Shyok Tunnel

संदर्भ:
हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित पूर्वी लद्दाख में स्थित श्योक सुरंग का उद्घाटन किया गया, जो भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास सैन्य और लॉजिस्टिक क्षमताओं को मजबूत करने और कठिन मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने में सहायक है।
श्योक सुरंग:
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भौगोलिक स्थिति: श्योक सुरंग पूर्वी लद्दाख में दुरबुक–श्योक–दौलत बेग ओल्डी सड़क पर स्थित है। यह सड़क लगभग 255 किलोमीटर लंबी है और भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों को जोड़ती है।
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लंबाई और ऊँचाई: सुरंग की लंबाई लगभग 920 मीटर है और यह 12,000 फीट से अधिक ऊँचाई पर स्थित है। यह क्षेत्र अत्यधिक ठंड, भारी हिमपात और हिमस्खलन के लिए जाना जाता है।
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निर्माण तकनीक: इस सुरंग का निर्माण कट-एंड-कवर तकनीक से किया गया है। यह तकनीक संकीर्ण घाटियों और जटिल भूगर्भीय संरचना वाले क्षेत्रों में अधिक उपयुक्त मानी जाती है।
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निष्पादन एजेंसी: परियोजना का निर्माण सीमा सड़क संगठन द्वारा किया गया है, जो रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। यह संगठन दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों, सुरंगों और पुलों के निर्माण में विशेषज्ञ है।
सुरंग का सामरिक और सैन्य महत्व:
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सर्वमौसम संपर्क: श्योक सुरंग का सबसे बड़ा लाभ सालभर निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करना है। पहले यह मार्ग सर्दियों में हिमपात और हिमस्खलन के कारण बार-बार बाधित हो जाता था।
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सैन्य आवाजाही: यह सुरंग दौलत बेग ओल्डी और देपसांग मैदानों तक सैनिकों, हथियारों और आपूर्ति की तेज और सुरक्षित आवाजाही को संभव बनाती है।
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हवाई निर्भरता में कमी: स्थल मार्ग मजबूत होने से महंगी और मौसम पर निर्भर हवाई आपूर्ति की आवश्यकता कम होती है, जिससे रसद सुरक्षा बढ़ती है।
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रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता: यह परियोजना भारत की सीमा अवसंरचना सुदृढ़ीकरण नीति का हिस्सा है, जिसे 2020 के बाद विशेष रूप से गति दी गई है।
सुरंग का सामाजिक प्रभाव:
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स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: यह सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार और वाणिज्य को सुगम बनाती है, जिससे आने वाले समय में स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
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पर्यटन और रोजगार: यह आने वाले समय में बेहतर कनेक्टिविटी सीमा पर्यटन को बढ़ावा देगी, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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विकास और सुविधा: दुर्गम इलाकों में जीवन स्तर में सुधार होगा, जिससे सीमावर्ती बस्तियां विकास का अभिन्न अंग बन सकेगी।
