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अमेरिका ने 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकलने की घोषणा की (US announces withdrawal from 66 international organizations) | Apni Pathshala

US announces withdrawal from 66 international organizations

US announces withdrawal from 66 international organizations

संदर्भ:

हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐतिहासिक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत अमेरिका 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपनी सदस्यता और फंडिंग वापस ले रहा है। 

  • यह निर्णय ट्रंप प्रशासन की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा है और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से स्थापित बहुपक्षीय वैश्विक व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। 

प्रमुख संगठनों की सूची:

ट्रंप के इस आदेश के तहत कुल 66 संगठनों को लक्षित किया गया है, जिन्हें दो प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है:

  • 31 संयुक्त राष्ट्र (UN) संस्थाएं: इनमें UN Women, UN Framework Convention on Climate Change (UNFCCC), UN Population Fund (UNFPA), और UN Democracy Fund शामिल हैं।
  • 35 गैर-यूएन (Non-UN) संगठन: इनमें भारत-फ्रांस द्वारा समर्थित इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC), और इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (IRENA) जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। 

निकासी के मुख्य कारण:

  • अमेरिकी संप्रभुता (Sovereignty): प्रशासन का मानना है कि ये संगठन ‘वैश्विक शासन’ (Global Governance) के नाम पर अमेरिकी स्वतंत्रता को सीमित करते हैं।
  • करदाताओं के धन की बर्बादी: इन संगठनों को ‘व्यर्थ’ और ‘अकुशल’ बताते हुए कहा गया कि अरबों डॉलर का निवेश अमेरिकी नागरिकों के हितों के विपरीत हो रहा है।
  • वैचारिक मतभेद: ट्रंप प्रशासन ने कई संगठनों पर ‘कट्टरपंथी जलवायु नीतियों’ और ‘जेंडर इक्विटी’ जैसी ‘प्रगतिशील विचारधारा’ (Woke Initiatives) को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।
  • अप्रभावी परिणाम: प्रशासन का तर्क है कि भारी फंडिंग के बावजूद ये संगठन ठोस परिणाम देने में विफल रहे हैं। 

प्रमुख संगठनों और समझौतों की सूची जिनसे अमेरिका पहले बाहर निकल चुका है:

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO): ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2020 में WHO से हटने की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसे बाद में जो बाइडन ने रोक दिया था। हालांकि, जनवरी 2025 में दोबारा राष्ट्रपति बनने के तुरंत बाद ट्रंप ने फिर से अमेरिका को WHO से बाहर निकालने के आदेश पर हस्ताक्षर किए।
  • UNESCO (यूनेस्को): अमेरिका ने अक्टूबर 2017 में यूनेस्को से हटने की घोषणा की थी, जो दिसंबर 2018 में प्रभावी हुई। जो बाइडन के कार्यकाल में अमेरिका इसमें फिर से शामिल हुआ, लेकिन जुलाई 2025 में ट्रंप प्रशासन ने एक बार फिर यूनेस्को से बाहर निकलने का फैसला किया।
  • संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC): जून 2018 में अमेरिका ने परिषद पर “इज़राइल के प्रति पूर्वाग्रह” का आरोप लगाते हुए इसकी सदस्यता छोड़ दी थी। 
  • पेरिस जलवायु समझौता (Paris Climate Agreement): ट्रंप ने 2017 में इस ऐतिहासिक समझौते से हटने का ऐलान किया था। 2025 में सत्ता में वापसी के पहले ही दिन उन्होंने फिर से पेरिस समझौते से हटने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए।
  • ईरान परमाणु समझौता (JCPOA): मई 2018 में अमेरिका इस बहुपक्षीय समझौते से अलग हो गया था, जिसे ओबामा प्रशासन के दौरान हस्ताक्षरित किया गया था।
  • ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप (TPP): 2017 में पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद ट्रंप ने अमेरिका को इस विशाल व्यापार समझौते से बाहर कर दिया था। 

भारत पर प्रभाव:

  • भारत के लिए सबसे चिंताजनक विषय इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) से अमेरिका का बाहर निकलना है। 
  • भारत और फ्रांस ने 2015 में पेरिस समझौते के दौरान इसकी शुरुआत की थी। अमेरिका की निकासी से इसकी वैश्विक फंडिंग और तकनीकी सहयोग पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
  • हालांकि ट्रंप और पीएम मोदी के निजी संबंध अच्छे माने जाते हैं, लेकिन व्यापारिक टैरिफ और बहुपक्षीय मंचों से पीछे हटने के अमेरिका के फैसले भारत की वैश्विक रणनीतियों के लिए चुनौती पेश कर सकते हैं।

वैश्विक प्रभाव:

  • चीन का बढ़ता दबदबा: विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के पीछे हटने से संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाओं में जो ‘शून्य’ पैदा होगा, उसे चीन अपने प्रभाव से पूरा कर सकता है।
  • जलवायु परिवर्तन पर संकट: UNFCCC से बाहर निकलना वैश्विक जलवायु प्रयासों के लिए एक गंभीर झटका है। अमेरिका अब दुनिया का इकलौता ऐसा देश बन गया है जो इस संधि का हिस्सा नहीं है।
  • मानवीय सहायता में कमी: UN Population Fund जैसे संगठनों से फंडिंग हटने से विकासशील देशों में स्वास्थ्य और मानवीय सेवाएं प्रभावित होंगी।
  • बहुपक्षवाद का अंत? यह कदम वैश्विक सहयोग के बजाय द्विपक्षीय (Bilateral) समझौतों की ओर एक बड़े झुकाव का संकेत है। 

विशेष: अमेरिका अभी भी UN Security Council, UNICEF और World Food Programme का सदस्य बना हुआ है क्योंकि ये अमेरिकी सुरक्षा हितों के लिए आवश्यक माने गए हैं।

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