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प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के 9 वर्ष पूरे (Prime Minister Mother Vandana Scheme completes 9 years) | UPSC

Prime Minister Mother Vandana Scheme completes 9 years

Prime Minister Mother Vandana Scheme completes 9 years

संदर्भ:

हाल ही में भारत सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) ने अपने सफल नौ वर्ष पूरे कर लिए हैं। 2017 में शुरू हुई यह योजना गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को नकद राशि प्रदान कर पोषण संबंधी सहायता सुनिश्चित करती है।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के बारे में:

  • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) एक सशर्त नकद हस्तांतरण (Conditional Cash Transfer) योजना है। जिसका उद्देश्य गर्भावस्था, प्रसव और स्तनपान के पोषण में सुधार करना, मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) को कम करना है।
  • इस योजना की शुरुआत 1 जनवरी 2017 को की गई थी, जो कि एक ‘केंद्र प्रायोजित योजना’ (Centrally Sponsored Scheme) है। 
  • इसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के प्रावधानों के तहत लागू की गई है। 
  • इससे पहले इस योजना को ‘इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना’ के नाम से जाना जाता था, जिसे 2010 में लॉन्च किया गया था।
  • मिशन शक्ति के तहत इस योजना के मानदंडों को संशोधित किया गया है, जिसे अब PMMVY 2.0 के रूप में जाना जाता है: 
    • पात्रता: कम से कम 19 वर्ष की आयु की सभी गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं।
    • लाभार्थी: सभी गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं (PW&LM), जो केंद्र या राज्य सरकार या किसी सार्वजनिक उपक्रम में नियमित रोजगार में नहीं हैं।
    • नकद प्रोत्साहन: पहले बच्चे के लिए दो किस्तों में कुल 5,000 रुपये दिए जाते हैं। जबकि दूसरे बच्चे के लिए यदि दूसरा बच्चा बालिका (Girl Child) है, तो सरकार महिला को एकमुश्त 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करती है। 
    • कुल लाभ: जननी सुरक्षा योजना (JSY) के लाभों के साथ मिलकर, एक महिला को औसतन ₹6,000 से ₹11,000 तक की कुल सहायता प्राप्त हो सकती है। 
    • डिजिटल कार्यान्वयन: योजना का पूरा लाभ ‘PMMVY सॉफ्ट’ पोर्टल के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते (DBT) में भेजा जाता है। 

योजना का महत्व:

  • मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में कमी: आर्थिक सहायता मिलने से महिलाएं बेहतर पोषण प्राप्त कर पाती हैं, जिससे प्रसव के दौरान जोखिम कम होता है। 
  • संस्थागत प्रसव को बढ़ावा: नकद लाभ प्राप्त करने की शर्तों के कारण महिलाएं अस्पतालों में पंजीकरण और प्रसव कराती हैं, जो जच्चा-बच्चा सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
  • लैंगिक समानता: दूसरे बच्चे के रूप में बालिका के जन्म पर अधिक प्रोत्साहन राशि (₹6,000) देना समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का एक प्रयास है। 
  • वित्तीय समावेशन: DBT के माध्यम से सीधे बैंक खाते में पैसा भेजने से ग्रामीण महिलाओं का बैंकिंग प्रणाली से जुड़ाव बढ़ा है।
  • सतत विकास: यह योजना सतत विकास लक्ष्यों (SDG), विशेष रूप से SDG 2 (शून्य भूख) और SDG 3 (उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली) की प्राप्ति की दिशा में एक सशक्त कदम है।

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