Van Island in the Gulf of Mannar
संदर्भ:
तमिलनाडु के मन्नार की खाड़ी में कृत्रिम प्रवाल भित्तियों (Artificial Reefs) के माध्यम से वान द्वीप की बहाली से ₹61.67 करोड़ से अधिक के सामाजिक-पारिस्थितिकी लाभ प्राप्त हुए हैं। जिससे वान द्वीप समुद्री संरक्षण और जलवायु अनुकूलन का एक वैश्विक मॉडल बन कर उभर रहा है।
वान द्वीप के बारे में:
-
- स्थान: वान द्वीप तमिलनाडु के थूथुकुडी (Tuticorin) तट से लगभग 12 किमी दूर मन्नार की खाड़ी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान में स्थित है।
- वर्गीकरण: यह मन्नार की खाड़ी के 21 निर्जन द्वीपों में से एक है और थूथुकुडी द्वीप समूह का हिस्सा है।
- पारिस्थितिकी: यह क्षेत्र ‘मन्नार की खाड़ी बायोस्फीयर रिजर्व’ का मुख्य क्षेत्र है, जिसे अपनी समृद्ध समुद्री जैव विविधता के कारण “भारत का समुद्री जैव-पार्क” कहा जाता है।
- क्षेत्रफल में भारी गिरावट: 1969 में वान द्वीप का क्षेत्रफल लगभग 20.08 हेक्टेयर था, जो 2015 तक घटकर मात्र 1.53 हेक्टेयर (उच्च ज्वार के समय) रह गया।
- विनाश के कारण:
- प्रवाल खनन (Coral Mining): दशकों तक निर्माण कार्यों के लिए अवैध रूप से प्रवाल भित्तियों का खनन किया गया, जिससे द्वीप का प्राकृतिक सुरक्षा कवच (Breakwater) नष्ट हो गया।
- जलवायु परिवर्तन: समुद्र के बढ़ते स्तर और तीव्र लहरों ने द्वीप की मिट्टी का कटाव (Erosion) तेज कर दिया।
- रणनीति: द्वीप को बचाने के लिए तमिलनाडु वन विभाग ने IIT मद्रास और SDMRI के सहयोग से 2015 में एक अनूठी परियोजना शुरू की।
- तकनीकी डिजाइन: समुद्र के भीतर 10,600 कंक्रीट मॉड्यूल स्थापित किए गए। ये मॉड्यूल ‘त्रिकोणीय’ और ‘छिद्रित समलम्बाकार’ (Perforated Trapezoidal) आकार के हैं, जिन्हें विशेष रूप से लहरों की ऊर्जा कम करने के लिए डिजाइन किया गया है।
- परत संरचना: इन्हें द्वीप के चारों ओर परतों में व्यवस्थित किया गया है, जो लहरों को तट तक पहुँचने से पहले ही तोड़ देते हैं।
- प्रवाल प्रत्यारोपण (Transplantation): इन कंक्रीट संरचनाओं पर प्राकृतिक प्रवाल के छोटे टुकड़ों को कृत्रिम रूप से लगाया गया (Out-planting), जिससे वे तेजी से विकसित हो सकें।
- सफल परिणाम:
-
- द्वीप का विस्तार: नवीनतम निगरानी (Geomorphic Monitoring) के अनुसार, वान द्वीप का क्षेत्रफल अब बढ़कर 2.3 हेक्टेयर से अधिक हो गया है।
- जैव विविधता में वृद्धि: प्रत्येक कृत्रिम मॉड्यूल पर औसतन 81 प्रवाल कॉलोनियाँ विकसित हुई हैं। साथ ही, मछली का घनत्व 8 गुना बढ़ गया है, जिससे स्थानीय मछुआरों की आजीविका में सुधार हुआ है।
मन्नार की खाड़ी (Gulf of Mannar):
- परिचय: मन्नार की खाड़ी (Gulf of Mannar) भारत के दक्षिण-पूर्वी तट और श्रीलंका के बीच स्थित एक उथला समुद्री क्षेत्र है, जो अपनी अद्वितीय जैव विविधता के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
- संरक्षण की स्थिति: यह दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशिया का पहला समुद्री बायोस्फीयर रिजर्व है। इसमें ‘मन्नार की खाड़ी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान’ शामिल है, जिसमें 21 द्वीप और उनसे जुड़ी प्रवाल भित्तियाँ (Coral Reefs) स्थित हैं।
- जैव विविधता: यहाँ लुप्तप्राय डुगोंग (समुद्री गाय), समुद्री कछुए, प्रवाल की 117 प्रजातियाँ और समुद्री घास पाई जाती है। यह अपने ‘पर्ल फिशरी’ (मोती पालन) के लिए भी ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध है।
- पारिस्थितिक महत्व: यह क्षेत्र तटीय समुदायों के लिए ‘ब्लू इकोनॉमी’ का आधार है।

