Sea of Japan: स्थिति, क्षेत्रफल, गहराई, विवाद एवं महत्वपूर्ण तथ्य
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संदर्भ:
हाल ही में 12 अक्टूबर 2026 को उत्तर कोरिया (North Korea) ने प्योंगयांग क्षेत्र से जापान सागर (Sea of Japan) के पूर्वी समुद्री क्षेत्र की ओर कई मारक बैलिस्टिक मिसाइलें (Ballistic Missiles) दागी।
- इस सैन्य परीक्षण में दागी गई मिसाइलों में से एक ने 900 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की है, जिससे इस रणनीतिक जलक्षेत्र में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया।
जापान सागर की भौगोलिक स्थिति एवं भौतिक विशेषताएं:
- अवस्थिति: जापान सागर (Sea of Japan) पश्चिमी प्रशांत महासागर (Western Pacific Ocean) का एक प्रमुख सीमांत सागर (Marginal Sea) है। यह एशियाई मुख्य भूमि के पूर्वी तट और जापानी द्वीपसमूह (Japanese Archipelago) के बीच विस्तृत है।
- तटीय सीमा (Japan Sea Bordering Countries): यह सागर पूर्व और दक्षिण में जापान, पश्चिम में उत्तर कोरिया व दक्षिण कोरिया, तथा उत्तर और उत्तर-पूर्व में रूस की मुख्य भूमि व सखालिन द्वीप से घिरा हुआ है।
- इसके पास लगभग 7,600 किलोमीटर की कुल तटरेखा है, जिसका आधा हिस्सा रूसी क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
- कुल क्षेत्रफल (Sea of Japan Area): इस सागर का कुल सतही क्षेत्रफल लगभग 9,78,000 वर्ग किलोमीटर है।
- अधिकतम गहराई (Sea of Japan Maximum Depth): इस सागर की अधिकतम गहराई 3,742 मीटर (12,276 फीट) है।
- द्रोणी संरचना (Oceanic Basins): समुद्र के आंतरिक तल को मुख्य रूप से तीन बड़ी अंतःसांस्कृतिक द्रोणियों (Basins) में विभाजित किया गया है:
- उत्तर में स्थित सबसे गहरा क्षेत्र जिसे जापान द्रोणी (Japan Basin) कहा जाता है।
- दक्षिण-पश्चिम में अवस्थित त्सुशिमा द्रोणी (Tsushima Basin)।
- दक्षिण-पूर्व में फैली यामातो द्रोणी (Yamato Basin)।
- जल विज्ञान: प्रशांत महासागर से मुख्य रूप से अलग होने के कारण खुले महासागरों की तुलना में यहाँ ज्वार-भाटे (Tides) लगभग नगण्य होते हैं, और इसका खारापन (Salinity) भी तुलनात्मक रूप से कम है।
- प्रमुख जलडमरूमध्य (Sea of Japan Important Straits): जापान सागर पांच संकीर्ण जलडमरूमध्यों (Straits) के माध्यम से बाहरी जल निकायों और खुले प्रशांत महासागर से जुड़ा हुआ है:
- त्सुशिमा जलडमरूमध्य (Tsushima Strait): यह दक्षिण-पश्चिम में दक्षिण कोरिया को जापान से पृथक करता है और जापान सागर को पूर्वी चीन सागर (East China Sea) से जोड़ता है।
- त्सुगारू जलडमरूमध्य (Tsugaru Strait): यह जापान के मुख्य द्वीपों ‘होनशू’ और ‘होक्काइडो’ के बीच स्थित है, जो आंतरिक सागर को खुले प्रशांत महासागर से जोड़ता है।
- ला पेरेस जलडमरूमध्य (La Perouse / Soya Strait): यह रूस के सखालिन द्वीप और जापान के होक्काइडो के बीच स्थित है, जो उत्तर-पूर्व में ओखोत्स्क सागर (Sea of Okhotsk) का मार्ग प्रशस्त करता है।
- तार्टार जलडमरूमध्य (Strait of Tartary): यह सुदूर उत्तर में रूसी मुख्य भूमि और सखालिन द्वीप को अलग करता है।
अंतरराष्ट्रीय विवाद और नामकरण का मुद्दा:
- नामकरण विवाद (Sea of Japan Naming Dispute):
- जापान का पक्ष: अंतरराष्ट्रीय जल सर्वेक्षण संगठन (IHO) और संयुक्त राष्ट्र (UN) आधिकारिक तौर पर इसे ‘जापान सागर’ (Sea of Japan) के रूप में प्रलेखित करते हैं। जापान इसे सार्वभौमिक और ऐतिहासिक नाम मानता है।
