Rainbow water snake spotted for the first time in Dudhwa Tiger Reserve
संदर्भ:
दुधवा टाइगर रिज़र्व के बफर ज़ोन में रेनबो वॉटर स्नेक का पहला प्रलेखित अवलोकन 7 नवंबर 2025 को किया गया, जो उत्तर प्रदेश में जैव विविधता के विस्तार का महत्त्वपूर्ण संकेत है। यह खोज जैव सर्वेक्षण तथा पारिस्थितिक अनुसंधान की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।
रेनबो वॉटर स्नेक का परिचय:
रेनबो वॉटर स्नेक (Enhydris enhydris) एक कम विषैला, पीछे-दाँत वाला (rear-fanged) सर्प है। यह एशिया के मीठे पानी वाले आवासों में पाया जाता है और IUCN के अनुसार ‘Least Concern’ श्रेणी में सूचीबद्ध है।
- आकार: इस सर्प की लंबाई लगभग 35 सेंटीमीटर होती है। शरीर मोटा और चपटा, सिर संकरा और आँखें छोटी होती हैं। इनके शरीर का रंग मध्यम भूरे से हरे-भूरे तक होता है।
- भौगोलिक वितरण: यह प्रजाति दलदली, तालाब, धान के खेत जैसे मीठे पानी वाले आवास में पाई जाती है। इसका वितरण भारत, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार, थाईलैंड, वियतनाम, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया और दक्षिण चीन तक फैला है।
- आहार: इस सर्प का मुख्य आहार मछलियाँ हैं। इसके अलावा यह छोटे उभयचर और अन्य छोटे कशेरुकी जीव भी खाता है। यह स्थानीय जलीय पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण घटक है।
- व्यवहार: रेनबो वॉटर स्नेक आमतौर पर शांत और कम सक्रिय होता है। त्वचा बदलने (Ecdysis) के दौरान इसकी गति धीमी हो जाती है। यह मुख्यतः जलीय जीवन में रहता है और रात में सक्रिय हो सकता है।
- वैज्ञानिक महत्व: दुधवा टाइगर रिज़र्व में इस प्रजाति का प्रलेखन यह दर्शाता है कि यह खोज भविष्य में हर्पेटोफौना अनुसंधान और संरक्षण के लिए मार्गदर्शक साबित हो सकती है।
दुधवा टाइगर रिज़र्व:
दुधवा टाइगर रिज़र्व उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में इंडो–नेपाल सीमा पर स्थित है। इसकी स्थापना 1988 में हुई। इसका क्षेत्रफल लगभग 1,284 वर्ग किमी है।
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- संरचनात्मक इकाइयाँ: यह तीन प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों का समूह है— दुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य और कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य। इसके बफर ज़ोन में उत्तर खीरी, दक्षिण खीरी तथा शाहजहाँपुर वन प्रभाग के हिस्से आते हैं।
- पारिस्थितिकी तंत्र: यह क्षेत्र तराई-भाबर पारिस्थितिकी तंत्र का एक प्रमुख उदाहरण है, जो दलदली घास के मैदानों और आर्द्रभूमि की विशेषता है।
- प्रमुख वृक्ष: नॉर्थ इंडियन मॉइस्ट डेसिडुअस (उत्तरी भारतीय नम पर्णपाती) वन यहाँ पाए जाते हैं, जिनमें साल, असना, असिधा, हल्दू, फाल्दू, गहम्हार और कंजू प्रमुख वृक्ष हैं।
- नदी तंत्र: शारदा, गेरुवा, सुहेली और मोहाना जैसी नदियाँ इस क्षेत्र को पानी से भरपूर बनाती हैं, जिससे यह वन्यजीवों के लिए एक आदर्श आवास बन जाता है।

