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1989 का तियानमेन स्क्वायर नरसंहार (Tiananmen Square Massacre of 1989) | UPSC Preparation

Tiananmen Square Massacre of 1989

सामान्य अध्ययन पेपर II: भारत और इसके पड़ोसी 

 
(Tiananmen Square Massacre of 1989) चर्चा में क्यों? 

हाल ही मे, वर्ष 1989 में चीन के तियानमेन आंदोलन में हुए नरसंहार की 36वीं वर्षगांठ पर अमेरिका के विदेश मंत्री और ताइवान के राष्ट्रपति ने बयान देकर इस ऐतिहासिक घटना को याद किया। यह वहीं घटना है जिसे आज भी चीनी सरकार घरेलू स्तर पर दबाने की कोशिश करती है।

तियानमेन स्क्वायर आंदोलन क्या था?

  • परिचय:
      • अप्रैल 1989 में चीन के थ्येनआनमन चौक (तियानमेन स्क्वायर) पर लगभग दस लाख से अधिक लोग चीनी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए थे। 
      • यह विरोध प्रदर्शन चीन के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक जनाक्रोश माना जाता है। 
      • यह विरोध प्रदर्शन करीब डेढ़ महीने तक जारी रहा और चीन के कई प्रमुख शहरों तथा विश्वविद्यालयों तक फैल गया। 
      • इस आंदोलन का मुख्य केंद्र थ्येनआनमन चौक था, जो छात्रों के नेतृत्व में आयोजित किया गया था।
  • कारण
      • चीन में आर्थिक सुधार के बाद राजनीतिक बदलाव की मांग जोर पकड़ने लगी थी। 
      • बढ़ती महंगाई, कम वेतन, और सरकारी भ्रष्टाचार से लोग बेहद असंतुष्ट थे। 
      • चीन की सत्तावादी और तानाशाही सरकार के खिलाफ व्यापक असंतोष और नाराजगी फैल चुकी थी। 
      • लोग अपने मूलभूत अधिकारों, जैसे स्वतंत्रता, लोकतंत्र, और मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाने लगे। 
  • उद्देश्य:
      • इस आंदोलन का मूल उद्देश्य चीन में लोकतांत्रिक सुधारों को लागू कराना था।
      • प्रदर्शनकारियों ने समाज में समानता, स्वतंत्र मीडिया, और बोलने की आज़ादी की मांग की।
      • वे चाहते थे कि चीन की सरकार जिम्मेदार और पारदर्शी हो और कम्युनिस्ट नेतृत्व इस्तीफा दे।
      • प्रदर्शनकारी चाहते थे कि देश में लोकतांत्रिक शासन स्थापित हो, जिससे हर नागरिक की आवाज़ सुनी जा सके। 
  • परिणाम:
    • यह विरोध 15 अप्रैल से 4 जून 1989 तक चला, और अंत में सरकार ने सैनिक बलों का प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों पर कड़ी कार्रवाई की।
    • सेना ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बलप्रयोग किया, जिसके कारण कई लोग मारे गए और हजारों को गिरफ्तार किया गया।
    • सरकार ने इस घटना को दबाने के लिए कड़े कदम उठाए और मीडिया को इसे छुपाने को कहा।
    • तियानमेन नरसंहार आज भी एक क्रूर दमन का प्रतीक बना हुआ है, जिसे विश्व समुदाय ने कभी नहीं भुलाया।

