World first mountain ice core repository inaugurated in Antarctica
संदर्भ:
हाल ही में अंटार्कटिका के उच्च पठार पर स्थित कन्कॉर्डिया रिसर्च स्टेशन (Concordia Research Station) में दुनिया के पहले ‘माउंटेन आइस कोर रिपॉजिटरी’ (पर्वतीय हिम-कोर भंडार) का उद्घाटन किया गया।
माउंटेन आइस कोर रिपॉजिटरी के बारे में:
- परिचय: माउंटेन आइस कोर रिपॉजिटरी (Mountain Ice Core Repository) ग्लेशियरों के भीतर से निकाली गई बर्फ की बेलनाकार छड़ों (आइस कोर) को सुरक्षित रखने वाला दुनिया का पहला ‘ग्लोबल बैंक’ है।
- उद्देश्य: ग्लोबल वार्मिंग के कारण पिघल रहे ग्लेशियरों के वैज्ञानिक डेटा को नष्ट होने से बचाना ताकि भविष्य की पीढ़ियां जलवायु परिवर्तन का अध्ययन कर सकें।
- स्थिति: इसे अंटार्कटिका के कन्कॉर्डिया रिसर्च स्टेशन में डोम सी (Dome C) में बर्फ के नीचे एक गुफा में बनाया गया है। यह पहल ‘आइस मेमोरी फाउंडेशन’ द्वारा संचालित है।
- टाइम कैप्सूल: यह दुनिया भर के पहाड़ों (जैसे आल्प्स, एंडीज, हिमालय) की प्राचीन बर्फ का एक संग्रह है, जो हजारों साल पुराने वायुमंडलीय इतिहास को खुद में समेटे हुए है।
- प्रथम नमूने (Initial Samples): इस भंडार में सबसे पहले फ्रांस के मोंट ब्लांक (Mont Blanc) और स्विट्जरलैंड के ग्रैंड कॉम्बिन (Grand Combin) ग्लेशियरों से निकाले गए लगभग 1.7 टन वजन के हिम-कोर रखे गए हैं।
- प्राकृतिक शीतलन: इस गुफा में तापमान प्राकृतिक रूप से -50°C से -52°C के बीच स्थिर रहता है। इसे ठंडा रखने के लिए किसी कृत्रिम ऊर्जा या बिजली की आवश्यकता नहीं है।
- तापमान का रिकॉर्ड: बर्फ के अणुओं में मौजूद ऑक्सीजन आइसोटोप्स के विश्लेषण से वैज्ञानिक हजारों साल पहले के तापमान का सटीक अनुमान लगा सकते हैं।
प्रासंगिकता:
- जलवायु परिवर्तन और क्रायोस्फीयर: संयुक्त राष्ट्र ने 2025-2034 को ‘UN Decade of Action for Cryospheric Sciences’ घोषित किया है। यह भंडार इस दशक की एक प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धि है।
- अंटार्कटिक संधि प्रणाली: यह रिपॉजिटरी अंटार्कटिक संधि और मैड्रिड प्रोटोकॉल के कड़े पर्यावरणीय मानकों के तहत बनाई गई है। यह अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
- भारत का परिप्रेक्ष्य: भारत के पास हिमालय के रूप में ‘तीसरा ध्रुव’ (Third Pole) है। हिमालयी ग्लेशियरों का डेटा भी भविष्य में इस भंडार का हिस्सा बन सकता है। भारत के अपने अंटार्कटिक मिशन (मैत्री, भारती) और आर्कटिक मिशन (हिमाद्रि) इस वैश्विक वैज्ञानिक परिदृश्य में भारत की भूमिका को रेखांकित करते हैं।

