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लाइकेन मोथ की दो नई प्रजातियों की खोज (Two new species of lichen moth discovered) | Apni Pathshala

Two new species of lichen moth discovered

Two new species of lichen moth discovered

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के वैज्ञानिकों ने पूर्वी हिमालय में ‘कौलोसेरा होलोवेई’ (Caulocera hollowayi) और ‘असुरा बुक्सा’ (Asura buxa) नामक लाइकेन मोथ की दो नई प्रजातियों की खोज की।

नई प्रजातियों का विवरण:

  1. कौलोसेरा हॉलोवेई (Caulocera hollowayi):
    • स्थान: इसके नमूने सिक्किम के गोलितार (Golitar) क्षेत्र से एकत्र किए गए थे।
    • नामकरण: इसका नाम प्रसिद्ध लेपिडोप्टेरिस्ट (Lepidopterist) दिवंगत डॉ. जेरेमी डी. हॉलोवे के सम्मान में रखा गया है।
    • विशेषता: इसे इसके पंखों के अनूठे रंग पैटर्न, बैंड मार्किंग और विशिष्ट प्रजनन अंगों की सूक्ष्म संरचना के माध्यम से पहचाना गया।
  2. असुरा बुक्सा (Asura buxa):
    • स्थान: इसकी खोज पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में स्थित पनीझोरा (Panijhora) क्षेत्र से की गई है, जो बुक्सा टाइगर रिजर्व के पास स्थित है।
    • नामकरण: इसका नाम ‘बुक्सा’ क्षेत्र के नाम पर रखा गया है जहाँ इसे खोजा गया था।
    • विशेषता: इसके पंखों पर विशिष्ट रंगीन बैंड और ‘केटोटैक्सी’ (chaetotaxy) — यानी शरीर पर ब्रिसल्स और स्केल की व्यवस्था — इसे अन्य प्रजातियों से अलग बनाती है। 
विशेष: इस अध्ययन में इन दो नई प्रजातियों के साथ-साथ लाइकेन मोथ की 7 अन्य प्रजातियों को भी पहली बार भारत में दर्ज किया गया है। ये मोथ लेपिडोप्टेरा (Lepidoptera) ऑर्डर के अंतर्गत आते हैं। भारत में मोथ की लगभग 12,000 प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

पारिस्थितिक महत्व:

  • वायु गुणवत्ता के संकेतक: इन मोथ के कैटरपिलर मुख्य रूप से लाइकेन (Lichens) खाते हैं। लाइकेन वायु प्रदूषण, विशेष रूप से सल्फर डाइऑक्साइड के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। यदि किसी क्षेत्र में वायु प्रदूषण बढ़ता है, तो लाइकेन नष्ट हो जाते हैं, जिससे इन मोथ की जनसंख्या भी प्रभावित होती है।
  • पारिस्थितिकी तंत्र का कार्य: मोथ परागण (pollination) और खाद्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसी खोजें वैज्ञानिकों को बदलते जलवायु परिवेश में पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य की निगरानी करने में मदद करती हैं। 
भारतीय प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण (Zoological Survey of India – ZSI):

  • परिचय: यह भारत के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक प्रमुख अनुसंधान संस्थान है। इसकी स्थापना 1 जुलाई 1916 को की गई थी और इसका मुख्यालय कोलकाता में स्थित है। यह संस्थान वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत वैज्ञानिक सलाह प्रदान करने वाली शीर्ष संस्था है।
  • कार्य: ZSI का प्राथमिक उत्तरदायित्व भारत की समृद्ध प्राणी विविधता का सर्वेक्षण, अन्वेषण और अनुसंधान करना है। यह वन्यजीवों के वर्गीकरण और उनके संरक्षण की स्थिति का दस्तावेजीकरण करता है।
  • क्षेत्रीय केंद्र: वर्तमान में पूरे भारत में इसके 16 क्षेत्रीय केंद्र कार्यरत हैं, जो विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों (जैसे मरुस्थल, तटीय क्षेत्र, और हिमालय) का अध्ययन करते हैं।
  • रेड डेटा बुक: ZSI भारत के लुप्तप्राय जानवरों की ‘रेड डेटा बुक’ (Red Data Book) प्रकाशित करता है, जो IUCN की तर्ज पर भारतीय प्रजातियों की स्थिति स्पष्ट करती है।
  • डिजिटल डेटाबेस: संस्थान ने ‘भारतीय प्राणी विज्ञान डेटाबेस’ विकसित किया है, जिसमें लाखों प्रजातियों के नमूने और उनके भौगोलिक वितरण की जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध है। 

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