Thailand–Cambodia border conflict

संदर्भ:
हाल ही में दिसंबर 2025 में थाईलैंड और कंबोडिया के बीच दशकों पुराने सीमा विवाद ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया। सीमा पर तोपों, रॉकेटों और हवाई हमलों के कारण हालात बिगड़ गए हैं, जिससे प्रभावित होकर दोनों देशों के लाखों लोग अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हुए।
थाईलैंड–कंबोडिया सीमा संघर्ष क्या हैं?
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कानूनी विवाद: दोनों देशों का यह विवाद 20वीं सदी की शुरुआत में बने उन नक्शों से उपजा जिन्हें फ्रांसीसी उपनिवेश प्रशासन ने तैयार किया था। थाईलैंड का मानना है कि ये नक्शे त्रुटिपूर्ण हैं, जबकि कंबोडिया इन्हें वैध मानता है।
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1962 का अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) निर्णय: 15 जून 1962 को ICJ ने इस नक्शे को आधार मानकर दोनों देशों की सीमा पर स्थित ऐतिहासिक प्रेह विहार (Preah Vihear) मंदिर को कंबोडिया का अधिकार क्षेत्र माना। थाईलैंड ने मंदिर पर अपना दावा किया, किंतु अदालत ने आसपास की भूमि की स्पष्ट सीमांकन नहीं किया, जिससे कानूनी अस्पष्टता बनी रही।
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UNESCO विरासत सूची (2008): 2008 में कंबोडिया ने इस मंदिर को यूनेस्को विश्व विरासत में दर्ज कराया। थाईलैंड ने इसे सीमा क्षेत्र पर दावा मजबूत करने की रणनीति माना, जिससे तनाव पुनः बढ़ गया।
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ICJ पुनः-पुष्टि (2013): 2013 में ICJ ने मंदिर तथा उसके आस-पास के समीपवर्ती क्षेत्र पर कंबोडिया की संप्रभुता को पुनः मान्यता दी, लेकिन विस्तृत सीमा निर्धारण का मुद्दा फिर भी अधूरा रह गया।
वर्ष 2025 सीमा संघर्ष:
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मई 2025 में विवादित एमराल्ड ट्रायंगल क्षेत्र में दोनों देशों के बीच संघर्ष शुरू हुआ। इस संघर्ष में एक कंबोडियाई सैनिक की मौत हो गई, जिसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर उकसावे और घुसपैठ के आरोप लगाए।
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जुलाई 2025 में एक लैंडमाइन विस्फोट में पांच थाई सैनिक घायल हुए। थाईलैंड ने नए लगाए गए कंबोडियाई बारूदी सुरंगों को जिम्मेदार बताया. इसके बाद पाँच दिन तक भारी संघर्ष चला जिसमें थाई F-16 हवाई हमले, कंबोडियाई तोपखाने का उपयोग हुआ। इस संघर्ष में कम से कम 48 लोगों की मृत्यु और 3 लाख से अधिक लोगों का विस्थापन हुआ।
- उसी महीने कुआलालंपुर में मलेशिया और अमेरिका की मध्यस्थता से “बिना शर्त युद्धविराम” पर सहमति बनी। हालांकि, यह समझौता अस्थिर साबित हुआ और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगाया।
- दिसंबर 2025 में संघर्ष फिर से भड़क उठा, थाईलैंड ने कंबोडिया पर हवाई हमले किए। जिसके बाद दोनों देशों के अब तक संघर्ष जारी है। जिसके चलते हजारों नागरिकों को अपने मूल स्थान से विस्थापित होना पड़ा।
भू-राजनीतिक निहितार्थ:
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राष्ट्रवाद और घरेलू राजनीति: दोनों देशों में सीमा विवाद का उपयोग राष्ट्रवादी समर्थन जुटाने में किया जाता रहा है। 2025 में थाई प्रधानमंत्री और एक पूर्व कंबोडियाई नेता के बीच लीक हुई फोन कॉल ने थाईलैंड में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ाई और प्रधानमंत्री को अस्थायी निलंबन का सामना करना पड़ा।
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अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता: थाईलैंड द्विपक्षीय वार्ता को प्राथमिकता देता है, जबकि कंबोडिया ASEAN, ICJ और बाहरी शक्तियों को शामिल करने का प्रयास करता है। अमेरिका और चीन दोनों ने तनाव कम करने पर जोर देते रहे हैं।
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ASEAN के लिए चुनौती: इस संघर्ष ने ASEAN की केंद्रीयता और शांति सहयोग संधि (Treaty of Amity and Cooperation) की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठाए। लगातार तनाव से क्षेत्रीय व्यापार, निवेश, भारत–म्यांमार–थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसे परियोजनाओं पर खतरा उत्पन्न हो रहा है।
