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ब्लैक रेन को लेकर WHO की चेतावनी (WHO warns about black rain) | UPSC

WHO warns about black rain

WHO warns about black rain

संदर्भ:

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मार्च 2026 में ईरान में तेल सुविधाओं पर हमलों के बाद ‘ब्लैक रेन’ (काली बारिश) और गंभीर वायु प्रदूषण को लेकर आपातकालीन चेतावनी जारी की है, जो कार्बन उत्सर्जन के कारण हो रही है। 

WHO की मुख्य चेतावनियाँ और स्वास्थ्य जोखिम:

  • श्वसन संबंधी गंभीर खतरे: WHO ने चेतावनी दी है कि यह बारिश और इसके साथ आने वाली ‘अम्लीय वर्षा’ फेफड़ों के लिए अत्यंत खतरनाक है। हवा में मौजूद सूक्ष्म कालिख (soot) और जहरीले कण सांस के जरिए फेफड़ों में गहराई तक जा सकते हैं।
  • जहरीले रसायनों का मिश्रण: तेल डिपो में आग लगने से हवा में सल्फर ऑक्साइड, नाइट्रोजन यौगिक और हाइड्रोकार्बन (जैसे बेंजीन और टोलुइन) भारी मात्रा में घुल गए हैं, जो कैंसर का कारण बन सकते हैं।
  • त्वचा और आँखों में जलन: काली बारिश के संपर्क में आने से त्वचा पर रासायनिक जलन (Chemical Burns), आँखों में गंभीर जलन और सिरदर्द जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
  • सलाह: WHO ने ईरानी अधिकारियों की उस सलाह का समर्थन किया है जिसमें लोगों को घरों के अंदर रहने, खिड़कियां बंद रखने और बाहर निकलते समय मास्क व पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने को कहा गया है। 

ब्लैक रेन (Black Rain) क्या है?

सामान्यतः वर्षा की बूंदें पारदर्शी होती हैं, लेकिन जब वायुमंडल में अत्यधिक मात्रा में कालिख (Soot), कार्बन के कण, धूल और रासायनिक अपशिष्ट मौजूद होते हैं, तो बारिश की बूंदें गिरते समय इन कणों को अपने साथ मिला लेती हैं। इससे बारिश का रंग गहरा काला या मटमैला हो जाता है। 

  • वैज्ञानिक भाषा में इसे ‘एटमॉस्फेरिक स्कैवेंजिंग’ (Atmospheric Scavenging) कहा जाता है।
  • इतिहास में ‘ब्लैक रेन’ का सबसे बड़ा उदाहरण 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी परमाणु बम विस्फोटों के बाद देखा गया था, जहाँ रेडियोधर्मी राख ने बारिश को काला कर दिया था।

रासायनिक संरचना: 

वेब डेटा और शोध के अनुसार, इस काली बारिश में केवल पानी नहीं होता, बल्कि इसमें पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAHs), सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और भारी धातुएँ (जैसे सीसा और मरकरी) घुली होती हैं।

मुख्य कारण:

  • अपूर्ण दहन: जब लाखों टन कच्चा तेल या पेट्रोलियम उत्पाद जलते हैं, तो वे पूरी तरह नहीं जल पाते। इससे गाढ़ा काला धुआं निकलता है जिसमें सूक्ष्म कार्बन कण होते हैं।
  • तेल के कणों का मिश्रण: आग लगने से तेल की सूक्ष्म बूंदें (Oil droplets) और हाइड्रोकार्बन वाष्प बनकर हवा में मिल जाते हैं।
  • मौसम का प्रभाव: जब यह प्रदूषित धुआं बादलों के संपर्क में आता है या ऊपर से सामान्य बारिश होती है, तो यह जहरीला मिश्रण धरती पर ‘काले चिपचिपे तरल’ के रूप में गिरता है।

पर्यावरणीय प्रभाव:

  • मिट्टी की उर्वरता: यह मिट्टी के pH मान को बिगाड़ देती है, जिससे फसलें नष्ट हो जाती हैं और जमीन लंबे समय के लिए बंजर हो सकती है।
  • जल प्रदूषण: जब यह काला पानी नदियों और झीलों में मिलता है, तो जल प्रदूषण चरम पर पहुँच जाता है, जिससे जलीय जीव (मछलियाँ आदि) तुरंत मरने लगते हैं।
  • वनस्पति का विनाश: पत्तियों पर तेल और कालिख की परत जमने से ‘प्रकाश संश्लेषण’ (Photosynthesis) की प्रक्रिया रुक जाती है, जिससे पेड़ सूखने लगते हैं।

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