Apni Pathshala

Special Intensive Revision (SIR): परिचय, आधार, आवश्यकता एवं वर्तमान घटनाक्रम

Special Intensive Revision (SIR): परिचय, आधार, आवश्यकता एवं वर्तमान घटनाक्रम

संदर्भ:

हाल ही में भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI) ने जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान मतदाता सूची से बाहर हुए पुराने मतदाताओं के लिए एक बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया। आयोग के अनुसार, पुराने मतदाता बिना किसी कानूनी कार्रवाई के डर के फॉर्म-6 (Form 6) जमा कर सकेंगे। 

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बारे में:

  • परिचय: विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision of Voters List – SIR) निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची (Electoral Roll) को पूरी तरह से शुद्ध, त्रुटिरहित और अद्यतन बनाने के लिए चलाया जाने वाला एक व्यापक राष्ट्रव्यापी अभियान है।
    • इसके तहत बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करते हैं ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न छूटे। 
  • संवैधानिक और कानूनी आधार (Constitutional and Legal Basis):
  • अनुच्छेद 324: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 324 (Article 324) निर्वाचन आयोग को चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की पूर्ण शक्ति देता है, जिसमें मतदाता सूची तैयार करना भी शामिल है।
  • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950: इस अधिनियम की धाराओं के तहत आयोग को समय-समय पर मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण (SIR Electoral Roll Revision) करने का विधिक अधिकार प्राप्त है। 
  • न्यायिक वैधता: मई 2026 में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने इस प्रक्रिया की वैधता को बरकरार रखते हुए इसे निष्पक्ष चुनाव कराने के संवैधानिक दायित्व के अनुकूल माना था।
  • संचालन और वर्तमान घटनाक्रम 2026 (Current Event & SIR Voter List 2026):
  • चरणबद्ध कार्यान्वयन: भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission SIR) देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चरणबद्ध तरीके से इसे क्रियान्वित कर रहा है। इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सबसे पहले बिहार में राज्य विधानसभा चुनाव से पहले आजमाया गया। दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा और तेलंगाना जैसे राज्यों में वर्तमान में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन (Final Publication) की प्रक्रिया चल रही है।
  • विवाद और चिंताओं का कारण: इस वृहद प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर प्रविष्टियों को ‘संदेहास्पद’ या ‘अपात्र’ मानकर ड्राफ्ट रोल से हटा दिया गया।
    • ड्राफ्ट वोटर लिस्ट (मसौदा सूची) के प्रकाशन के बाद यह बात सामने आई कि लगभग 13.37 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से बाहर (Marked) कर दिए गए हैं।
    • सबसे विवादास्पद नियम यह रहा कि मौजूदा मतदाताओं को अपनी पात्रता सिद्ध करने के लिए यह घोषणा देनी पड़ रही थी कि उनका नाम वर्ष 2002-2004 के पिछले गहन पुनरीक्षण की सूचियों में था या वे उन मतदाताओं के वंशज हैं।
    • हटाए गए मतदाताओं को दोबारा जुड़ने के लिए फॉर्म-6 भरने को कहा गया, जो मूल रूप से नए मतदाताओं (First-time Voters) के लिए होता है। 
    • चूंकि फॉर्म-6 में यह स्व-घोषणा (Declaration) करनी होती है कि आवेदक ‘पहली बार’ जुड़ रहा है, इसलिए पुराने मतदाताओं में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 (झूठी घोषणा के लिए दंडात्मक कार्रवाई) के तहत जेल जाने का भय पैदा हो गया था।
  • चुनाव आयोग का नया स्पष्टीकरण और राहत (ECI Guidelines & Form-6 U-Turn):
  • कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं: 3 नवंबर 2026 को जारी दिशा-निर्देशों में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि किसी पूर्व पंजीकृत मतदाता का नाम ड्राफ्ट लिस्ट से गायब है, तो उसके द्वारा फॉर्म-6 भरना ‘झूठी घोषणा’ नहीं माना जाएगा।
  • सुरक्षा की शर्तें: बशर्ते आवेदक किसी अन्य संसदीय या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र (Constituency) में पंजीकृत न हो, उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
  • पोर्टल में सुधार: आयोग ने विवाद को हल करने के लिए अपने डिजिटल बुनियादी ढांचे ECINet पोर्टल पर फॉर्म-6 के ऑनलाइन संस्करण से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े अनिवार्य घोषणा वाले पैरा को भी हटा दिया है ताकि मतदाता सुगमता से आवेदन कर सकें। 

