंकवाद पर काबू पाने के लिए अर्धसैनिक बलों की तैनाती, निगरानी और बुनियादी ढांचे को बढ़ाया गया।
- विकास पहल:पीएमडीपी और ‘बैक टू विलेज’ जैसी योजनाएं शुरू की गईं ताकि शिक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिल सके।