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RBI ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन विनियम 2026 जारी किया (RBI issues Foreign Exchange Management Regulations 2026) | UPSC Preparation

RBI issues Foreign Exchange Management Regulations 2026

RBI issues Foreign Exchange Management Regulations 2026

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गारंटी) विनियम, 2026 जारी किए हैं, जो अब प्रभावी रूप से लागू हो गए हैं। ये नए नियम दो दशक पुराने फ्रेमवर्क को प्रतिस्थापित करने और सीमा पार लेनदेन में गारंटी से संबंधित व्यापक दिशा-निर्देश प्रदान करते हैं।

विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गारंटी) विनियम, 2026 के मुख्य प्रावधान:

  • सिद्धांत-आधारित दृष्टिकोण: नए विनियम एक सिद्धांत-आधारित दृष्टिकोण पर बेस्ड हैं। कई प्रकार की गारंटियों के लिए अब RBI की पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे व्यापार करने में आसानी होगी।
  • निवासियों पर प्रतिबंध: नए नियमों के तहत, भारत में रहने वाला कोई भी व्यक्ति किसी भी गारंटी व्यवस्था का हिस्सा नहीं बन सकता है जिसमें कोई अन्य पक्ष अनिवासी हो, सिवाय उन मामलों के जो FEMA या RBI नियमों के तहत स्पष्ट रूप से अनुमत हैं।
  • निवासियों पर शर्तें: भारतीय निवासी कुछ शर्तों के अधीन ज़मानतदार (surety) या मूल ऋणी (principal debtor) के रूप में कार्य कर सकते हैं। मुख्य शर्त यह है कि अंतर्निहित लेनदेन (underlying transaction) FEMA के तहत अनुमत होना चाहिए, और संबंधित पक्ष 2018 के उधार और ऋण विनियमों के तहत एक-दूसरे को उधार देने और लेने के लिए पात्र होने चाहिए।
  • व्यापक रिपोर्टिंग आवश्यकताएँ: एक महत्वपूर्ण बदलाव सभी प्रकार की गारंटियों के लिए व्यापक और मानकीकृत रिपोर्टिंग प्रणाली की शुरुआत है। अधिकृत डीलर (AD) बैंक अब सभी जारी की गई, संशोधित या लागू की गई गारंटियों की जानकारी निर्धारित प्रारूप में तिमाही आधार पर RBI को देंगे।
  • फॉर्म GRN: रिपोर्टिंग एक नए मानकीकृत फॉर्म, फॉर्म GRN (गारंटी रिपोर्टिंग नंबर) के माध्यम से की जाएगी, जिसमें जारी करने, संशोधन और लागू करने के विवरण शामिल होंगे।
  • समय-सीमा और जुर्माना: रिपोर्टिंग तिमाही समाप्त होने के 15 कैलेंडर दिनों के भीतर AD बैंकों के माध्यम से की जानी चाहिए। देरी होने पर जुर्माना (late submission fee) लगाया जाएगा।
  • ट्रेड क्रेडिट रिपोर्टिंग बंद: मार्च 2026 को समाप्त होने वाली तिमाही से ट्रेड क्रेडिट के लिए गारंटियों की अलग तिमाही रिपोर्टिंग की आवश्यकता बंद कर दी गई है।
  • प्रमुख छूट: कुछ व्यवस्थाओं को इन विनियमों से छूट दी गई है, जिनमें शामिल हैं:
    • भारत के बाहर या IFSC में AD बैंक की शाखाओं द्वारा जारी की गई गारंटी, बशर्ते कोई अन्य पक्ष भारत का निवासी न हो।
    • FEMA ओवरसीज इन्वेस्टमेंट (OI) विनियम, 2022 के अनुसार दी गई गारंटी।

निष्कर्ष:

विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गारंटी) विनियम, 2026, भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण और एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये नियम ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, पूंजी खाता परिवर्तनीयता की दिशा में क्रमिक दृष्टिकोण, IFSCs का विकास, और व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

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