Indigenous Light Combat Helicopter Prachand
संदर्भ:
हाल ही में राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने राजस्थान के जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) ‘प्रचंड’ में ऐतिहासिक उड़ान भरी। मुर्मु किसी लड़ाकू हेलीकॉप्टर में उड़ान भरने वाली देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं।
स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) ‘प्रचंड’:
- परिचय: ‘प्रचंड’ लाइट कॉम्बैट लड़ाकू हेलीकॉप्टर है जो अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों (High-altitude) में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है।
- पृष्ठभूमि: 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान एक ऐसे लड़ाकू हेलीकॉप्टर की आवश्यकता महसूस की गई जो अत्यधिक ऊंचाई (High Altitude) वाले क्षेत्रों में सटीक हमले कर सके।
- विकास: इसे हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा पूरी तरह से स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है।
- नामकरण: अक्टूबर 2022 में इसे औपचारिक रूप से ‘प्रचंड’ नाम दिया गया।
तकनीकी विशेषताएं:
- इंजन: यह दो ‘शक्ति’ इंजनों से संचालित है, जिन्हें HAL और फ्रांस की सफरान (Safran) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।
- भार श्रेणी: यह 5.8 टन श्रेणी का एक हल्का और फुर्तीला लड़ाकू हेलीकॉप्टर है।
- गति और रेंज: इसकी अधिकतम गति 268 किमी/घंटा है और इसकी परिचालन रेंज लगभग 550 किमी है।
- सर्विस सीलिंग: इसकी सेवा सीमा 21,000 फीट (6,500 मीटर) है, जो इसे सियाचिन जैसे दुर्गम क्षेत्रों में संचालित करने की शक्ति देती है।
- विश्व रिकॉर्ड: यह दुनिया का एकमात्र ऐसा लड़ाकू हेलीकॉप्टर है जो 5,000 मीटर (16,400 फीट) की ऊंचाई पर हथियारों के साथ टेक-ऑफ और लैंडिंग कर सकता है।
- हथियार प्रणाली:
- नाक के नीचे 20 मिमी बुर्ज गन (प्रति मिनट 800-1000 राउंड)।
- 70 मिमी रॉकेट और हवा से हवा में मार करने वाली ‘मिस्ट्रल’ (Mistral) मिसाइलें।
- भविष्य में यह ‘ध्रुवस्त्र’ (Helina का वायुसेना संस्करण) एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों से लैस होगा।
- स्टील्थ और उत्तरजीविता: इसमें रडार-अवशोषित सामग्री का उपयोग किया गया है ताकि इसकी रडार सिग्नेचर कम रहे। साथ ही, इसमें ‘क्रैश-प्रूफ’ लैंडिंग गियर और न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल, केमिकल (NBC) सुरक्षा वाली केबिन मौजूद है।
महत्व:
- आत्मनिर्भर भारत: यह रक्षा क्षेत्र में आयात निर्भरता को कम करने और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने का प्रतीक है। वर्तमान में इसकी स्वदेशी सामग्री लगभग 45% है, जिसे 65% तक ले जाने का लक्ष्य है।
- बहु-भूमिका: यह कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू (CSAR), दुश्मन की वायु रक्षा को नष्ट करने (DEAD), और उग्रवाद विरोधी अभियानों के लिए सक्षम है।
- चीन-पाक सीमा: यह एलएसी (LAC) और एलओसी (LoC) पर ऊंचे युद्धक्षेत्रों में तैनात भारतीय सेना और वायुसेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है।

