ULFA-I leader Arunodai Dahotia surrenders in Arunachal
संदर्भ:
हाल ही में, यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम–इंडिपेंडेंट (ULFA-I) के वरिष्ठ नेता अरुणोदई दहोतिया ने अरुणाचल प्रदेश के भारत–म्यांमार सीमा क्षेत्र में आत्मसमर्पण किया, जो उत्तर-पूर्व में चल रही दशकों पुरानी उग्रवाद समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण मोड़ है।
अरुणोदई दहोतिया कौन हैं?
दहोतिया, जिन्हें अरुणोदई असम या बिजित गोगोई के नाम से भी जाना जाता है, 2002 में संगठन से जुड़े और बाद में वित्त सचिव बने। वह ULFA-I प्रमुख परेश बरुआ के विश्वसनीय सहयोगी माने जाते थे। पूर्वी असम में संगठनात्मक गतिविधियों और वित्तीय नेटवर्क के संचालन में दहोतिया की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। उन पर NIA द्वारा कई मामलों में आरोप तय किए गए, जिनमें 2018 में तिनसुकिया में पुलिस अधिकारी भास्कर कलिता की हत्या का मामला भी शामिल है।
ULFA-I क्या है?
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- परिचय: यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम–इंडिपेंडेंट (ULFA-I) असम का एक प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन है, जो राज्य से “स्वतंत्र असम” की मांग को हथियारबंद आंदोलन के माध्यम से आगे बढ़ाता है। इसके मूल संगठन ULFA की स्थापना 7 अप्रैल 1979 को हुई थी, परंतु 2011 के बाद यह दो समूहों में बँट गया— ULFA-Pro Talks Faction – वार्ता का पक्षधर और ULFA-Independent (ULFA-I) – हिंसक गतिविधियाँ जारी रखने वाला धड़ा।
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उत्पत्ति और पृष्ठभूमि: ULFA की उत्पत्ति 1970–80 के दशक के असम आंदोलन (Assam Agitation) की पृष्ठभूमि में हुई, जब अवैध प्रवासन, पहचान संकट और आर्थिक उपेक्षा प्रमुख मुद्दे थे। ULFA का घोषित उद्देश्य था— असम में “विदेशी उपनिवेशवाद” समाप्त करना और असम की प्राकृतिक संपदाओं पर स्थानीय लोगों के अधिकार स्थापित करना। परंतु समय के साथ संगठन ने हिंसक विद्रोही गतिविधियाँ, अपहरण, उगाही, हथियारबंद प्रशिक्षण और सीमापार संगठनों के साथ संपर्क बढ़ाया।
ULFA-I का गठन:
2011 में, ULFA के अधिकांश नेता भारत सरकार से शांति वार्ता करने लगे, परंतु मुख्य नेता परेश बरुआ इस निर्णय से अलग हो गए। इसके बाद उन्होंने संगठन के उस हिस्से को ULFA-Independent (ULFA-I) के रूप में घोषित किया। ULFA-I का ध्येय वाक्य अब भी “स्वतंत्र असम” की मांग पर आधारित है, और यह भारत सरकार को असम की संप्रभुता के लिए “औपनिवेशिक शक्ति” बताता है।
ULFA-I की नेतृत्व संरचना:
ULFA-I का नेतृत्व अत्यंत केंद्रीकृत है। इसके मुख्य नेता परेश बरुआ (Commander-in-Chief) – संगठन के सर्वोच्च निर्णयकर्ता है। डॉ. अभिजीत आसम – राजनीतिक विंग प्रमुख (सूचना आधारित) है और वित्त, उगाही और सीमा-पार गतिविधियों के लिए कई छोटे कमांडर नियुक्त किए गए हैं। ULFA-I का मुख्यालय और ठिकाने कई वर्षों से भारत–म्यांमार सीमा क्षेत्र और कभी-कभी चीन के युनान प्रांत के पास सक्रिय माने जाते हैं।
इस संगठन की गतिविधियाँ:
ULFA-I पर निम्नलिखित गतिविधियों का आरोप है—
- उगाही (Extortion), रिमोट-IED आधारित हमले, सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला, अपहरण और हत्या, सीमापार तस्करी नेटवर्क, हथियार लॉजिस्टिक्स का संचालन।
- ULFA-I की गतिविधियों का बड़ा हिस्सा निम्न क्षेत्रों से जुड़ा माना जाता है— म्यांमार का सागाइंग क्षेत्र, अरुणाचल प्रदेश की सीमा।
भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया:
भारत सरकार ने ULFA-I को गैर-कानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (UAPA) के तहत प्रतिबंधित कर रखा है। सुरक्षा एजेंसियों ने कई मोर्चों पर कार्रवाई की है—
- असम में व्यापक काउंटर-इंसर्जेंसी अभियान
- म्यांमार के साथ संयुक्त सीमा अभियान
- उगाही नेटवर्क पर प्रहार
- पुनर्वास नीति और सरेंडर पैकेज
- राजनीतिक संवाद को बढ़ावा
पिछले 10 वर्षों में ULFA-I की क्षमता उल्लेखनीय रूप से कम हुई है, और कई वरिष्ठ नेता आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
ULFA-I और शांति प्रक्रिया:
ULFA-Pro Talks धड़ा सरकार से वार्ता कर रहा है, परंतु ULFA-I वार्ता से बाहर है। असम सरकार ने साफ कहा है— शांति प्रक्रिया तभी आगे बढ़ेगी जब परेश बरुआ वार्ता में शामिल हों। हालिया आत्मसमर्पण (जैसे 2019 में दृष्टी राजखोवा, 2025 में अरुणोदई दहोतिया) बताते हैं कि संगठन का आंतरिक मनोबल टूट रहा है।

