Sandalwood Leopard

संदर्भ:
कर्नाटक में हाल ही में “सैंडलवुड लेपर्ड” (Sandalwood Leopard) नामक एक अत्यंत दुर्लभ रंग रूप वाले तेंदुए को पहली बार देखा गया है। यह भारत में इस तरह के रंग-रूप का केवल दूसरा पुष्ट मामला है।
सैंडलवुड लेपर्ड का परिचय:
- हाल ही में कर्नाटक के विजयनगर जिले के शुष्क वनों में कैमरा ट्रैप के माध्यम से एक दुर्लभ रंग-रूप वाले तेंदुए की पहचान की गई है। इसे स्थानीय रूप से ‘सैंडलवुड लेपर्ड’ नाम दिया गया है।
- सैंडलवुड लेपर्ड सामान्य भारतीय तेंदुए (Panthera pardus fusca) का एक आनुवंशिक रंग रूप (genetic colour morph) है।
- अधिकांश भारतीय तेंदुओं में काले धब्बों (rosettes) के साथ एक तल्खी (tawny) या सुनहला-पीला कोट होता है।
- इस morph में, फर का रंग चंदन जैसा हल्का लाल-गुलाबी होता है और धब्बे काले के बजाय हल्के भूरे होते हैं।
- वैश्विक स्तर पर, इस स्थिति वाले तेंदुओं को “स्ट्रॉबेरी लेपर्ड” (Strawberry Leopard) के नाम से जाना जाता है।
असामान्य रंग का कारण:
- हाइपोमेलानिज़्म (Hypomelanism): यह मेलेनिन (गहरे रंग का वर्णक) के उत्पादन में कमी के कारण होता है, जिससे रंग हल्का हो जाता है।
- एरिथ्रिज़्म (Erythrism): यह अतिरिक्त लाल रंगद्रव्य (red pigmentation) या गहरे रंगद्रव्य की कमी के कारण होता है, जिसके परिणामस्वरूप लाल या गुलाबी रंग दिखाई देता है।
विशेष:
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- ‘भारत में तेंदुओं की स्थिति 2022’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 13,874 तेंदुए हैं, जिनमें मध्य प्रदेश पहले और कर्नाटक दूसरे स्थान पर है।
- लेपर्ड का एक अन्य प्रसिद्ध रंग रूप मेलानिस्टिक लेपर्ड (Melanistic Leopard) है, जिसे आमतौर पर “ब्लैक पैंथर” (Black Panther) या ‘कबिनी का साया’ कहा जाता है।
- यह अतिरिक्त मेलेनिन वर्णक के कारण होता है, जिससे जानवर पूरी तरह काला दिखाई देता है।
- ब्लैक पैंथर कर्नाटक के कुछ हिस्सों, विशेषकर पश्चिमी घाट में (जैसे नागरहोल और भद्रा टाइगर रिजर्व) पाए जाते हैं।
- इसकी संरक्षण स्थिति:
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- IUCN स्थिति: सुभेद्य (Vulnerable)।
- CITES: परिशिष्ट I (Appendix I)।
- WPA, 1972: अनुसूची I (Schedule I) – उच्चतम सुरक्षा।