भारत में SIR कराने की आवश्यकता (Need for SIR in India):

  • अशुद्धियों को दूर करना: सामान्य पुनरीक्षणों में कई बार मृत नागरिकों, स्थायी रूप से स्थानांतरित (Permanently Shifted) हो चुके लोगों और डुप्लिकेट प्रविष्टियों (Duplicate Entries) का विवरण मतदाता सूची में बना रहता है, जिसे हटाने के लिए सघन गृह-सत्यापन आवश्यक होता है।
  • जनसांख्यिकीय बदलावों को समाहित करना: तीव्र शहरीकरण और राज्यों के बीच आंतरिक प्रवासन (Migration) के कारण बड़ी आबादी का स्थान बदल जाता है। उनकी नई आवासीय स्थिति के अनुसार चुनावी पंजीकरण (Electoral Registration) को सुदृढ़ करने के लिए यह प्रक्रिया अनिवार्य है।
  • युवा मतदाताओं का समावेशन: 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए पात्र युवाओं (Young Electors) को मतदाता सूची सुधार (Voter List Correction) के माध्यम से लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनाना इसका मुख्य लक्ष्य है।
  • चुनावी शुचिता सुनिश्चित करना: बोगस वोटिंग और चुनावी धांधलियों को रोकने के लिए एक पारदर्शी और ‘क्लीन’ मतदाता सूची ही स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव (Free and Fair Elections) की प्राथमिक शर्त है। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या है?

उत्तर: यह भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा चलाया जाने वाला एक विशेष विधिक अभियान है, जिसमें बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाता सूची (Voter List) का भौतिक सत्यापन व शुद्धीकरण करते हैं।

प्रश्न 2: भारत में SIR कराने की आवश्यकता क्यों पड़ती है?

उत्तर: मतदाता सूची से मृत, फर्जी और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने तथा छूटे हुए पात्र नागरिकों एवं युवाओं को जोड़ने के लिए इसकी आवश्यकता होती है। 

प्रश्न 3: विशेष गहन पुनरीक्षण का संचालन कौन करता है?

उत्तर: इसका संचालन संवैधानिक संस्था भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) अपने राज्य स्तरीय मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) और जिला निर्वाचन अधिकारियों के माध्यम से करता है। 

प्रश्न 4: SIR प्रक्रिया में मतदाता सूची को कैसे अपडेट किया जाता है?

उत्तर: बीएलओ (BLO) घर-घर जाकर गणना फॉर्म भरते हैं, जिसके बाद एक प्रारंभिक ड्राफ्ट रोल प्रकाशित होता है और फिर दावों व आपत्तियों (Claims & Objections) के निस्तारण के बाद अंतिम सूची जारी होती है।

Share Now ➤

क्या आपको Apni Pathshala के Courses, RNA PDF, Current Affairs, Test Series और Books से सम्बंधित कोई जानकारी चाहिए? तो हमारी विशेषज्ञ काउंसलर टीम आपकी सिर्फ समस्याओं के समाधान में ही मदद नहीं करेगीं, बल्कि आपको व्यक्तिगत अध्ययन योजना बनाने, समय का प्रबंधन करने और परीक्षा के तनाव को कम करने में भी मार्गदर्शन देगी।

Apni Pathshala के साथ अपनी तैयारी को मजबूत बनाएं और अपने सपनों को साकार करें। आज ही हमारी विशेषज्ञ टीम से संपर्क करें और अपनी सफलता की यात्रा शुरू करें

📞 +91 7878158882

Related Posts

Scroll to Top