- कोरियाई देशों का विरोध (East Sea Naming Controversy): दक्षिण कोरिया इसे ‘पूर्वी सागर’ (East Sea) तथा उत्तर कोरिया इसे ‘कोरिया का पूर्वी सागर’ कहने पर बल देता है।
- उनका तर्क है कि 1910-1945 के जापानी औपनिवेशिक शासन के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानचित्रों पर ‘जापान सागर’ नाम जबरन थोपा गया था, जबकि ऐतिहासिक रूप से यह ‘पूर्वी सागर’ था।
- क्षेत्रीय भू-क्षेत्रीय विवाद (Territorial Disputes):
- लियनकोर्ट रॉक्स / डोक्डो द्वीप विवाद: यह दक्षिण कोरिया के प्रशासनिक नियंत्रण में है, लेकिन जापान इस पर ‘ताकेशिमा’ के नाम से संप्रभुता का दावा करता है।
- उत्तरी कुरिल द्वीप विवाद: जापान सागर के सुदूर उत्तर में स्थित कुरिल द्वीपों पर रूस का नियंत्रण है, जबकि जापान इसके दक्षिणी द्वीपों (इतूकुनाशी, शिकागोटान) पर अपना दावा करता है।
समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र एवं आर्थिक महत्व:
- धाराओं का मिलन (Ocean Currents): यहाँ दक्षिण से आने वाली गर्म त्सुशिमा धारा (Tsushima Current) और उत्तर से आने वाली ठंडी लिमन धारा (Liman Current) का मिलन होता है।
- उच्च जैविक उत्पादकता (Sea of Japan Marine Ecosystem): ठंडी और गर्म समुद्री धाराओं के मिश्रण के कारण इस सागर के जल में घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) और प्लवक (Plankton) की मात्रा प्रचुर होती है। इसके परिणामस्वरूप यह विश्व के सबसे समृद्ध मछली पकड़ने वाले क्षेत्रों (Fishing Grounds) में से एक है।
- भू-आर्थिक मार्ग: यद्यपि उत्तर कोरिया और रूस की भू-राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण इस मार्ग पर वाणिज्यिक जहाजों का परिवहन ऐतिहासिक रूप से सीमित रहा है, किंतु उभरती पूर्वी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के चलते इसकी व्यापारिक प्रासंगिकता बढ़ रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: जापान सागर कहां स्थित है और इसकी सीमाएं किन देशों से लगती हैं?
उत्तर: यह पश्चिमी प्रशांत महासागर का सीमांत सागर है, जो एशियाई मुख्य भूमि के पूर्व में स्थित है। इसकी सीमाएं जापान, रूस, उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया से लगती हैं।
प्रश्न 2: जापान सागर का कुल क्षेत्रफल और अधिकतम गहराई कितनी है?
उत्तर: जापान सागर का कुल सतही क्षेत्रफल लगभग 9,78,000 वर्ग किलोमीटर है और इसकी अधिकतम दर्ज गहराई 3,742 मीटर है।
प्रश्न 3: जापान सागर को पूर्वी सागर भी क्यों कहा जाता है?
उत्तर: दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया अपने भौगोलिक और ऐतिहासिक मानचित्रों के आधार पर इसे ‘जापान सागर’ के बजाय ‘पूर्वी सागर’ (East Sea) के नाम से पुकारते हैं।
प्रश्न 4: जापान सागर के नाम को लेकर जापान और दक्षिण कोरिया के बीच क्या विवाद है?
उत्तर: कोरिया का दावा है कि वर्तमान नाम जापानी साम्राज्यवाद की औपनिवेशिक विरासत है, जबकि जापान का तर्क है कि यह नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से स्थापित है।
प्रश्न 5: जापान सागर को प्रशांत महासागर से जोड़ने वाले प्रमुख जलडमरूमध्य कौन-कौन से हैं?
उत्तर: प्रमुख जलडमरूमध्यों में त्सुशिमा जलडमरूमध्य (Tsushima Strait), त्सुगारू जलडमरूमध्य (Tsugaru Strait) और ला पेरेस जलडमरूमध्य (La Perouse Strait) शामिल हैं।
