Technology Development Fund Scheme

संदर्भ:
भारत ने रक्षा आत्मनिर्भरता को गति देने के लिए हाल के वर्षों में स्वदेशी अनुसंधान पर विशेष ध्यान दिया है। इसी दिशा में DRDO ने प्रौद्योगिकी विकास कोष (Technology Development Fund—TDF) योजना के तहत विकसित 7 प्रमुख रक्षा तकनीकें तीनों सेनाओं को सौंपी। यह एक बड़ी उपलब्धि है, जो भारत में उच्च-प्रौद्योगिकी सैन्य नवाचार के सुदृढ़ होते आधार को दर्शाती है।
DRDO द्वारा हस्तांतरित 7 स्वदेशी तकनीकें:
-
उच्च-वोल्टेज पावर सप्लाई प्रणाली (HVPSS) – वायुसेना हेतु: यह तकनीक एयरबोर्न सेल्फ-प्रोटेक्शन जैमर को शक्ति प्रदान करती है। यह तकनीक लड़ाकू विमानों को रेडार-निर्देशित खतरों से सुरक्षित रखती है। यह भविष्य में स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली के विकास को मजबूती देती है।
-
टाइड-एफ़िशिएंट गैंगवे – नौसेना हेतु: यह स्वदेशी गैंगवे उच्च ज्वारीय क्षेत्रों में जहाज और जेटी के बीच सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करता है। नौसेना के लिए यह तकनीक सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स दोनों को बेहतर बनाती है।
-
उन्नत VLF–HF स्विचिंग मैट्रिक्स प्रणाली: यह तकनीक नौसेना के प्लेटफार्मों पर संचार मार्गों को कुशलता से बदलने की क्षमता देती है। यह लंबी दूरी के समुद्री संचार को अधिक प्रभावी बनाती है।
-
VLF लूप एरियल – पनडुब्बियों हेतु: यह स्वदेशी एरियल प्रणाली पनडुब्बियों को बहुत निम्न आवृत्ति (VLF) पर लॉन्ग-रेंज अंडरवॉटर कम्युनिकेशन की सुविधा देती है। यह तकनीक समुद्र के भीतर छुपी पनडुब्बियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
-
स्वदेशी वॉटरजेट प्रपल्शन प्रणाली – तटरक्षक व नौसेना हेतु: यह तकनीक फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट को उच्च गति और बेहतर संचालन क्षमता देती है। इससे तटीय सुरक्षा, एंटी-स्मगलिंग ऑपरेशन, और समुद्री निगरानी को बढ़ावा मिलता है।
-
प्रयुक्त लिथियम-आयन बैटरियों से लिथियम पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया: यह प्रक्रिया भारत की रणनीतिक खनिज सुरक्षा, ऊर्जा भंडारण क्षमता, और सतत तकनीक को मजबूत करती है। लिथियम की वैश्विक कमी और आयात निर्भरता को देखते हुए यह नवाचार अत्यंत महत्वपूर्ण है।
-
दीर्घायु समुद्री जल बैटरी प्रणाली: यह प्रणाली अंडरवॉटर सर्विलांस, टोही उपकरणों और समुद्री सेंसरों को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करती है। यह स्वदेशी बैटरी प्रणाली भारत को समुद्री डोमेन जागरूकता में सक्षम बनाती है।
प्रौद्योगिकी विकास कोष (TDF) क्या है?
- टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TDF) योजना एक संचालित एक पहल है, जिसे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा संचालित किया जाता है।
- TDF योजना का संचालन रक्षा मंत्रालय द्वारा किया जाता है और इसे DRDO क्रियान्वित करता है। यह योजना 2016 में शुरू हुई थी।
- इसका उद्देश्य भारत में रक्षा क्षेत्र में मूलभूत नवाचार, स्वदेशी तकनीक, और उद्योग–शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
योजना की प्रमुख विशेषताएँ:
- TDF उद्योगों, विशेषकर MSME और स्टार्टअप, को ऐसे रक्षा उत्पाद विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करती है जो वर्तमान में भारत में उपलब्ध नहीं हैं। परियोजनाओं के लिए 50 करोड़ रुपये तक की लागत पर 90% तक अनुदान दिया जाता है।
योजना की संरचना:
- भागीदारी: भारतीय निजी/सार्वजनिक उद्योग, MSME, स्टार्टअप
- विदेशी निवेश सीमा: 49% से कम
- वित्तीय सहायता: प्रोटोटाइप विकास के लिए 90% तक अनुदान
- परियोजना अवधि: अधिकतम 4 वर्ष
- गहन-प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने हेतु 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कोष स्वीकृत
अब तक की उपलब्धियाँ:
- 2016 के बाद से 78 से अधिक परियोजनाएँ स्वीकृत हुई हैं जिनमें ग्रीन प्रपल्शन,एआई आधारित इंजन हेल्थ मॉनिटरिंग, ड्रोन और वाहन सिम्युलेटर जैसी उच्च-स्तरीय तकनीकें शामिल हैं।
योजना का महत्व:
-
आत्मनिर्भरता: TDF रक्षा क्षेत्र में बाहरी निर्भरता को कम करती है और IDDM श्रेणी के तहत उद्योगों को सरकार को सीधे उत्पाद बेचने का अवसर देती है।
-
नवाचार: DRDO उद्योगों को तकनीकी मार्गदर्शन, IPR साझेदारी, और बाज़ार पहुंच प्रदान करता है। इससे रक्षा स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत होता है।
