USA 50% Tariffs on Indian Exports and Its Implications
संदर्भ:
अमेरिका ने भारतीय सामान पर लगाए जाने वाले टैरिफ को 50% तक बढ़ा दिया है, जिससे आर्थिक विकास, विशेषकर वस्त्र और गहनों के क्षेत्र में चिंताएँ बढ़ गई हैं।
प्रभावित प्रमुख क्षेत्र:
- वस्त्र और परिधान (Textiles & Apparel)
- रत्न और आभूषण (Gems & Jewellery)
- झींगा (Shrimp)
- कालीन (Carpets)
- चमड़ा (Leather)
- फर्नीचर (Furniture)
ये सभी क्षेत्र श्रम-प्रधान (Labour-intensive) हैं और बड़ी संख्या में रोजगार (Jobs) उत्पन्न करते हैं।
जिन वस्तुओं को टैरिफ से छूट मिली
- दवाइयाँ (Pharmaceuticals)
- इलेक्ट्रॉनिक्स (Electronics)
- पेट्रोलियम उत्पाद (Petroleum Products)
भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
- व्यापार पर असर (Trade Impact):
- अमेरिका को भारत का निर्यात FY25 में 87 बिलियन डॉलर से घटकर FY26 में 49.6 बिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है, यानी 43% की गिरावट।
- अमेरिका भारत के कुल माल निर्यात (merchandise exports) का 20% और GDP का लगभग 2% हिस्सा है।
- घरेलू चिंताएँ और उद्योगों की माँग:
- रत्न एवं आभूषण परिषद (GJEPC): 25–50% तक के टैरिफ को कवर करने के लिए ड्यूटी ड्रॉबैक/रिइम्बर्समेंट योजना की माँग कर रहा है ताकि प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
- टेक्सटाइल उद्योग: तात्कालिक नकद सहायता, लोन मोरेटोरियम, और यूरोपियन यूनियन (EU) व अन्य साझेदारों के साथ FTAs को तेज़ी से लागू करने की माँग कर रहा है ताकि निर्यात बाज़ारों का विविधीकरण किया जा सके।
- रोजगार पर असर (Job Protection): उद्योगों को डर है कि श्रम–गहन (labour-intensive) निर्यात केंद्रों में बड़े पैमाने पर छँटनी हो सकती है — सूरत (हीरे), तिरुपुर (कपड़ा), आंध्र प्रदेश (झींगा पालन)।
- प्रतिस्पर्धियों को लाभ (Competitors Benefiting):
- वियतनाम, बांग्लादेश, कंबोडिया, पाकिस्तान और चीन जैसे देशों पर कम टैरिफ लग रहे हैं।
- इन देशों के भारत का खोया हुआ निर्यात बाज़ार कब्ज़ाने की संभावना अधिक है।
भारत की पहलें (India initiatives to mitigate the impact):
- ई–कॉमर्स एक्सपोर्ट हब्स (ECEHs): ऑनलाइन निर्यातकों के लिए एकीकृत लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और कस्टम क्लीयरेंस सुविधाएँ प्रदान करने का प्रस्ताव।
- उद्योग हितधारकों से परामर्श: MSMEs, वैश्विक ई-कॉमर्स कंपनियों और रिटेलर्स के साथ लगातार संवाद, ताकि नियामक सुधारों (regulatory reforms) में संतुलन बनाया जा सके।
- इन्वेंटरी–आधारित ई–कॉमर्स की संभावनाएँ: इस मॉडल से MSMEs के अनुपालन बोझ (compliance burden) को कम किया जा सकता है या नहीं, इस पर चर्चा जारी।
- टैरिफ वार्ता: वैश्विक संरक्षणवाद (global protectionism) के बावजूद भारत के संवेदनशील निर्यात क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए प्रयास।
भारत अमेरिका व्यापार: