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पनडुब्बी रोधी युद्धपोत आईएनएस अंजदीप (Anti-submarine warfare corvette INS Anjadeep) | Ankit Avasthi Sir

Anti-submarine warfare corvette INS Anjadeep

Anti-submarine warfare corvette INS Anjadeep

संदर्भ:

हाल ही में ‘अभय’ श्रेणी के जलपोतों का स्थान लेने के लिए बनाए जा रहे आठ ASW SWC (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft) प्रोजेक्ट के चौथे युद्धपोत ‘अंजदीप’ (Anjadip) को आधिकारिक रूप से नौसेना में शामिल किया गया है।

पनडुब्बी रोधी जलपोत अंजदीप के बारे मे:

  • परिचय: अंजदीप (Anjadip) भारतीय नौसेना का एक पनडुब्बी रोधी युद्धपोत (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft – ASW SWC) है, जिसे मुख्य रूप से तटीय क्षेत्रों के उथले पानी में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए बनाया गया है।
  • निर्माता: इस जलपोत का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा किया गया है।
  • प्रोजेक्ट विवरण: रक्षा मंत्रालय और GRSE के बीच 2019 में आठ ASW SWC जहाजों के निर्माण का अनुबंध हुआ था। ‘अंजदीप’ इस श्रृंखला का चौथा पोत है।
  • नामकरण: इसका नाम कारवार (कर्नाटक) के पास स्थित अंजदीप द्वीप के नाम पर रखा गया है, जिसने 1961 के ‘ऑपरेशन विजय’ (गोवा मुक्ति) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

विशेषताएं:

  • आकार और गति: इसकी लंबाई लगभग 77 मीटर और चौड़ाई 10.5 मीटर है। यह अधिकतम 25 नॉट की गति प्राप्त करने में सक्षम है।
  • स्वदेशी सामग्री: ‘अंजदीप’ में 80% से अधिक स्वदेशी पुर्जों का उपयोग किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती प्रदान करता है।
  • प्रणोदन (Propulsion): यह तीन वाटर जेट्स द्वारा संचालित होता है, जो इसे उथले पानी में अत्यधिक फुर्तीला (Maneuverable) बनाते हैं।
  • सोनार प्रणाली: यह उन्नत हल-माउंटेड सोनार और लो-फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार (VDS) से लैस है।
  • अस्त्र-शस्त्र: इसमें स्वदेशी रूप से विकसित टॉरपीडो, पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर और माइन्स बिछाने की क्षमता शामिल है।
  • बहुआयामी भूमिका: पनडुब्बी रोधी युद्ध के अलावा, यह खोज और बचाव (SAR) अभियानों और समुद्री घुसपैठ रोकने में भी सक्षम है।

ASW SWC (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft) प्रोजेक्ट

  • ASW SWC प्रोजेक्ट भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा को आधुनिक बनाने की एक महत्वाकांक्षी योजना है। यह 2019 में रक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया था, जिसके तहत कुल 16 जलपोत बनाए जाने हैं:
  1. 8 जहाजों का निर्माण: गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा (L&T कट्टुपल्ली के सहयोग से)।
  2. 8 जहाजों का निर्माण: कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि द्वारा। 
  • प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति:
    • INS अंजदीप (Anjadip): यह GRSE द्वारा निर्मित श्रृंखला का चौथा जलपोत है, जिसे 27 फरवरी 2026 को चेन्नई पोर्ट पर औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल (Commission) किया गया।
    • शामिल हो चुके अन्य प्रमुख जलपोत (GRSE):
      • INS अर्नाला (Arnala): पहला पोत (जून 2025 में कमीशन)।
      • INS एंड्रोथ (Androth): दूसरा पोत (अक्टूबर 2025 में कमीशन)।
  • CSL प्रोजेक्ट की स्थिति: कोचीन शिपयार्ड में निर्मित पहले पोत ‘माहे’ (Mahe) की डिलीवरी अक्टूबर 2025 में हुई। अन्य पोत जैसे मालवन, मंगरोल, मालपे और मुल्की विभिन्न परीक्षण चरणों में हैं।
  • अंतिम लक्ष्य: इस प्रोजेक्ट के सभी जहाजों को वित्त वर्ष 2026-27 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 
  • विशेषताएं: इन जहाजों में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री है। इन्हें “डॉल्फिन हंटर” कहा जाता है क्योंकि ये उथले पानी में दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने और नष्ट करने में माहिर हैं। 

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