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PM-RKVY में 3 कृषि योजनाओं के विलय का प्रस्ताव (Proposal to merge 3 agriculture schemes into PM-RKVY) | UPSC

Proposal to merge 3 agriculture schemes into PM-RKVY

Proposal to merge 3 agriculture schemes into PM-RKVY

संदर्भ:

हाल ही में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने अपने प्रमुख कार्यक्रम, प्रधानमंत्री-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के साथ तीन मौजूदा योजनाओं को विलय करने का प्रस्ताव पेश किया है। इस कदम का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में योजनाओं के प्रशासनिक जटिलताओं को कम करना और राज्य-स्तरीय सुधारों को बढ़ावा देना है।

प्रस्तावित विलय में शामिल योजनाएं:

नवीनतम प्रस्ताव के अनुसार, निम्नलिखित तीन योजनाओं को PM-RKVY के साथ मिलाया जाना है:

  • कृषोन्नति योजना (Krishonnati Yojana – KY): यह योजना खाद्य सुरक्षा और कृषि आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। इसमें पहले से ही 8-11 उप-योजनाएं शामिल थीं, जैसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM), एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH), कृषि विस्तार पर उप-मिशन (SMAE), आदि।
  • राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (National Mission on Natural Farming – NMNF): यह योजना प्राकृतिक खेती के तरीकों को बढ़ावा देने और रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने पर केंद्रित है।
  • राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (National Bee and Honey Mission – NBHM): यह योजना मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने, शहद उत्पादन बढ़ाने और इस क्षेत्र में किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।

विलय के पीछे प्रमुख उद्देश्य:

  • दोहराव से बचाव: विभिन्न योजनाओं के घटकों में अक्सर समानताएं होती हैं। विलय से प्रशासनिक पदानुक्रम कम होगा, योजनाओं का दोहराव रुकेगा, और धन के बेहतर अभिसरण को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
  • राज्यों को स्वायत्तता: नई संरचना राज्यों को उनकी विशिष्ट कृषि-जलवायु परिस्थितियों और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें लागू करने में अधिक लचीलापन प्रदान करेगी।
  • प्रदर्शन-आधारित वित्तपोषण: भविष्य में धन का आवंटन उपयोगिता प्रमाण-पत्रों (Utilization Certificates) के बजाय एक ‘सुधार स्कोर’ (Reform Score) पर आधारित होगा। राज्य-स्तरीय कृषि सुधार पहल (जैसे भूमि पट्टे पर देना, बाजार उदारीकरण) को 30% तक वेटेज दिया जाएगा। यह राज्यों को आवश्यक कृषि सुधारों को लागू करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
  • समग्र और एकीकृत योजना: यह दृष्टिकोण राज्यों को कृषि क्षेत्र पर एक व्यापक रणनीतिक दस्तावेज तैयार करने में सक्षम करेगा, जो जलवायु-लचीली कृषि, पोषण सुरक्षा और मूल्य श्रृंखला विकास जैसी उभरती चुनौतियों पर भी ध्यान केंद्रित करेगा। सभी योजनाओं को मिलाकर 1.75 लाख करोड़ रुपये की नई पांच वर्षीय योजना (2026-2031) तैयार की जाएगी। 
  • प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन: सभी परियोजनाओं के लिए ऑनलाइन डेटा प्रबंधन (RKVY-MIS) और जियो-टैगिंग अनिवार्य होगी, जिससे वास्तविक समय की निगरानी सुनिश्चित होगी।

PM-RKVY की मुख्य विशेषताएं:

PM-RKVY, जिसे 2007 में लॉन्च किया गया था और बाद में ‘राष्ट्रीय कृषि विकास योजना – रफ्तार’ (RKVY-RAFTAAR) के रूप में नया रूप दिया गया, एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme – CSS) है।

  • उद्देश्य: कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सार्वजनिक निवेश को प्रोत्साहित करना, उत्पादकता बढ़ाना, और किसानों की आय में वृद्धि करना।
  • वित्त पोषण पैटर्न: सामान्य राज्यों के लिए केंद्र और राज्य के बीच 60:40 का अनुपात है। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 है, और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100% केंद्रीय वित्त पोषण होता है।
  • घटक: PM-RKVY के तहत कई उप-योजनाएं संचालित होती हैं, जैसे मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, वर्षा सिंचित क्षेत्र विकास, कृषि वानिकी, परम्परागत कृषि विकास योजना, कृषि मशीनीकरण, ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (सूक्ष्म सिंचाई), फसल विविधीकरण कार्यक्रम, कृषि स्टार्टअप के लिए त्वरक कोष आदि।

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