Rare smew bird
संदर्भ:
हाल ही में काजीरंगा नेशनल पार्क (असम) की 7वीं वाटरबर्ड जनगणना के दौरान काजीरंगा के लाओखोवा परिदृश्य में रोमारी और दोंदुवा बीलों में पहली बार एक दुर्लभ स्मेव (Smew – Mergellus albellus) पक्षी देखा गया।
स्मेव पक्षी के बारे में:
- वैज्ञानिक नाम: Smew – Mergellus albellus।
- वर्गीकरण: यह ‘मर्गेंसर’ (Merganser) परिवार की सबसे छोटी डाइविंग बत्तख है।
- नर (Male): इसे ‘व्हाइट मर्गेंसर’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसका शरीर चमकीला सफेद होता है और आंखों के पास एक विशिष्ट काला ‘मास्क’ होता है।
- मादा (Female): इसे ‘रेड-हेडेड स्मेव’ कहा जाता है, क्योंकि इसका सिर शाहबलूत (chestnut) रंग का और शरीर धूसर (grey) होता है।
- प्रजनन स्थल: यह मुख्य रूप से उत्तरी यूरेशिया के टैगा (Taiga) क्षेत्रों (जैसे साइबेरिया और स्कैंडिनेविया) के जंगलों में पाया जाता है।
- शीतकालीन प्रवास: सर्दियों में यह दक्षिण की ओर मध्य एशिया, यूरोप और कभी-कभी भारतीय उपमहाद्वीप की ओर प्रवास करता है।
- फ्लाईवे: यह मुख्य रूप से सेंट्रल एशियाई फ्लाईवे (Central Asian Flyway) का उपयोग करता है। यह केवल उत्तरी भारत की आर्द्रभूमियों (Wetlands) तक ही सीमित रहता है।
- आवास: यह मीठे पानी की झीलों, धीमी गति से बहने वाली नदियों और मछली बहुल बीलों (Wetlands) मे निवास करता है।
- भोजन: यह एक डाइविंग बर्ड है, जो पानी के नीचे तैरकर छोटी मछलियों, जलीय कीड़ों और क्रस्टेशियंस का शिकार करता है।
- संरक्षण स्थिति: IUCN रेड लिस्ट: कम चिंताजनक (Least Concern – LC)।
- CITES: वर्तमान में यह किसी विशिष्ट परिशिष्ट में प्रमुखता से सूचीबद्ध नहीं है, लेकिन प्रवासी पक्षी संधि (CMS) के तहत संरक्षित है।
पर्यावरणीय महत्व:
- आर्द्रभूमि स्वास्थ्य का संकेतक: यह पक्षी केवल मछली-संपन्न और स्वच्छ जल में रहता है, जो काजीरंगा के बीलों (जैसे रोमारी) की उच्च पारिस्थितिक गुणवत्ता को दर्शाता है।
- जलवायु परिवर्तन का संकेत: विशेषज्ञों के अनुसार, इसका असामान्य प्रवासन (Vagrant status) ग्लोबल वार्मिंग के कारण प्रवासन पथों में बदलाव (Range Shift) का बड़ा संकेत है।
- सेंट्रल एशियाई फ्लाईवे की मजबूती: इसकी उपस्थिति इस वैश्विक पक्षी मार्ग (CAF) पर काजीरंगा के “क्रिटिकल हॉल्टिंग स्टेशन” और सुरक्षित प्रजनन आवास होने की पुष्टि करती है।
- पारिस्थितिक लचीलापन (Resilience): स्मेव का आगमन ब्रह्मपुत्र बाढ़ के मैदानों की जैव विविधता बनाए रखने की क्षमता और सफल संरक्षण प्रयासों (जैसे एन्टी-एनक्रोचमेंट) को प्रमाणित करता है।
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काजीरंगा नेशनल पार्क:
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