Thai Poosam sacred festival of the Tamil community

संदर्भ :
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाई पूसम (Thai Poosam) के पावन अवसर पर देशवासियों, विशेषकर तमिल समुदाय को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
थाई पूसम के बारे में:
- थाई पूसम मुख्य रूप से दक्षिण भारत (विशेषकर तमिलनाडु) और दुनिया भर के तमिल प्रवासियों द्वारा मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिंदू त्योहार है।
- यह पर्व भगवान मुरुगन (भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र, जिन्हें कार्तिकेय या सुब्रमण्यम भी कहा जाता है) को समर्पित है।
- यह त्योहार तमिल महीने ‘थाई’ (जनवरी-फरवरी) की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
- इस दिन ‘पूयम’ (Pushya) नक्षत्र अपनी उच्चतम स्थिति में होता है, जिसे तमिल में ‘पूसम’ कहा जाता है।
पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व:
- विजय का प्रतीक: मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती ने भगवान मुरुगन को ‘वेल’ (Vel – एक दिव्य भाला) प्रदान किया था ताकि वे असुर तारकासुर और सूरपद्मन का वध कर सकें। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
- नटराज का नृत्य: कुछ मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने चिदंबरम में अपना दिव्य ‘आनंद तांडव’ नृत्य ऋषियों और देवताओं के समक्ष प्रस्तुत किया था।
मुख्य रस्में और परंपराएं:
- कावड़ी अट्टम (Kavadi Attam): श्रद्धालु अपने कंधों पर एक लकड़ी की संरचना (कावड़ी) लेकर चलते हैं, जो फूलों और मयूर पंखों से सजी होती है। यह भगवान मुरुगन के प्रति समर्पण और कृतज्ञता का भाव है।
- पदयात्रा: हजारों श्रद्धालु नंगे पैर लंबी दूरी तय कर मुरुगन मंदिरों (विशेषकर पलानी हिल्स) तक पहुँचते हैं।
भौगोलिक विस्तार:
- भारत: तमिलनाडु, केरल (जहाँ इसे थाईपूयम कहा जाता है) और पुडुचेरी।
- विदेश: मलेशिया (बटू गुफाएं/Batu Caves), सिंगापुर, श्रीलंका, मॉरीशस, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका। मलेशिया और सिंगापुर जैसे देशों में यह एक सार्वजनिक अवकाश होता है।
