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भारतीय संविधान में सेक्युलर और सोशलिस्ट (Secular and Socialist in Indian Constitution) | UPSC Preparation

Secular and Socialist in Indian Constitution

Secular and Socialist in Indian Constitution

संदर्भ:

संविधान की प्रस्तावना (Preamble) से समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्दों को हटाने की मांग समय-समय पर फिर से उठती रही है। यह तथ्य उल्लेखनीय है कि ये दोनों शब्द संविधान के 1951 में लागू होने के समय प्रस्तावना का हिस्सा नहीं थे, बल्कि इन्हें 1976 में 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से जोड़ा गया था।

भारतीय संविधान में सेक्युलरऔर सोशलिस्टशब्दों का अर्थ

  1. सेक्युलर (Secular) का अर्थ: भारत में ‘सेक्युलर’ का अर्थ है कि राज्य किसी धर्म का पक्ष नहीं लेता। भारत सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता को अपनाता है, यानी राज्य सभी धर्मों का समान सम्मान करता है और किसी एक विशेष धर्म को बढ़ावा नहीं देता।

संवैधानिक आधार:

  • अनुच्छेद 14: सभी को कानून के समक्ष समानता
  • अनुच्छेद 15: धर्म के आधार पर भेदभाव वर्जित
  • अनुच्छेद 16: धर्म के आधार पर सरकारी नौकरियों में भेदभाव नहीं
  • अनुच्छेद 25: धर्म की स्वतंत्रता
  • अनुच्छेद 26: धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन की स्वतंत्रता

मुख्य विशेषताएँ:

  • धार्मिक स्वतंत्रता: हर नागरिक को अपनी पसंद का धर्म अपनाने, प्रचार करने और पालन करने का अधिकार।
  • सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान: राज्य सभी धर्मों को समान रूप से मान्यता देता है और धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देता है।
  1. सोशलिस्ट (Socialist) का अर्थ: ‘सोशलिस्ट’ का अर्थ है सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता को बढ़ावा देना। यह पूर्ण राज्य नियंत्रण की बात नहीं करता, बल्कि सार्वजनिक कल्याण और निजी क्षेत्र के बीच संतुलन की वकालत करता है।

संवैधानिक आधार:

  • 42वां संविधान संशोधन (1976) के तहत ‘सोशलिस्ट’ शब्द को प्रस्तावना में जोड़ा गया।
  • भारतीय समाजवाद का मॉडल लोकतांत्रिक समाजवाद है, न कि कम्युनिस्ट।
  • नीति निर्देशक सिद्धांत (Part IV) में समाजिक और आर्थिक समानता की दिशा में राज्य को मार्गदर्शन दिया गया है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • कल्याणकारी राज्य (Welfare State): सभी नागरिकों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करना।
  • आर्थिक न्याय (Economic Justice): संपत्ति और संसाधनों का समान वितरण, गरीबी उन्मूलन, वंचित वर्गों के लिए विशेष योजनाएं, और सामाजिक सुरक्षा।

 

“Socialist” औरSecular” शब्द क्यों जोड़े गए?

  1. संविधान सभा में प्रारंभिक बहस

संविधान निर्माण के दौरान कुछ सदस्य, जैसे प्रोफेसर के.टी. शाह, ने प्रस्तावना में “socialist” और “secular” जोड़ने का सुझाव दिया था।

  • डॉ. भीमराव आंबेडकर ने इसका विरोध किया।
  • उनका तर्क था कि:
    • ऐसी नीतियाँ लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनी हुई सरकार तय करे, न कि उन्हें स्थायी रूप से संविधान में शामिल किया जाए।
    • अगर कोई विशेष आर्थिक या धार्मिक नीति को संविधान में लिख दिया जाए, तो यह लोकतांत्रिक लचीलापन (democratic flexibility) को बाधित करेगा।
  1. राजनीतिक उद्देश्य:
  • इंदिरा गांधी सरकार ने आपातकाल (Emergency, 1975–77) के दौरान “Garibi Hatao” जैसे नारों के साथ समाजवाद को बढ़ावा दिया।
  • “Socialist” शब्द को संविधान में जोड़ना, उनकी नीतियों को संवैधानिक वैधता देने का माध्यम बना।
  • यह दिखाने का प्रयास था कि सरकार आर्थिक असमानता को दूर करने और गरीबों के कल्याण को लेकर प्रतिबद्ध है।
  1. धर्मनिरपेक्षता को पुष्टि देना
  • 1970 के दशक में सांप्रदायिक तनाव और धार्मिक राजनीति के बढ़ते प्रभाव के बीच, सरकार ने “Secular” शब्द जोड़कर स्पष्ट किया कि –
    • भारत का राज्य किसी धर्म का पक्ष नहीं लेता,
    • और सभी धर्मों को समान रूप से सम्मान देता है।
    • यह कदम भारत की बहुलतावादी परंपरा और समावेशी संविधान को बल देने के लिए उठाया गया था।

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