Rail Tech Policy
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए ‘रेल टेक पॉलिसी’ (Rail Tech Policy) का अनावरण किया। यह पहल भारतीय रेलवे की ’52 सप्ताह में 52 सुधार’ (52 Reforms in 52 Weeks) रणनीति का तीसरा प्रमुख सुधार है। इसी के साथ ‘रेल टेक पोर्टल’ (Rail Tech Portal) का भी अनावरण किया गया।
रेल टेक पॉलिसी (Rail Tech Policy) के बारे में:
- परिचय: यह भारतीय रेलवे द्वारा अपनाई गई एक नवाचार-केंद्रित नीति (Innovation-led Policy) है, जो अत्याधुनिक तकनीकों (AI, IoT, ड्रोन) के माध्यम से रेलवे की समस्याओं का समाधान करने के लिए स्टार्टअप्स, MSMEs और व्यक्तिगत इनोवेटर्स को एक औपचारिक मंच प्रदान करती है।
- मंत्रालय: रेल मंत्रालय (Ministry of Railways)।
- उद्देश्य:
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- तकनीकी आधुनिकीकरण: रेलवे के संचालन, सुरक्षा (जैसे- कवच, AI सेंसर) और रखरखाव में ग्लोबल स्टैंडर्ड की तकनीक को एकीकृत करना।
- स्वदेशी नवाचार (Atmanirbhar Bharat): विदेशी आयातित तकनीकों पर निर्भरता कम करना और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत घरेलू समाधानों को बढ़ावा देना।
- प्रक्रिया का सरलीकरण: लंबी और जटिल टेंडरिंग प्रक्रियाओं को खत्म कर स्टार्टअप्स के लिए रेलवे में प्रवेश आसान बनाना (Single-window system)।
- स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहन: इनोवेटर्स को 50% तक फंडिंग, तकनीकी सहायता और सफल परीक्षण के बाद गारंटीकृत बाजार (Market access) प्रदान करना।
रेल टेक पॉलिसी की विशेषताएं:
- नवाचार-आधारित ढांचा: यह नीति पुराने ‘वेंडर-आधारित मॉडल’ (जहाँ कठोर विनिर्देशों के आधार पर चयन होता था) को समाप्त कर ‘ट्रायल और एडॉप्शन’ (Trial and Adoption) मॉडल पर आधारित है। इसे रक्षा क्षेत्र के iDEX (Innovation for Defence Excellence) और दूरसंचार क्षेत्र की नीतियों की तर्ज पर तैयार किया गया है।
- वित्तीय प्रोत्साहन और अनुदान:
- 50% लागत साझाकरण: रेलवे व्यवहार्य तकनीकी समाधानों के विकास की 50% लागत खुद वहन करेगा।
- अनुदान में वृद्धि: प्रोटोटाइप विकास के लिए अनुदान को दोगुना और सफल समाधानों के स्केल-अप के लिए ग्रांट को तीन गुना से अधिक बढ़ा दिया गया है।
- रेल टेक पोर्टल (डिजिटल गेटवे): यह एक 24×7 ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जहाँ स्टार्टअप्स और शोधकर्ता सीधे अपने प्रस्ताव भेज सकते हैं। यहाँ सिंगल-स्टेज डिजिटल सबमिशन की व्यवस्था है, जिससे प्रशासनिक जटिलताएं कम होंगी।
- नवाचार के प्राथमिकता वाले क्षेत्र: नीति के तहत निम्नलिखित अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग को अनिवार्य बनाया गया है:
- सुरक्षा (Safety): AI-आधारित हाथी घुसपैठ पहचान प्रणाली (EIDS), कोहरे में बाधा पहचान प्रणाली और कोचों में स्वचालित अग्नि पहचान।
- ट्रैक निगरानी: ड्रोन और अल्ट्रासोनिक तकनीकों द्वारा रेल फ्रैक्चर और ओव्हरहेड इक्विपमेंट (OHE) की निगरानी।
- परिचालन क्षमता: वैगनों पर सेंसर-आधारित लोड कैलकुलेशन और कोचेस पर सोलर पैनल का एकीकरण।
- प्रशासनिक: AI-आधारित पेंशन प्रसंस्करण और विवाद निपटान प्रणाली।
महत्व:
- बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR): विकसित तकनीक का मालिकाना हक इनोवेटर्स के पास ही रहेगा, जिससे स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।
- गारंटीकृत बाजार: सफल परीक्षणों के बाद, रेलवे इन स्टार्टअप्स को लॉन्ग-टर्म ऑर्डर प्रदान करेगा, जिससे वे वैश्विक बाजारों में निर्यात के लिए भी सक्षम हो सकें।
- आत्मनिर्भर भारत: यह विदेशी आयातित रेल तकनीक पर निर्भरता को कम कर ‘मेक इन इंडिया’ विजन को मजबूती प्रदान करता है।

