Signing of Terms of Reference for FTA between India and GCC
संदर्भ:
भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने 5 फरवरी, 2026 को ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ (ToR) पर हस्ताक्षर कर अपने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की औपचारिक वार्ता का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। यह कदम भारत की ‘वेस्ट एशिया’ नीति और आर्थिक कूटनीति के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
संदर्भ की शर्तें (ToR) क्या हैं?
- ToR एक औपचारिक दस्तावेज है जो भविष्य में होने वाली वार्ता के दायरे (Scope), तौर-तरीकों (Modalities) और समय-सीमा को परिभाषित करता है। यह वार्ता की नींव है, जो यह सुनिश्चित करती है कि दोनों पक्ष किन क्षेत्रों (वस्तुओं, सेवाओं, निवेश आदि) पर चर्चा करेंगे।
खाड़ी सहयोग परिषद (Gulf Cooperation Council – GCC):
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- परिचय: खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) छह अरब देशों का एक क्षेत्रीय अंतर-सरकारी, राजनीतिक और आर्थिक संघ है।
- स्थापना: 25 मई, 1981।
- मुख्यालय: रियाद, सऊदी अरब।
- सदस्य देश: GCC में निम्नलिखित छह देश शामिल हैं: सऊदी अरब (क्षेत्रफल और अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा), संयुक्त अरब अमीरात (UAE) , कतर, कुवैत, ओमान, बहरीन।
- संगठनात्मक संरचना: GCC तीन मुख्य स्तरों पर कार्य करता है:
- सर्वोच्च परिषद (Supreme Council): यह परिषद की सर्वोच्च संस्था है, जिसमें सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होते हैं। इसकी अध्यक्षता वर्णमाला के क्रम में प्रतिवर्ष बदलती रहती है।
- मंत्रिपरिषद (Ministerial Council): इसमें विदेश मंत्री शामिल होते हैं, जो नीतियों को तैयार करने और सर्वोच्च परिषद के निर्णयों को लागू करने का कार्य करते हैं।
- सचिवालय (Secretariat General): यह प्रशासनिक और समन्वयकारी कार्यों को संभालता है।
- प्रमुख विशेषताएं:
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- साझा बाजार: GCC देशों के बीच एक ‘कॉमन मार्केट’ है, जिसमें वस्तुओं, सेवाओं और नागरिकों की मुक्त आवाजाही (Free Movement) का प्रावधान है।
- एक समान सीमा शुल्क: 2003 में इन्होंने व्यापार पर शुल्क समाप्त कर एक समान बाहरी टैरिफ लागू किया था।
- सामूहिक रक्षा: इनका एक संयुक्त सैन्य बल है जिसे ‘पेनिनसुला शील्ड फोर्स’ (Peninsula Shield Force) कहा जाता है।
द्विपक्षीय व्यापार का वर्तमान परिदृश्य (2025-26):
- कुल व्यापार: वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और GCC के बीच कुल व्यापार $178.56 बिलियन रहा।
- भारत का निर्यात: लगभग $56.87 बिलियन (इंजीनियरिंग सामान, चावल, वस्त्र, रत्न एवं आभूषण)।
- भारत का आयात: लगभग $121.68 बिलियन (मुख्यतः कच्चा तेल, एलएनजी, पेट्रोकेमिकल्स)।
- निवेश: सितंबर 2025 तक GCC देशों का भारत में संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) $31.14 बिलियन से अधिक हो चुका है।
- प्रमुख लाभार्थी क्षेत्र:
- पेट्रोकेमिकल्स: कच्चे माल की आसान उपलब्धता और निर्यात में वृद्धि।
- आईटी और आईसीटी: खाड़ी देशों के डिजिटल परिवर्तन में भारतीय सॉफ्टवेयर सेवाओं की पहुंच।
- बुनियादी ढांचा: खाड़ी के निवेश फंड (Sovereign Wealth Funds) द्वारा भारत के गति शक्ति मिशन में निवेश।
रणनीतिक और आर्थिक महत्व:
- ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security): भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 60% और प्राकृतिक गैस का 70% हिस्सा GCC देशों से आयात करता है। एक औपचारिक FTA इन आपूर्ति श्रृंखलाओं में ‘स्थिरता और पूर्वानुमेयता’ (Predictability) लाएगा।
- खाद्य सुरक्षा (Food Security): जहाँ खाड़ी देश ऊर्जा संपन्न हैं, वहीं भारत एक कृषि प्रधान देश है। यह समझौता भारत के खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) क्षेत्र के लिए एक विशाल बाजार खोलेगा, जिससे खाड़ी देशों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
- प्रवासी समुदाय और प्रेषण (Remittances): GCC देशों में लगभग 1 करोड़ (10 मिलियन) भारतीय प्रवासी रहते हैं। यह क्षेत्र भारत के लिए विदेशी मुद्रा प्रेषण (Remittances) का सबसे बड़ा स्रोत है (सालाना $50 बिलियन से अधिक)।
- भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC): G20 में घोषित यह गलियारा UAE और सऊदी अरब से होकर गुजरता है, जो भारत को यूरोप से जोड़ेगा।
- सुरक्षा सहयोग: आतंकवाद विरोधी अभियानों, समुद्री सुरक्षा (हिंद महासागर क्षेत्र) और सैन्य अभ्यास (जैसे – ‘अल-मोहद अल-हिन्दी’) में सहयोग बढ़ा है।

