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दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर (Pressurised Heavy Water Reactors) | UPSC Preparation

Pressurised Heavy Water Reactors

Pressurised Heavy Water Reactors

संदर्भ:

परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) ने गुजरात स्थित काकरापार परमाणु ऊर्जा संयंत्र की यूनिट 3 और 4 के लिए NPCIL को दो स्वदेशी 700 मेगावॉट (MWe) के दाबित भारी जल रिएक्टरों (PHWRs) के संचालन की अनुमति प्रदान कर दी है।

  • यह स्वीकृति भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमताओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
PHWR (Pressurised Heavy Water Reactors): भारत की स्वदेशी परमाणु शक्ति का प्रतीक

PHWR क्या है?

  • एक न्यूक्लियर फिशन रिएक्टर, जो प्राकृतिक यूरेनियम को ईंधन के रूप में और भारी जल (D₂O) को कूलैंट और न्यूट्रॉन मॉडरेटर के रूप में उपयोग करता है।
  • इसकी प्रमुख विशेषता: ऑनलाइन रिफ्यूलिंग क्षमता, जिससे लगातार ऊर्जा उत्पादन संभव होता है।

विकास और स्वदेशीकरण का इतिहास:

  • शुरुआत: कनाडा की मदद से राजस्थान परमाणु परियोजना (RAPS-1, 1973)।
  • AECL (Canada) के हटने के बाद, भारत ने PHWR तकनीक का पूर्ण स्वदेशीकरण किया:
    • BARC (भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र)
    • NPCIL (न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड)
  • विकास यात्रा:
    • 220 MWe → 540 MWe → 700 MWe (पूर्णतः स्वदेशी R&D और निर्माण द्वारा)

कार्यप्रणाली (Working Mechanism):

  • भारी जल न्यूट्रॉन मॉडरेटर के रूप में कार्य करता है → न्यूट्रॉन को धीमा कर नियंत्रित श्रृंखलाबद्ध विखंडन सुनिश्चित करता है।
  • प्रेशर ट्यूब में प्राकृतिक यूरेनियम के ईंधन रॉड होते हैं, जो कैलेंड्रिया वेसल में डाले जाते हैं।
  • उच्च तापमान वाला भारी जल → स्टीम जनरेटर → टर्बाइन → बिजली उत्पादन।
  • कंट्रोल रॉड और ECCS (Emergency Core Cooling System) → सुरक्षा और ऊर्जा उत्पादन नियंत्रण में मदद करते हैं।

700 MWe PHWR की विशेषताएँ:

  • पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन और संचालन (निर्माण, ईंधन निर्माण, कंट्रोल सिस्टम सहित)।
  • ऑनलाइन रिफ्यूलिंग प्रणाली → उत्पादन में रुकावट कम।
  • डुअल फास्ट-एक्टिंग शटडाउन सिस्टम, डबल कंटेनमेंट, और पैसिव हीट रिमूवल सिस्टम।
  • डिजिटल I&C सिस्टम → रियल-टाइम निगरानी और स्वचालन में मदद।
  • ऑन-साइट भारी जल मॉडरेशन और कूलिंग → बाहरी निर्भरता में कमी, न्यूट्रॉन उपयोगिता में वृद्धि।

हालिया परमिट का महत्व:

  • भारत की 10-रिएक्टर PHWR फ्लीट योजना को बढ़ावा।
  • 7000 MWe स्वदेशी परमाणु क्षमता जोड़ने की रणनीति को बल।

AERB (परमाणु ऊर्जा विनियामक बोर्ड): एक परिचय

  • स्थापना:
    • वर्ष 1983 में, भारत के राष्ट्रपति द्वारा
    • Atomic Energy Act, 1962 के तहत
  • उद्देश्य:
    • भारत में परमाणु ऊर्जा और आयनीकरण विकिरण के सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करना
    • मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर अनावश्यक खतरा न हो
  • मुख्य कार्यक्षेत्र: यह सुनिश्चित करना कि परमाणु ऊर्जा का उपयोग नियंत्रित, सुरक्षित और ज़िम्मेदार तरीके से हो
  • विनियामक दायरा (Regulatory Scope):
    • DAE (Department of Atomic Energy) की सभी यूनिटों में औद्योगिक सुरक्षा को नियंत्रित करता है
    • जैसे: BARC, NPCIL, और अन्य परमाणु ऊर्जा केंद्र

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