तियानमेन स्क्वायर नरसंहार का सम्पूर्ण घटना क्रम

  • 17 अप्रैल 1989 को थ्येनआनमन चौक में हजारों छात्र और नागरिक जमा हुए। यह सभा चीन के प्रमुख सुधारक और भ्रष्टाचार-विरोधी नेता हू याओबांग के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए आयोजित की गई थी। इस अवसर पर लोगों का आक्रोश सरकार के प्रति जाग उठा, जो बाद में बड़े विरोध प्रदर्शन का रूप ले गया।
  • 18 से 21 अप्रैल के बीच प्रदर्शनकारियों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। इस दौरान प्रदर्शन का स्वरूप बदल गया। 
    • प्रदर्शन तानाशाही शासन समाप्त करने तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता की मांग में बदल गया। 
  • 27 अप्रैल को लगभग एक लाख छात्रों ने पुलिस द्वारा बनाए गए किलेबंदी को तोड़ते हुए थ्येनआनमन चौक की ओर मार्च शुरू किया। 
  • 15 मई को सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव चीन की राज्य यात्रा पर आए। चीन सरकार को विरोध प्रदर्शनों के चलते उनका सार्वजनिक स्वागत रद्द करना पड़ा। 
  • 19 मई को कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव झाओ जियांग ने कुछ हद तक विरोधकारियों का समर्थन करते हुए पुलिस बल के इस्तेमाल को रोकने का निर्देश दिया। 
  • लेकिन 20 से 24 मई के बीच चीन के शीर्ष नेता देंग श्याओपिंग ने मार्शल लॉ लागू किया और सेना को भीड़ को नियंत्रित करने का आदेश दिया।
    • छात्रों ने सड़क पर बैरिकेड्स बनाकर सैनिकों को रोकने की कोशिश की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। 
  • 29 और 30 मई को, थ्येनआनमन गेट के पास, माओत्से तुंग के चित्र के सामने, “गॉडेस ऑफ डेमोक्रेसी” नामक एक विशाल प्रतिमा स्थापित की गई। 
  • 2 जून को लगभग 10,000 सैनिकों ने ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल और पास की इमारतों में तैनात होना शुरू कर दिया।
  • 3 जून तक बीजिंग में लगभग दो लाख सैनिक तैनात किए गए। इस दौरान मक्सीडी अपार्टमेंट के पास 36 प्रदर्शनकारी मारे गए। इसमें सेना ने हिंसक रूप से आंदोलनकारियों पर गोली चलाई।
  • 4 जून की सुबह सेना की टुकड़ियां थ्येनआनमन चौक में घुस गईं। उन्होंने “गॉडेस ऑफ डेमोक्रेसी” की प्रतिमा को टैंक से नष्ट कर दिया। जब छात्र और प्रदर्शनकारी इसका विरोध करने लगे, तो सैनिकों ने गोलियां चलानी शुरू कर दीं। जिसमें अनगिनत प्रदर्शनकारियों की मौत हो गईं।

विशेष: 5 जून को, चांगान एवेन्यू पर एक अकेला व्यक्ति टैंकों के सामने खड़ा हो गया, जिसे ‘टैंक मैन’ के नाम से जाना जाता है। बाद में टाइम पत्रिका ने ‘टैंक मैन’ को 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली सौ लोगों में शामिल किया।

