Startup India initiative completes 10 years

संदर्भ:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज, 16 जनवरी 2026 को, ‘राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस’ के अवसर पर ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल के 10 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देश के वाइब्रेंट स्टार्टअप इकोसिस्टम के साथ संवाद करेंगे। यह कार्यक्रम नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है, जहाँ पीएम मोदी उद्यमियों की सफलता की कहानियाँ सुनेंगे और भविष्य का रोडमैप साझा करेंगे।
स्टार्टअप इंडिया पहल के बारे मे:
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- परिचय: ‘स्टार्टअप इंडिया’ भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसे 16 जनवरी 2016 को नवाचार को बढ़ावा देने और एक मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
- मंत्रालय: यह योजना वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा कार्यान्वित की जाती है।
- स्तंभ: योजना 19-सूत्रीय कार्य योजना (Action Plan) पर आधारित है, जिसे तीन मुख्य स्तंभों में विभाजित किया गया है:
- सरलीकरण और सहायता (Simplification and Handholding): इसमें स्टार्टअप इंडिया पोर्टल, मोबाइल ऐप, स्व-प्रमाणन (Self-certification) के आधार पर अनुपालन, और ’90-दिवसीय निकास खिड़की’ (Insolvency and Bankruptcy Code के तहत) शामिल है।
- वित्त पोषण सहायता और प्रोत्साहन (Funding Support and Incentives): आयकर में 3 साल की छूट (पंजीकरण के पहले 10 वर्षों में से) और पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax) से छूट प्रदान की जाती है।
- उद्योग-अकादमिक साझेदारी और इन्क्यूबेशन: नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नए इन्क्यूबेटर, अटल इनोवेशन मिशन (AIM) के तहत टिंकरिंग लैब और अनुसंधान पार्कों की स्थापना।
- वित्तीय तंत्र: इस योजना में विभिन्न स्तरों पर वित्तीय सहायता दी जाती है:
- फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स (FFS): ₹10,000 करोड़ का कॉर्पस, जिसे SIDBI द्वारा प्रबंधित किया जाता है। यह सीधे स्टार्टअप में निवेश नहीं करता, बल्कि SEBI-पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोषों (AIFs) में निवेश करता है।
- स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना (SISFS): अप्रैल 2021 में शुरू हुई इस योजना का परिव्यय ₹945 करोड़ है। यह शुरुआती चरण (Proof of Concept, प्रोटोटाइप) के लिए ₹20 लाख तक की अनुदान सहायता और बाजार प्रवेश/स्केलिंग के लिए ₹50 लाख तक का ऋण प्रदान करती है।
- क्रेडिट गारंटी योजना (CGSS): स्टार्टअप्स को बैंकों और NBFCs से बिना किसी कोलैटरल (जमानत) के ऋण प्राप्त करने में मदद करती है।
स्टार्टअप इंडिया’ पहल की उपलब्धियां:
- अभूतपूर्व वृद्धि: 2016 में लगभग 450 स्टार्टअप्स से शुरू होकर, जनवरी 2026 तक भारत में 2,00,000 से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स हैं।
- विकेंद्रीकरण: यह केवल मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रहा; वर्तमान में भारत के लगभग 50% स्टार्टअप्स टियर-II और टियर-III शहरों से आते हैं, जो क्षेत्रीय विकास को संतुलित कर रहे हैं।
- प्रत्यक्ष रोजगार: स्टार्टअप इकोसिस्टम ने पिछले दशक में 21 लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन किया है।
- ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII): 2015 में 81वें स्थान से छलांग लगाकर भारत 2025-26 में 38वें स्थान पर पहुंच गया है।
- तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम: भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बना हुआ है, जिसमें यूनिकॉर्न्स (1 बिलियन डॉलर से अधिक मूल्य) की संख्या 115 से अधिक हो गई है।
- स्पेस टेक और रक्षा: निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष द्वार खुलने से 300+ स्टार्टअप्स (जैसे स्काईरूट) उपग्रह और प्रक्षेपण यान बना रहे हैं।
- डीप टेक और AI: भारत ‘एआई मिशन’ के माध्यम से कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग में अग्रणी बन रहा है।
- महिला उद्यमिता: लगभग 47% मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक है।
स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए अन्य पहले:
- विनियमन सरलीकरण: ‘इनकम टैक्स’ में 3 साल की छूट, स्वयं-प्रमाणन (Self-certification) और अनुपालन बोझ में कमी जैसे सुधारों ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा दिया।
- मेंटरशिप और नेटवर्क: ‘मार्ग’ (MAARG) पोर्टल के माध्यम से स्टार्टअप्स को विशेषज्ञों और निवेशकों से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।
- सार्वजनिक खरीद (Public Procurement): स्टार्टअप्स को सरकारी निविदाओं में ‘पूर्व अनुभव’ और ‘टर्नओवर’ की शर्तों से छूट मिलती है।
- IPR लाभ: पेटेंट पंजीकरण शुल्क में 80% और ट्रेडमार्क शुल्क में 50% की छूट, साथ ही आवेदनों की फास्ट-ट्रैकिंग।
- राज्यों की स्टार्टअप रैंकिंग: राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धात्मक संघवाद को बढ़ावा देने के लिए वार्षिक मूल्यांकन ढांचा भी जारी किया जाता है।
