Proposal approved for procurement of 114 additional Rafale fighter jets for IAF

संदर्भ:
हाल ही में भारतीय रक्षा मंत्रालय के तहत डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड (DPB) ने भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को अपनी महत्वपूर्ण मंजूरी दे दी है। लगभग ₹3.25 लाख करोड़ ($39 बिलियन) की अनुमानित लागत वाला यह सौदा भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा अधिग्रहण होगा।
प्रस्तावित सौदे की मुख्य विशेषताएं:
- मेक इन इंडिया (Make in India): इस सौदे का लगभग 80% हिस्सा (लगभग 96 विमान) भारत में निर्मित किया जाएगा। केवल 12 से 18 विमान ‘फ्लाई-अवे’ (तैयार स्थिति) में फ्रांस से सीधे आएंगे।
- स्वदेशी सामग्री (Indigenization): भारत इस परियोजना में 30% से 60% तक स्वदेशी सामग्री शामिल करने का लक्ष्य रख रहा है। यह सौदा भी भारत और फ्रांस के बीच अंतर-सरकारी समझौते (G2G) के तहत होने की संभावना है।
- तकनीकी संस्करण: भारत संभवतः राफेल का सबसे उन्नत F4 संस्करण (जिसे F4 Star या F4 भी कहा जा रहा है) प्राप्त करेगा, जिसमें उन्नत स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम होगा।
DPB की मंजूरी के बाद प्रस्ताव रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) के पास जाएगा, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री करते हैं। अंतिम वित्तीय मंजूरी सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति (CCS) द्वारा दी जाएगी।
राफेल लड़ाकू विमान:
राफेल (Rafale) एक ‘ओमनी-रोल’ (Omni-role) लड़ाकू विमान है, जिसे फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है।
- मल्टी-रोल क्षमता: राफेल 4.5वीं पीढ़ी का विमान है जो हवाई श्रेष्ठता, जमीनी हमले, टोही (reconnaissance), और परमाणु निवारण सहित कई मिशनों को पूरा करने में सक्षम है।
- उन्नत हथियार पैकेज: यह उन्नत मिसाइलों से लैस है:
- ‘मिटिओर’ (Meteor): दृश्य सीमा से परे हवा से हवा में मार करने वाली (BVR) मिसाइल, जिसकी नो-एस्केप ज़ोन 100 किमी से अधिक है।
- ‘स्कैल्प’ (SCALP): लंबी दूरी की हवा से सतह पर मार करने वाली क्रूज मिसाइल (रेंज ~300 किमी)।
- ‘हैमर’ (HAMMER): त्वरित प्रतिक्रिया के लिए कम दूरी की सटीक मारक क्षमता वाली स्मार्ट हथियार प्रणाली।
- स्पेक्ट्रा प्रणाली (SPECTRA System): यह एक एकीकृत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट है जो विमान को खतरों का पता लगाने, उन्हें जाम करने और चकमा देने में मदद करता है।
- भारत-विशिष्ट संवर्द्धन (India-Specific Enhancements): भारतीय आवश्यकताओं के अनुरूप विमान में कई बदलाव किए गए हैं, जैसे कि इज़राइली हेलमेट-माउंटेड डिस्प्ले, डेटा लिंक, और ठंडे मौसम में इंजन स्टार्ट करने की क्षमता।
महत्व:
- दोहरे मोर्चे पर निवारण: राफेल की मारक क्षमता चीन और पाकिस्तान के साथ लगती सीमाओं पर भारत की वायु श्रेष्ठता को मजबूत करेगी। हालिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे अभ्यासों में राफेल के प्रदर्शन ने वायु सेना के विश्वास को बढ़ाया है।
- रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र: टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) जैसी भारतीय कंपनियां डसॉल्ट एविएशन के साथ मिलकर हैदराबाद और अन्य स्थानों पर विमान के पुर्जे (जैसे फ्यूजलेज) बनाएंगी।
- MRO हब: जेवर (उत्तर प्रदेश) और हैदराबाद में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (MRO) सुविधाओं की स्थापना से भारत इस क्षेत्र में राफेल संचालित करने वाले अन्य देशों (जैसे UAE, इंडोनेशिया) के लिए एक सेवा केंद्र बन सकता है।
- रणनीतिक स्वायत्तता: अमेरिकी (F-35) और रूसी (Su-57) प्रस्तावों के बावजूद राफेल का चुनाव भारत की अपनी शर्तों पर रक्षा आयात करने की नीति को दर्शाता है।
