India-South Africa Maritime Partnership
India-South Africa Maritime Partnership –
संदर्भ:
भारत और दक्षिण अफ्रीका ने जोहान्सबर्ग में 9वीं संयुक्त रक्षा समिति की बैठक के दौरान पनडुब्बी सहयोग से जुड़े दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। यह घटनाक्रम हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को और गहराने की दिशा में एक अहम कदम है।
प्रमुख समझौतों की विशेषताएँ:
- समझौते का पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं है, लेकिन ये समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने की मंशा दर्शाते हैं।
- ये सहयोग भारत के ‘ब्लू-वॉटर नेवी’ (Blue-Water Navy) दृष्टिकोण को सुदृढ़ करेगा, जिससे हिंद और अटलांटिक महासागर दोनों में उसकी पहुंच मजबूत होगी।
भारत–दक्षिण अफ्रीका सहयोग का रणनीतिक महत्व:
- नीली जल–नीति सहयोग (Blue-Water Collaboration): दक्षिण अफ्रीका के साथ साझेदारी भारत की समुद्री रणनीति को विस्तृत बनाती है।
- समग्र समुद्री सुरक्षा: समझौते सिर्फ पनडुब्बी बचाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रशिक्षण, निगरानी और संयुक्त अनुसंधान एवं विकास तक विस्तारित हैं।
- रक्षा उत्पादन: भारत की रक्षा निर्माण क्षमताएं दक्षिण अफ्रीका की नौसेना आधुनिकीकरण की जरूरतों से मेल खाती हैं।
- ऐतिहासिक–राजनयिक निकटता: दोनों देश उपनिवेशवाद और रंगभेद के खिलाफ साझा संघर्ष से जुड़े रहे हैं, जो रक्षा सहयोग को और गहराता है।
भारत–दक्षिण अफ्रीका द्विपक्षीय संबंध:
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत ने 1946 में रंगभेदी शासन से व्यापारिक संबंध तोड़े थे; 1993 में औपचारिक राजनयिक संबंध बहाल हुए।
- रणनीतिक साझेदारी: 1997 के ‘लाल किला घोषणा पत्र’ ने द्विपक्षीय रणनीतिक भागीदारी को आधार प्रदान किया।
- रक्षा सहयोग: 1996 से रक्षा साझेदारी सक्रिय है।
- IBSAMAR (भारत-ब्राज़ील-दक्षिण अफ्रीका) और MILAN जैसे नौसैनिक अभ्यास
- IFC-IOR (Information Fusion Centre – Indian Ocean Region) में दक्षिण अफ्रीका की भागीदारी
- राजनीतिक संवाद: BRICS, G20 और IBSA जैसे मंचों पर नियमित उच्च स्तरीय वार्ताएं, राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा 2019 में भारत के गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि रहे।
- व्यापार और निवेश:
- 2023–24 में द्विपक्षीय व्यापार $19.25 बिलियन तक पहुँचा।
- भारत से वाहन, दवाइयाँ, चावल और रसायन निर्यात होते हैं; दक्षिण अफ्रीका से सोना, कोयला, तांबा, फॉस्फोरिक एसिड और मैंगनीज आयात होता है।
- शिक्षा और कौशल:
- गांधी–मंडेला कौशल केंद्र (2021, प्रिटोरिया)
- ITEC कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षण
- भारतीय प्रवासी: दक्षिण अफ्रीका में लगभग 17 लाख भारतीय मूल की जनसंख्या है।
मुख्य चुनौतियाँ:
- राजनीतिक अनिश्चितता: दक्षिण अफ्रीका की अस्थिर राजनीतिक स्थिति दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी में बाधा बन सकती है।
- नीतिगत प्राथमिकताओं में भिन्नता: भारत समुद्री सुरक्षा को प्राथमिक मानता है, जबकि दक्षिण अफ्रीका की प्राथमिकताएँ घरेलू सामाजिक-आर्थिक मुद्दे हैं।
- रणनीतिक भिन्नताएँ: भारत हिंद महासागर क्षेत्र को आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से केंद्रीय मानता है, पर दक्षिण अफ्रीका का ध्यान अफ्रीकी महाद्वीपीय मुद्दों पर अधिक केंद्रित रहता है।
आगे की राह (Way Forward):
- पनडुब्बी सहयोग भारत-दक्षिण अफ्रीका संबंधों को नई ऊँचाई दे सकता है, यदि दोनों देश राजनीतिक इच्छाशक्ति बनाए रखें।
- दक्षिण अफ्रीका को अपनी आंतरिक आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों से निपटना होगा ताकि वह साझेदारी को व्यावहारिक रूप दे सके।
- भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि अफ्रीकी साझेदारियों के साथ किए गए समझौते केवल घोषणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि ठोस परिणाम भी सामने आएँ।