Sirkeer Malkoha

संदर्भ:
हाल ही में सिरकीर मलकोहा नामक दुर्लभ पक्षी को पहली बार उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के पहाड़ी इलाकों (बरकोट क्षेत्र) में देखा गया।
सिरकीर मलकोहा के बारे में:
- सिरकीर मलकोहा (वैज्ञानिक नाम: Taccocua leschenaultii) एक गैर-परजीवी कोयल प्रजाति है।
- यह प्रजाति भारतीय उपमहाद्वीप में व्यापक रूप से फैली हुई है, जिसमें भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान के कुछ हिस्से शामिल हैं।
- भारत में यह उप-हिमालयी क्षेत्रों से लेकर दक्षिण भारत तक पाया जाता है। यह आमतौर पर शिवालिक तलहटी और मैदानी इलाकों में पाया जाता है।
- यह लगभग 42-44 सेंटीमीटर लंबा होता है। इसका ऊपरी हिस्सा जैतून-भूरा (olive-brown) होता है और एक लंबी पूंछ होती है, जिसके बाहरी पंखों के सिरे पर प्रमुख सफेद धब्बे होते हैं।
- इसकी सबसे विशिष्ट विशेषता इसकी घुमावदार, मजबूत, चेरी-लाल चोंच है, जिसका सिरा पीला होता है। नर और मादा मलकोहा दिखने में बिल्कुल एक जैसे होते हैं।
- इसके पैर धूसर (grey) होते हैं और ‘जाइगोडैक्टाइल’ होते हैं, जिसका अर्थ है कि दो पंजे आगे और दो पीछे की ओर होते हैं।
- यह बहुत शांत स्वभाव का पक्षी है। जो घनी वनस्पति मुख्य रूप से शुष्क झाड़ीदार जंगलों (dry scrub forests) और खुले वुडलैंड्स में रहता है।
- यह मुख्य रूप से मांसाहारी होता है, जो बड़े कीड़ों, टिड्डों, छिपकलियों और कभी-कभी जामुन और फलों को खाता है।
- यह ब्रूड परजीवी (brood parasite) नहीं है। यह अपना घोंसला स्वयं बनाता है, जो टहनियों से बना एक उथला तश्तरीनुमा होता है।
- प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में इसे “कम चिंताजनक” (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है।
