Proba-3 mission
संदर्भ:
हाल ही में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के Proba-3 मिशन के Coronagraph अंतरिक्ष यान के साथ संपर्क टूट गया है। फरवरी 2026 के मध्य में आई एक तकनीकी खराबी (anomaly) के कारण यह यान ‘सर्वाइवल मोड’ (survival mode) में चला गया है।
Proba-3 (प्रोबा-3) मिशन के बारे में:
- परिचय: Proba-3 (Project for On-Board Autonomy-3) यूरोपीय अंतरिक्ष टीम का एक इन-ऑर्बिट डेमोंस्ट्रेशन (IOD) मिशन है, जिसे अंतरिक्ष में दुनिया का पहला ‘प्रेसिजन फॉर्मेशन फ्लाइंग’ (Precision Formation Flying) मिशन माना जाता है।
- इसमें दो उपग्रहों को इस तरह संरेखित किया गया है कि वे अंतरिक्ष में एक बड़ी आभासी संरचना (Virtual Structure) के रूप में कार्य करते हैं।
- संचालक: यह मिशन मुख्य रूप से यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) द्वारा संचालित है।
- प्रक्षेपण: इसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के PSLV-C59 रॉकेट द्वारा 5 दिसंबर 2024 को श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। यह मिशन NewSpace India Limited (NSIL) के एक समर्पित वाणिज्यिक अनुबंध के तहत लॉन्च किया गया।
उद्देश्य:
- फॉर्मेशन फ्लाइंग का प्रदर्शन: मुख्य लक्ष्य यह साबित करना है कि दो स्वतंत्र उपग्रह मिलीमीटर-स्तर की सटीकता के साथ एक-दूसरे के सापेक्ष अपनी स्थिति बनाए रख सकते हैं।
- कृत्रिम सूर्य ग्रहण (Artificial Solar Eclipse): एक उपग्रह (Occulter) सूर्य की डिस्क को ढकता है, जिससे दूसरे उपग्रह (Coronagraph) को सूर्य के बाहरी वायुमंडल ‘कोरोना’ का निर्बाध अध्ययन करने के लिए कृत्रिम ग्रहण की स्थिति प्राप्त होती है।
- कोरोना का दीर्घकालिक अवलोकन: प्राकृतिक सूर्य ग्रहण केवल कुछ मिनटों का होता है, लेकिन Proba-3 के माध्यम से वैज्ञानिक हर कक्षा में लगभग 6 घंटे तक कोरोना का अध्ययन कर सकेंगे।
विशेषताएं:
- दोहरा उपग्रह ढांचा: इसमें दो छोटे उपग्रह शामिल हैं— Coronagraph (CSC) और Occulter (OSC)।
- सटीक दूरी: दोनों उपग्रह अंतरिक्ष में एक-दूसरे से लगभग 150 मीटर की दूरी पर एक सीधी रेखा में बने रहते हैं।
- कक्षा (Orbit): इसे एक अत्यधिक अंडाकार कक्षा (600 किमी x 60,530 किमी) में स्थापित किया गया है, जिसकी अवधि लगभग 19.7 घंटे है।
- पेलोड: इसका मुख्य उपकरण ASPIICS (Association of Spacecraft for Polarimetric and Imaging Investigation of the Corona of the Sun) है।