तियानमेन स्क्वायर आंदोलन के दूरगामी प्रभाव

  • राजनीतिक बदलाव: इस आंदोलन के बाद पार्टी के भीतर महत्वपूर्ण बदलाव हुए। झाओ जियांग को पार्टी के महासचिव और पोलित ब्यूरो से हटाया गया, जबकि देंग श्याओपिंग ने जियांग ज़ेमिन को चीन का सर्वोच्च नेता बना दिया। यह बदलाव चीन के राजनीतिक परिदृश्य में नए युग की शुरुआत था।
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध: तियानमेन नरसंहार के बाद पश्चिमी देशों ने चीन पर कई प्रतिबंध लगाए। अमेरिका सहित यूरोपीय संघ ने चीन पर आर्थिक प्रतिबंध और हथियार निर्यात पर रोक लगाई। 
  • अमेरिका ने तत्काल सैन्य बिक्री और उच्चस्तरीय राजनयिक संवाद को निलंबित कर दिया। 
  • इसके अलावा ‘ऑपरेशन येलोबर्ड’ नामक योजना शुरू की गई, जिसका उद्देश्य चीन से भागे हुए प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा प्रदान करना था।
  • राष्ट्रीयता का उत्थान: 1989 के बाद चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने अपने मूलधारावादी कम्युनिस्ट सिद्धांतों से दूरी बना ली और अपनी वैधता को राष्ट्रीय गर्व से जोड़ने लगी। इस रणनीति ने जनता का ध्यान लोकतंत्र की मांग से हटाकर चीन की राष्ट्रीय एकता और गौरव की भावना की ओर मोड़ा। बुद्धिजीवियों में संरक्षणवादी सांस्कृतिक राजनीति को अधिक बल मिला।
  • आर्थिक प्रभाव: तियानमेन आंदोलन के बाद कई वैश्विक विश्लेषकों ने चीन के आर्थिक भविष्य को लेकर निराशा जताई। इस कड़े दमन के कारण चीन का विश्व व्यापार संगठन (WTO) में प्रवेश 12 वर्ष तक विलंबित रहा। चीन को मिलने वाली द्विपक्षीय सहायता में भी भारी गिरावट आई।
  • सामाजिक प्रभाव: तियानमेन स्क्वायर की घटना ने हांगकांग में लोगों के मन में चिंता पैदा कर दी। वे डरने लगे कि चीन अपनी वादा की हुई ‘एक देश, दो प्रणाली’ नीति को पूरा नहीं करेगा। इस वजह से हांगकांग के गवर्नर क्रिस पैटन ने वहां की सरकार में लोगों को वोट देने का अधिकार बढ़ाने की कोशिश की। इससे बीजिंग और हांगकांग के बीच मतभेद बढ़ गए। 

चीन द्वारा तियानमेन स्क्वायर नरसंहार की घटना को भुलाने के लिए किए गए प्रयास

  • 2023 में फ्रीडम हाउस की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2014 से अब तक दर्ज किए गए अंतरराष्ट्रीय स्तर के लगभग 30% भौतिक दमन के मामलों के लिए चीन जिम्मेदार रहा है। चीन ने न केवल देश के भीतर बल्कि विदेशों में भी विरोध प्रदर्शन और असहमति को दबाने की नीतियां अपनाई हैं।
    • रिपोर्ट के अनुसार चीन में रह रहे विरोध करने वाले प्रदर्शनकारी के परिवारों के खिलाफ ‘सामूहिक दंड’ की सजा के कारण कई लोग अपने परिजनों से भी संपर्क तोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं।
  • इसमें आर्टिकल 19 के अनुसार चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सी.सी.पी.) के समर्थक और एजेंट दुनियाभर में ऐसे कार्यक्रमों को रोकने का प्रयास कर रहे हैं, जो तियानमेन चौक की घटना पर केंद्रित हो। 
  • 2022 में डेनिश कलाकार जेन्स गैल्शिएट द्वारा बनाई गई “पिलर ऑफ़ शेम” प्रतिमा की प्रतिकृति ताइपे में तोड़ दी गई। 
    • यह प्रतिमा 4 जून 1989 को हुई त्रासदी में मारे गए लोगों की याद में बनाई गई थी। मूल प्रतिमा 23 वर्षों तक हांगकांग विश्वविद्यालय में लगी रही, लेकिन 2021 में विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने इसे हटा दिया।
  • लंबे समय तक हांगकांग और मकाऊ में तियानमेन चौक की घटना को याद किया जाता रहा है, लेकिन 2019 में हांगकांग में लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शनों के बाद, वहां के नागरिक स्वतंत्रता पर कड़ी कार्रवाई हुई। इसके परिणामस्वरूप विक्टोरिया पार्क में 4 जून के वार्षिक जागरण पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
  • पिछले तीन सालों से, 4 जून की वर्षगांठ पर चीनी सरकार उस स्थान पर खाद्य कार्निवल आयोजित कराकर विरोध के माहौल को बदलने की कोशिश कर रही है।

 

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