US-Israeli joint military operation against Iran
संदर्भ:
हाल ही में इजरायल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया, जिसे अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) और इजरायल ने ‘रोअरिंग लायन’ (Roaring Lion) नाम दिया।
पृष्ठभूमि और घटनाक्रम:
- परमाणु संकट: इस हमले का मुख्य कारण ओमान और जिनेवा में परमाणु वार्ता की विफलता और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की वह रिपोर्ट थी, जिसमें ईरान द्वारा परमाणु हथियार के अत्यंत करीब पहुंचने का दावा किया गया था।
- नेतृत्व प्रहार: 28 फरवरी को हुए सटीक हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कई वरिष्ठ कमांडरों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
- हमले की प्रकृति: इजरायल के लगभग 200 लड़ाकू विमानों और अमेरिकी B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स ने तेहरान, इस्फ़हान और कोम जैसे शहरों में 500 से अधिक सैन्य और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया।
- ईरान की जवाबी कार्रवाई: ईरान ने इसके जवाब में इजरायल पर सैकड़ों मिसाइलें दागीं और खाड़ी देशों (कतर, बहरीन, यूएई, कुवैत) में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले किए।
- क्षेत्रीय विस्तार: ईरान समर्थित हिजबुल्लाह (लेबनान) और हूतियों (यमन) ने भी इजरायल और लाल सागर में जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं, जिससे यह युद्ध द्विपक्षीय न रहकर क्षेत्रीय बन गया है।
महत्वपूर्ण आयाम:
- पश्चिमी एशिया का बदलता समीकरण: खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान में सत्ता के संघर्ष और ‘अस्थायी नेतृत्व परिषद’ के गठन ने पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता पैदा कर दी है।
- वैश्विक ध्रुवीकरण: अमेरिका और उसके सहयोगियों (यूके, फ्रांस) ने इस कार्रवाई का समर्थन किया है, जबकि रूस और चीन ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए इसकी निंदा की है।
- ऊर्जा सुरक्षा: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की चेतावनी दी है, जहाँ से दुनिया का 20-25% कच्चा तेल गुजरता है। इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतें $80 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।
- व्यापार मार्ग: लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई है, जिससे माल ढुलाई और बीमा की लागत बढ़ गई है।
भारत के संदर्भ में:
- ऊर्जा निर्भरता: भारत अपनी तेल जरूरतों का 60% से अधिक हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। आपूर्ति में बाधा भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है।
- प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा: पश्चिम एशिया में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं। उनकी सुरक्षा और संभावित निकासी (जैसे ‘ऑपरेशन सिंधु’) भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
- रणनीतिक संतुलन: भारत के इजरायल (रक्षा और तकनीक) और ईरान (चाबहार पोर्ट और INSTC) दोनों के साथ गहरे हित जुड़े हैं।

