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प्रसिद्ध पारिस्थितिकीविद् माधव गाडगिल का निधन (Renowned ecologist Madhav Gadgil passes away) | UPSC

Renowned ecologist Madhav Gadgil passes away

Renowned ecologist Madhav Gadgil passes away

संदर्भ:

भारत के प्रख्यात पारिस्थितिकी विज्ञानी और ‘पीपुल्स साइंटिस्ट’ कहे जाने वाले माधव धनंजय गाडगिल का 7 जनवरी 2026 को पुणे में 82 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से बीमार थे।

जीवन परिचय:

  • जन्म: 24 मई 1942, पुणे (महाराष्ट्र)।
  • शिक्षा: उन्होंने पुणे के फर्गुसन कॉलेज से स्नातक और मुंबई विश्वविद्यालय से परास्नातक किया। इसके बाद उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से ‘गणितीय पारिस्थितिकी’ में पीएचडी पूरी की।
  • संस्थान निर्माण: 1983 में उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु में पारिस्थितिक विज्ञान केंद्र (Centre for Ecological Sciences – CES) की स्थापना की।

पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल (WGEEP):

  • माधव गाडगिल को उनकी अध्यक्षता में तैयार की गई पश्चिमी घाट संबंधी रिपोर्ट के लिए सबसे अधिक जाना जाता है।  
  • इस रिपोर्ट का लक्ष्य पश्चिमी घाट (Western Ghats), जो एक वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट है, के संरक्षण के लिए सिफारिशें देना था।
  • पैनल ने संपूर्ण पश्चिमी घाट क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (Ecologically Sensitive Area – ESA) घोषित करने का सुझाव दिया।
  • पैनल ने क्षेत्र को संवेदनशीलता के आधार पर तीन श्रेणियों (ESZ 1, 2 और 3) में विभाजित किया और खनन, बड़े बांधों और प्रदूषणकारी उद्योगों पर पूर्ण प्रतिबंध की वकालत की।
  • पैनल ने संरक्षण प्रक्रिया में स्थानीय समुदायों और ग्राम सभाओं को निर्णय लेने का अधिकार देने पर जोर दिया।

प्रमुख उपलब्धियां और योगदान:

  • नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व: उन्होंने भारत के पहले बायोस्फीयर रिजर्व, ‘नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व’ की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • जैव विविधता अधिनियम, 2002: भारत के जैविक विविधता अधिनियम के प्रारूप को तैयार करने में उनका केंद्रीय योगदान था।
  • जन भागीदारी: उन्होंने ‘पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर’ (PBR) की अवधारणा पेश की, ताकि स्थानीय लोग अपनी जैव विविधता का दस्तावेजीकरण खुद कर सकें।
  • लेखन: उन्होंने 225 से अधिक शोध पत्र और ‘दिस फिशर्ड लैंड’ (This Fissured Land) जैसी प्रसिद्ध पुस्तकें लिखीं। उनकी आत्मकथा का नाम ‘ए वॉक अप द हिल’ है। 

सम्मान:

    • पद्म श्री (1981) और पद्म भूषण (2006)।
    • शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार।
    • टायलर पुरस्कार (2015) – पर्यावरण उपलब्धि के लिए।
    • चैंपियंस ऑफ द अर्थ (2024): संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा प्रदान किया गया सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान।

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