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डब्ल्यू उर्से मेजरिस नामक तारकीय जुड़वाँ पर अध्ययन (Study on the stellar twin named W Ursae Majoris) | UPSC Preparation

Study on the stellar twin named W Ursae Majoris

Study on the stellar twin named W Ursae Majoris

संदर्भ:

हाल ही में खगोलविदों ने W उर्स मेजरिस (W Ursae Majoris) प्रकार के तारकीय जुड़वाँ बाइनरी स्टार सिस्टम (द्विक तारा प्रणाली) पर एक महत्वपूर्ण अध्ययन किया है, जिससे उनके विकास और अंत के बारे में नई जानकारियाँ मिली हैं।

इस अध्ययन के मुख्य बिंदु:

  • संपर्क बाइनरी (Contact Binaries): W उर्स मेजरिस ऐसे तारे हैं जो एक-दूसरे के इतने करीब होते हैं कि उनकी बाहरी परतें आपस में मिल जाती हैं और वे एक साझा वातावरण साझा करते हैं।
  • ऊर्जा का हस्तांतरण: अध्ययन से पता चला है कि इन प्रणालियों में भारी तारे से हल्के तारे की ओर ऊर्जा का निरंतर प्रवाह होता है, जिससे दोनों तारों का तापमान लगभग समान बना रहता है।
  • अंतिम परिणति (Final Fate): शोध यह संकेत देता है कि कोणीय संवेग (Angular Momentum) के नुकसान के कारण ये दोनों तारे अंततः आपस में टकराकर एक हो सकते हैं। इस विलय से एक तेजी से घूमने वाले विशाल तारे ‘ब्लू स्ट्रैगलर’ का जन्म हो सकता है।

स्टेलर ट्विन्स (Stellar Twins) क्या हैं?

स्टेलर ट्विन्स वे तारे होते हैं जिनका जन्म एक ही आणविक बादल (Molecular Cloud) से, एक ही समय में और समान रासायनिक संरचना के साथ हुआ होता है। खगोलविद इन्हें तीन श्रेणियों में विभाजित करते हैं: 

  • सोलर टाइप (Solar-type): वे तारे जो सूर्य के समान सामान्य गुणों वाले होते हैं।
  • सोलर एनालॉग्स (Solar Analogs): जो फोटोमेट्रिक गुणों (तापमान, रंग) में सूर्य के बहुत करीब होते हैं।
  • सोलर ट्विन्स (Solar Twins): जो द्रव्यमान, तापमान, रासायनिक संरचना (धातुता) और उम्र में सूर्य के लगभग ‘सटीक प्रतिरूप’ होते हैं। 

महत्व:

  • गाइया (Gaia) मिशन: ESA के Gaia मिशन ने 2026 के अपने डेटा रिलीज (DR4) में लाखों तारा युग्मों की पहचान की है, जिससे आकाशगंगा के रासायनिक मानचित्रण में मदद मिली है।
  • तारकीय संरचना का अंशांकन: ये तारे कम द्रव्यमान वाले तारों के द्रव्यमान-त्रिज्या संबंध को सटीक बनाने में मदद करते हैं। यह बाइनरी प्रणालियों में द्रव्यमान हस्तांतरण और तारों के जीवन चक्र को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • जीवन की संभावना: सोलर ट्विन्स के पास रहने योग्य क्षेत्रों (Habitable Zones) की पहचान करना खगोलविदों की प्राथमिकता है, क्योंकि उनके पास पृथ्वी जैसा वातावरण होने की संभावना अधिक होती है।

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