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मिज़ो भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव (Proposal to include Mizo language in the 8th Schedule) | UPSC

Proposal to include Mizo language in the 8th Schedule

Proposal to include Mizo language in the 8th Schedule

संदर्भ:

हाल ही में मिजोरम विधानसभा ने भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची (Eighth Schedule) में मिजो भाषा को शामिल करने की मांग करते हुए सर्वसम्मति से एक नया आधिकारिक प्रस्ताव पारित किया।

  • राज्य के शिक्षा मंत्री वानलालथलाना (Vanlalthlana) द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव का उद्देश्य मिजो भाषा को राष्ट्रीय मान्यता दिलाना और राज्य की भाषाई पहचान को मजबूत करना है। 
  • मिजोरम ने 35 साल के लंबे अंतराल के बाद यह कदम उठाया है; इससे पहले इसी तरह का प्रस्ताव 1991 में पारित किया गया था।

मिज़ो भाषा के बारे में: 

  • भाषाई वर्गीकरण: मिजो भाषा चीन-तिब्बती (Sino-Tibetan) परिवार की कुकी-चिन (Kuki-Chin) शाखा से संबंधित है।
  • मानक बोली (Duhlian): आधुनिक मिजो भाषा मुख्य रूप से दुहलियन (Duhlian) बोली पर आधारित है, जिसे ‘लुशाई’ (Lushai) के नाम से भी जाना जाता था।
  • लिपि का विकास: मिजो की अपनी कोई प्राचीन लिपि नहीं थी। 1894 में ईसाई मिशनरियों (जे.एच. लोरेन और एफ.डब्ल्यू. सैविज) ने रोमन लिपि का उपयोग करके मिजो वर्णमाला तैयार की।
  • टोनल प्रकृति (Tonal Language): यह एक ‘टोनल’ भाषा है जहाँ एक ही शब्द का अर्थ उसके बोलने के लहजे (Pitch) से बदल जाता है। इसमें मुख्य रूप से 4 स्वर (High, Low, Rising, Falling) होते हैं।
  • शब्द-परिवर्तन (Verb Conversion): मिजो क्रियाओं के दो रूप (Stem I और Stem II) होते हैं, जिनका उपयोग वाक्य की संरचना और काल के आधार पर किया जाता है।
  • भौगोलिक प्रसार: मिजोरम के अलावा यह मणिपुर, त्रिपुरा, असम, म्यांमार (चिन राज्य) और बांग्लादेश (चिटगांव हिल्स) में बोली जाती है।
  • साहित्यिक विरासत: इसका लिखित साहित्य 19वीं सदी के अंत में शुरू हुआ। पहली पुस्तक ‘मिजो ज़िर तिर बु’ (1896) थी। आज इसमें समृद्ध कविताएँ, उपन्यास और लोककथाएँ मौजूद हैं।
  • जनसांख्यिकी: वैश्विक स्तर पर मिजो बोलने वालों की संख्या 22 लाख से अधिक होने का अनुमान है।
  • शिक्षा और तकनीक: मिजो भाषा को स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर तक पढ़ाया जाता है। मई 2022 से गूगल ट्रांसलेट ने भी इसे अपनी सूची में शामिल किया है।
  • सांस्कृतिक प्रभाव: ‘त्लौमंगैहना’ (Tlawmngaihna) जैसे नैतिक सिद्धांत और ‘चेराव’ जैसे नृत्य गीतों के माध्यम से यह भाषा मिजो संस्कृति की पहचान को जीवित रखती है।
  • संवैधानिक मांग: वर्तमान में मिजोरम विधानसभा ने इसे आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए प्रस्ताव पारित किया है ताकि इसे राष्ट्रीय पहचान मिल सके।
संविधान की आठवीं अनुसूची:

  • परिचय: भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची भारत की भाषाई विविधता को संवैधानिक सुरक्षा और सम्मान प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण ढांचा है। 
  • संवैधानिक प्रावधान: यह अनुसूची अनुच्छेद 344(1) और 351 से संबंधित है। अनुच्छेद 344(1) राष्ट्रपति को आधिकारिक उद्देश्यों के लिए भाषा आयोग गठित करने का अधिकार देता है।
  • मूल संख्या: 1950 में संविधान लागू होते समय इस अनुसूची में केवल 14 भाषाएँ शामिल थीं। वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 22 हो गई है।
  • विकास का इतिहास: संशोधनों के माध्यम से नई भाषाएँ जोड़ी गईं: 1967 में सिंधी, 1992 में कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली, और 2003 में बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली
  • राजभाषा आयोग: संविधान के तहत, राष्ट्रपति हर 10 साल में एक आयोग का गठन करते हैं जो हिंदी के प्रसार और अन्य भाषाओं के उपयोग पर सिफारिशें देता है।
  • क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व: यह अनुसूची देश के विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख भाषाओं को मान्यता देकर ‘विविधता में एकता’ को सुदृढ़ करती है।
  • प्रतियोगी परीक्षाएँ: इस अनुसूची में शामिल भाषाओं के उम्मीदवारों को UPSC (सिविल सेवा) जैसी परीक्षाओं में अपनी मातृभाषा में उत्तर देने का विकल्प मिलता है।
  • साहित्य अकादमी पुरस्कार: साहित्य अकादमी केवल उन्हीं भाषाओं में पुरस्कार प्रदान करती है जो आठवीं अनुसूची में शामिल हैं (अंग्रेजी और राजस्थानी इसके अपवाद हैं)।
  • संसदीय उपयोग: सांसद अपनी मातृभाषा में सदन को संबोधित कर सकते हैं, यदि वह आठवीं अनुसूची का हिस्सा है, जिसके लिए तत्काल अनुवाद की सुविधा प्रदान की जाती है।
  • शास्त्रीय भाषा (Classical Language) संबंध: किसी भाषा को ‘शास्त्रीय भाषा’ का दर्जा मिलने के लिए आमतौर पर उसका आठवीं अनुसूची में होना या स्वतंत्र ऐतिहासिक मूल होना आवश्यक है।
  • शामिल करने के मानदंड: आधिकारिक तौर पर भाषा शामिल करने के लिए कोई निश्चित वस्तुनिष्ठ मानदंड (Objective Criteria) नहीं हैं, जिसे लेकर अक्सर सीताकांत महापात्र समिति (2003) की चर्चा होती है।
  • प्रतीक्षारत मांगें: वर्तमान में 38 भाषाएँ (जैसे भोजपुरी, तुलु, राजस्थानी) इस सूची में शामिल होने की मांग कर रही हैं।

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