Raman-driven spin noise spectroscopy
संदर्भ:
हाल ही में रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI) के शोधकर्ताओं ने ‘रमन-ड्रिवन स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी’ (RDSNS) नामक एक क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है। यह तकनीक क्वांटम फिजिक्स और सेंसर तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
रमन-ड्रिवन स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी (RDSNS) तकनीक:
- परिचय: RDSNS एक गैर-आक्रामक (Non-invasive) ऑप्टिकल तकनीक है, जिसका उपयोग ठंडे परमाणुओं (Cold Atoms) के गुणों, विशेष रूप से उनकी स्थानीय घनत्व और चुंबकीय गुणों को बिना उन्हें बाधित किए मापने के लिए किया जाता है।
- मूल सिद्धांत: यह तकनीक ‘स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी’ (SNS) और ‘रमन प्रभाव’ (Raman Effect) का एक हाइब्रिड रूप है।
- प्रक्रिया: जब लेजर प्रकाश किसी परमाणु नमूने से गुजरता है, तो यह परमाणुओं के स्पिन में होने वाले सूक्ष्म उतार-चढ़ाव (Jitters) के कारण प्रकाश के ध्रुवीकरण (Polarization) में होने वाले बदलावों को मापता है।
- रमन लेजर बीम: इस विधि में दो अतिरिक्त लेजर बीम का उपयोग किया जाता है जिन्हें ‘रमन बीम’ कहते हैं। ये बीम परमाणुओं को दो निकटवर्ती ‘स्पिन अवस्थाओं’ (Spin States) के बीच संचालित (Drive) करती हैं।
- सिग्नल एम्प्लीफिकेशन: ये रमन बीम परमाणु संकेतों को लगभग 10 लाख गुना (1 Million times) तक बढ़ा देती हैं।
- सूक्ष्म मापन: यह तकनीक केवल 0.01 मिमी³ जैसे छोटे आयतन में लगभग 10,000 परमाणुओं के स्थानीय घनत्व को सटीक रूप से माप सकती है।
- गैर-आक्रामक: यह परमाणुओं की क्वांटम अवस्था को नष्ट नहीं करती, जिससे रीयल-टाइम में निरंतर अवलोकन संभव है।
- स्थानीय बनाम वैश्विक मापन: फ्लोरोसेंस इमेजिंग केवल ‘कुल परमाणु संख्या’ बताती है, जबकि RDSNS यह बताती है कि किसी विशेष स्थान पर परमाणु कितने सघन (Densely packed) हैं।
- शील्ड-फ्री मैग्नेटोमेट्री: यह तकनीक बाहरी चुंबकीय हस्तक्षेप (Noisy environments) में भी सटीक काम करती है, जिससे इसे लैब के बाहर भी उपयोग किया जा सकता है।
भविष्य के अनुप्रयोग:
- क्वांटम कंप्यूटिंग: क्वांटम बिट्स (Qubits) की स्थिति और उनके घनत्व को बिना नुकसान पहुँचाए मापने के लिए यह तकनीक अनिवार्य साबित होगी।
- मेडिकल इमेजिंग (MRI का विकल्प): RDSNS आधारित मैग्नेटोमीटर MRI का एक शांत, पोर्टेबल और गैर-आक्रामक विकल्प प्रदान कर सकते हैं।
- अंतरिक्ष अन्वेषण: ग्रहों के चुंबकीय क्षेत्रों का अध्ययन करने के लिए कॉम्पैक्ट और सटीक सेंसर विकसित किए जा सकेंगे।
- खनिज अन्वेषण: भू-गर्भीय सर्वेक्षणों में चुंबकीय विसंगतियों का पता लगाकर खनिज और तेल भंडारों की खोज में मदद मिलेगी।

