White-bellied sea eagle
संदर्भ:
हाल ही में उत्तर केरल में सफेद पेट वाले समुद्री बाज (White-bellied Sea Eagle) के घोंसलों की संख्या में वृद्धि देखी गई है, जो तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
- फरवरी 2026 में संपन्न हुए वार्षिक घोंसला निगरानी सर्वेक्षण के अनुसार, केरल के कन्नूर और कासरगोड जिलों में सक्रिय घोंसलों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है, जो 2024 में 13 थी।
- कासरगोड में 10 और कन्नूर में 7 घोंसले दर्ज किए गए। विशेष रूप से, कन्नूर में 4 नए घोंसले पाए गए, जिनमें से एक पहली बार कट्टमपल्ली में एक टेलीफोन टावर के ऊपर देखा गया।
सफेद पेट वाले समुद्री बाज के बारे में:
- वैज्ञानिक नाम: Haliaeetus leucogaster
- परिवार: एक्रिपिट्रिडे (Accipitridae)
- पहचान: वयस्क बाज का सिर, छाती और पेट सफेद होता है, जबकि पंख और पीठ स्लेटी रंग के होते हैं।
- आकार: मादाएं नर से थोड़ी बड़ी होती हैं; लंबाई 66-90 सेमी और पंखों का फैलाव 1.8-2.3 मीटर तक होता है।
- पर्यावास: यह मुख्य रूप से समुद्र तटों, मुहानों, द्वीपों और तटीय जंगलों के पास रहता है। भारत में यह पश्चिमी और पूर्वी तटों के साथ-साथ अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पाया जाता है।
- प्रजनन: ये एकपत्नीक होते हैं, यानी जीवन भर एक ही साथी के साथ रहते हैं।
- व्यवहार: ये ऊँचे पेड़ों या चट्टानों पर बड़े घोंसले बनाते हैं, जिसे वे वर्षों तक इस्तेमाल करते हैं।
- सूचक प्रजाति: सफेद पेट वाला समुद्री बाज तटीय और समुद्री पर्यावरण के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। इनकी उपस्थिति एक समृद्ध समुद्री खाद्य श्रृंखला को दर्शाती है।
- शीर्ष शिकारी: यह तटीय पारिस्थितिकी तंत्र में एक शीर्ष शिकारी की भूमिका निभाता है, जो मुख्य रूप से समुद्री सांपों, मछलियों और केकड़ों को अपना भोजन बनाते है।
- संरक्षण स्थिति: IUCN रेड लिस्ट: कम चिंताजनक (Least Concern – LC)
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची-I (सर्वाधिक सुरक्षा प्रदान की गई)।
- केरल क्षेत्रीय रेड लिस्ट: इस प्रजाति को केरल में विशेष संरक्षण ध्यान देने की आवश्यकता वाली श्रेणी में रखा गया है।
संरक्षण संबंधी पहले:
- एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन परियोजना (ICZMP): विश्व बैंक के सहयोग से मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा संचालित इस परियोजना के तहत बाजों के शिकार क्षेत्रों को प्रदूषण मुक्त रखा जाता है।
- नेस्ट ट्री प्रोटेक्शन पॉलिसी: केरल वन विभाग के विशेष प्रोटोकॉल के तहत निजी भूमि पर भी यदि इस बाज का घोंसला है, तो उस पेड़ को काटने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है।

